एक बार आ जाओ ना (भाग-1) – मीनू झा
खुशबू जैसे लोग मिले अफसाने में,एक पुराना खत खोला अनजाने में- पता नहीं ये ग़ज़ल थी,या किसी ने अपना सीना चीर कर उसे लफ्जों हर्फों में सजा दिया था,उसकी हर शाम इस गाने से शुरू होकर जाने कहाँ कहाँ भटकती हुई एक अंतहीन मोड़ पर जाकर रूक जाती,पर जीवट की दाद तो बनती है ना … Read more