अब स्वाभिमान से जीना है – सुनीता तिवारी
आरती का पोर पोर दुख रहा था। आंसू बहाते बहाते आंखे लाल होकर सूज आयीं थीं। उसने एक नजर सोती हुई डेढ़ वर्षीय बेटी परी पर डाली,जो भूख से बिलख बिलख कर सो गई थी और आंसू गालों पर सूख कर निशान छोड़ गए थे। कहने को तो वो एक प्रोफेसर की पत्नी थी,लेकिन खुद … Read more