ज़िम्मेदारी – मधु झा

“तुमसे कुछ नहीं हो सकता। तुम इतना भी नहीं कर सकती।” कहते हुए सचिन सारे पेपर्स और बैग लेकर जोर से दरवाज़ा बंद करते हुए आफ़िस के लिए निकल गया। वो तो चला गया मगर ये शब्द जयश्री के कानों में अब भी गूँज रहे थे। वो घर के मंदिर के सामने आँखें मूँदे चुपचाप … Read more

अपना सम्मान अपने हाथों में  – गीता वाधवानी

अक्सर घरों में देखा जाता है कि औरत ही औरत की दुश्मन बन जाती है और कलह उत्पन्न हो जाती है। जैसे की सास बहू, ननद भाभी या फिर देवरानी जेठानी। कभी-कभी तो छोटी सी बात इतनी बढ़ जाती है कि घर के पुरुष परेशान हो जाते हैं और समझ नहीं पाते कि किस का … Read more

पुरुष भी घरेलू हिंसा के शिकार होते है – संगीता अग्रवाल 

अरुण अखबार पढ़ रहा था पढ़ते पढ़ते तीन चार खबरे उसे महिलाओ पर घरेलू हिंसा के दिखाई दिये । अखबार ने एक खबर तो सुर्खियों मे छापी थी क्योकि किसी बड़े व्यापारी की बेटी घरेलू हिंसा का शिकार हुई थी। ” हुई थी या सिर्फ दुनिया को दिखाया गया था ?” उसके मन मे विचार … Read more

फैसला – नंदिनी

प्रिया घरवालों की लाड़ली पड़ने में होशियार एक छोटा भाई और मम्मी पापा छोटा सा परिवार । पढ़ाई में अव्वल आती हमेशा और आगे की पढ़ाई  के लिए बड़े शहर होस्टल में रहकर आगे की पढ़ाई की। इसी बीच उसकी बुआ की बेटी की शादी आती है ,दोनों बचपन से साथ रहे थे बहुत, तो … Read more

उसकी खुशियों की जिम्मेदारी मेरी है – पुष्पा जोशी

तरूणा की दशा देखकर, रामेश्वर जी करूणा से भर गए। उन्होंने हौले से उसके सिर पर हाथ रखा,और बस यही कह पाए ‘बेटा! तू अकेले इतना सबकुछ सहती रही, हमसे कुछ कहा क्यों नहीं? पर बस अब और नहीं, बेटी मैं सबकुछ ठीक कर दूंगा।’ उनका गला रूंध गया था। अपने ऑंसू छिपाने के लिए … Read more

चने वाला – संगीता श्रीवास्तव

वह एक शाम थी। मैं ट्रेन से उतर कुछ फल और बिस्कुट के पैकेट्स को ले लंबी- लंबी डेंगे मारती टैक्सी स्टैंड जा रही थी। मैं लोकल ट्रेन से ही कार्यालय आती जाती थी।उस दिन मुझे जल्दी घर पहुंचना था क्योंकि मैं अपनी 3 साल की बीमार बेटी को बूढ़ी सास के पास छोड़ आई … Read more

चोली-दामन का साथ – स्नेह ज्योति

माँ – बाप जिसे लाडो से पालते हैं ,वहीं एक दिन हो जाती पराई है “घर की बगिया में खिली नन्ही कली दूसरे की बगिया का फूल बनने चली जाती हैं “। राधिका का भी अरमा था कि कब वो बड़ी होएगी और पढ़ाई से उसे निजात मिलेगी । क्योंकि उसे पढ़ना पसंद नहीं था … Read more

चुपचाप जिम्मेदारी निभाता हुआ पुरुष  – शुभ्रा बैनर्जी

चुपचाप जिम्मेदारी निभाता हुआ पुरुष अपने भाई के श्राद्ध में जैसे ही दोनों विवाहित बहनों ने सुधा के हांथों कुछ रुपए रखे,सुधा को लगा मानो उसके पति के मुंह पर थप्पड़ मार दिया है उन्होंने।बच्चों ने भी पहले ही बोल कर रखा था कि किसी से पैसों की मदद नहीं लेना मां।सुधा आस पास के … Read more

अँधेरों से आगे – नीलम सौरभ

पति से बातें करती हुई यामिनी के नयन फिर से झर-झर बरस रहे थे मगर आज की यह बारिश ख़ुशियों वाली थी। वे भी प्रेम से ताके जा रहे थे कर-बद्ध एकटक उनके मुख को निहारती हुई अर्द्धांगिनी को। पति के गहरे नयनों की भाव-भरी भाषा को बाँचती हुई यामिनी बीते अतीत की भूल-भुलैया में … Read more

एक गलती की सजा –  सविता गोयल

” सर आप क्या लेंगे? ,, वेटर ने आर्डर लेते हुए जतिन से पूछा। ” काॅफी और एक सैंडविच ” जतिन ने अपना आर्डर बता दिया । थोड़ी देर में एक वेट्रेस उसका आर्डर लेकर आई ,” सर, योर आर्डर ,,   मोबाइल में नजरें गड़ाए  जतिन की नजरें जैसे ही उस लड़की की तरफ उठीं … Read more

error: Content is protected !!