भाई हो तो ऐसा –  विभा गुप्ता

 ” भाभी, मैं काॅलेज़ जा रहा हूँ, आज एक एक्स्ट्रा क्लास है,तो आने में देरी हो सकती है।” विनय अपनी भाभी आनंदी को कहकर काॅलेज़ चला गया।         विनय का बड़ा भाई नरेंद्र एक सरकारी मुलाज़िम थें।नरेंद्र के पिता अध्यापक थें और माँ एक सुघड़ गृहिणी।पति की सीमित आय में उनकी माँ ने अपने दो बेटों … Read more

हर उम्र की जिम्मेदारी – पूनम अरोड़ा

 वैसे तो बचपन से पढ़ने में होनहार थी कावेरी किन्तु जब एक्जाम होते तो बहुत ज्यादा तनाव में  रहती ।पहले से तैय्यारी होने के बावजूद बार बार रिवाइज़ करती रहती । उसे पास होने का भय नहीं बल्कि   अपनी  प्रथम श्रेणी बचाने और क्लास में  सबसे आगे रहने का एक उन्माद सा रहता। जिसे … Read more

एक जिम्मेदारी यह भी  –  पूजा मनोज अग्रवाल

भाभी,,,!! जल्दी से नीचे आइए,,,देखिए ये क्या हो गया ,,,!! एकाएक देवर जी और देवरानी की आवाज सुन कर मेरा मन घबराया और मैं दौड़ कर सीढ़ियों से नीचे वाले फ्लोर पर आई ।  अमावस का दिन था तो उस दिन घर पर वैसे ही बहुत काम था तो सासू मां ,में और मेरी देवरानी … Read more

सपनों के इन्द्रधनुष – डॉ पुष्पा सक्सेना

  उस पहाड़ी कस्बे में पापा की नियुक्ति होते ही आस-पास के बंगले वाले स्वागत-सत्कार में जुट गए थे। रोज ही नई सौगातों, पार्टियों का तांता लग गया था। छोटी जगहों में पुलिस अधिकारी का दबदबा ज़रा अधिक ही होता है। पापा को जो कोठी मिली थी उसके बाई ओर मानिकराम की लांड्री थी। पूरे कस्बे … Read more

 ईमानदार कोशिश – लतिका श्रीवास्तव

आज फिर भोजन कक्ष में हंगामा बरपा था…भोजन से भरी थालियां जमीन पर औंधी पड़ीं थीं  दाल से भरे गंज में तिलचट्टे तैर रहे थे सब्जी से दीवाल पर चित्रकारी की गई थी   और रोटियां तो टेबल मैट बन गई थीं…..मृदुला जी जब तक वहां पहुंचीं खाना पकाने वाले त्रस्त होकर भाग चुके थे … Read more

ये कैसी जिम्मेदारी है… – संगीता त्रिपाठी

“जिम्मेदारी..”ये शब्द अपने में अनेक भार लिये हुये है, कुछ हँस कर निभाते है कुछ मज़बूरी में निभाते है..। किसी को समय पर जिम्मेदारी मिलती है तो किसी को असमय….।      जिम्मेदारी से मुझे अपने पड़ोस में रहने वाली सुषमा दीदी याद आ गई…। एक सुबह जब मेरी ऑंखें खुली तो सामने के घर में ट्रक … Read more

ज़िम्मेदारी नहीं फ़र्ज़ है। – रश्मि सिंह

रागिनी-पापा कितना टाइम और लगेगा, हमनें सब तैयारियाँ कर ली है, और पापा, नानी भी हमारे साथ अभी चलेंगी। शेखर (रागिनी के पापा)-बेटा आवाज़ नहीं आ रही है, कुछ नेटवर्क प्रॉब्लम है, बस एक घंटे में पहुँचने वाला हूँ। रागिनी- ठीक है पापा जल्दी आइए साथ में ख़ाना खाएँगे। ये है रागिनी, शेखर और उमा … Read more

एक बदलाव – रीमा महेन्द्र ठाकुर

प्रगति  प्रगति,””””  दरवाजे पर कबसे दस्तक दे रही थी अणिमा “ ये कौन  सुबह सुबह दरवाजा पीट रहा है” नीदं मे खलल होने से” मन ही मन बडबडायी प्रगति “ प्रगति  प्रगति “” ये पक्का अणिमा होगी “गजब की लडकी है” संस्कारों की देवी “अपने बालो को पोनी मे तब्दीली करती हुई  प्रगति बेड से … Read more

दो सहेलियां  – गीता वाधवानी

नीतू और गीतू दोनों पक्की सहेलियां, मानो दो जिस्म एक जान। एक ही मोहल्ले में आसपास दोनों के घर। नर्सरी से कॉलेज तक एक साथ पढ़ाई की। जब शादी की उम्र हुई, तब दोनों को यह चिंता सताने लगी कि कहीं हम बिछड़ ना जाएं। दोनों ने एक दूसरे को वचन दिया कि हम दोनों … Read more

ज़िम्मेदारी सिर्फ़ बड़े भाई की है – के कामेश्वरी

फोन की घंटी बज रही थी । सुषमा रसोई में खाना बनाने में लगी थी क्योंकि सबको टिफ़िन बॉक्स देना था । देव नहाने गए थे । बच्चे दोनों भी कॉलेज के लिए तैयार हो रहे थे ।  अपने कमरे में से सास चिल्ला रही थी कि कोई तो फ़ोन उठाओ । वह बार बार … Read more

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