वो खट्टी मीठी यादें – नीरजा नामदेव

ये मेरी शादी के बाद की घटना है इधर शादी के बाद नाश्ता या खाना बनाने से पहले सासू मां से क्या बनाना है, कैसे बनाना है पूछ कर बनाना पड़ता है तो मैं भी ऐसा ही करती थी। सासू मां क्या बनाना है के साथ ही मात्रा भी बता देती थी और बनाने की … Read more

चेहरे पे चेहरा  – बेला पुनिवाला 

डिम्पल के पापा ने डिम्पल की शादी एक बहुत ही बड़े घराने में की थी, उनको ये नहीं पता था, कि ” ऐसे बड़े घरो में रहनेवाले लोगों के हाथी के दाँत दिखाने कुछ ओर और चबाने वाले दाँत कुछ और होते है.. “         डिम्पल एक बहुत खुले विचारों वाली पढ़ी-लिखी लड़की थी, घूमना फिरना, … Read more

सु कर्म – कंचन श्रीवास्तव

बढ़ती उम्र के साथ स्त्री जिन रिश्तों को पहचानती है वो है बाप,भाई,पति और अंततः बेटा हां बेटा,कुछ पल के लिए उसके जीवन में एक ऐसा रिश्ता भी आता है जिसे सिर्फ़ वो महसूस करती है , जता नहीं सकती क्योंकि जताने नही सकती। और इन्हीं की खिदमत करते करते वो दुनिया को अलविदा कर … Read more

प्रेम – मधु झा

जाने लोग किसी को भूलना क्यों चाहते हैं,, आखिर ये भूलना शब्द है क्या,,इसका कोई वजूद भी है क्या,,हम इस शब्द को इतना तवज्जो क्यों देते हैं,,और क्यों भूलना किसी को जब कोई हमारे लिये बहुत अजीज़ है,,वो  हमें इतना प्यारा है कि हमारे ज़ेहन में उतर चुका है,,हमारी आत्मा में बस चुका है,, हमें … Read more

गेंद का बचपन- देवेंद्र कुमार

जया की रमा दादी पूजा कर रही थीं। रविवार का दिन था, घर के सब लोग बाहर गए थे, नीचे बच्चे शोर मचा रहे थे, इसलिए दादी का ध्यान बार बार भटक जाता था। तभी झन्न की आवाज के साथ पूजा की थाली उलट गई। जलता दीपक बुझ गया, पूजा की सामग्री बिखर गई। बच्चों … Read more

बम – अनुज सारस्वत

“अम्मा मम्मी पापा अलग क्यों रहते हैं मुझे कभी मम्मी के पास कभी पापा के पास जाना पड़ता है ,आप बोलो न उनको साथ रहा करें “ 5 साल के अंकुश ने अपनी दादी से कहा दादी यह सुनकर भावुक हो गयी और कहा “हां बेटा मैं बात करूंगी “ एक साल पहले ही दो … Read more

 जो चाहें वो मिल जाए  जिंदगी अपने रंग दिखाए  – स्नेहज्योति

मैं ‘वीर’जो अपने माँ-बाप का लाड़ला था ऐसा नहीं कि मैं अकेली औलाद था,मेरा एक छोटा भाई भी था,पर अपने वालिदैन का मैं हमेशा से ही आकर्षण का केंद्र रहता था।मेरी हर बात का फ़ैसला वही करते थे,शायद यही बात मुझे परेशान करती थी,मुझे खुद कुछ करने नहीं देते थे,हर पल उनकी उँगली पकड़ चलना … Read more

दिनचर्या  – त्रिलोचना कौर   

   भारती दोपहर खाने के बाद आराम करने जा ही रही थी कि बेटे अभिराज का फोन आ गया” माँ,एक वर्ष के लिए मेरी पोस्टिंग ऐसी स्थान पर हो गई है। मै वहाँ सौम्या और बच्चों को लेकर नही जा सकता अत: इसी हफ्ते मै इन लोगों को छोड़ने घर आऊंगा”                          भारती खुशी से फूली नही … Read more

किस्मत वाली – डॉ अंजना गर्ग

“ओ, नेहा तुम,  क्या तुम दिल्ली में आ गई? तुम तो पटियाला में थी।” नेहा को मार्केट में देख अनु ने हैरानी से पूछा। “मेरे हस्बैंड डेपुटेशन पर दिल्ली आये  है। अभी पिछले महीने ही हम लोगों ने दिल्ली शिफ्ट किया है ।” नेहा ने बताया। साथ ही कहने लगी मेरा घर बिल्कुल पास है … Read more

आस निरास भई – कमलेश राणा

कमलेश राणा बात 1981की है यह घटना जब भी याद आती है चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कुराहट आ जाती है। ट्रांसफर के अनवरत क्रम में उस समय उन दिनों हम एक छोटे कस्बे या यूँ कह लीजिये कि सड़क किनारे बसे बड़े से गांव में पहुंचे। उन दिनों वहाँ नई ब्रांच खुली थी बैंक … Read more

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