निर्मल बालमन – पुष्पा जोशी
रुक जाओ कमली…। मगर कमली नहीं रुकी। उसने निर्णय कर लिया था, कि वह इस घर में तो क्या, इस शहर मैं भी नहीं रहेगी। कमली गरीब थी, मगर उसका भी आत्म सम्मान था। वह मेहनती और ईमानदार थी। इतना अपमान, इतनी जिल्लत, उसने पहले कभी सहन नहीं की थी। उसने अपने तीनों बच्चों को … Read more