दोस्ती पक्की वाली – गीता वाधवानी

दो पक्के दोस्त किशन और कन्हैया। इतनी पक्की वाली दोस्ती कि दोनों  को एक दूसरे को देखे बिना चैन ही नहीं पड़ता था। रोज सुबह सैर करते समय दोनों ढेरों बातें करते और फिर रात को एक बार जरूर मिलते। दोनों के घरों में कुछ दूरी थी।  एक सुबह सैर करने के बाद जब दोनों … Read more

खून के आँसू   – अविनाश स आठल्ये

सुनो न संजू,  हम अपने ड्राइंग 2 टन का AC लगवा लें क्या? इस बार हमारे घर में “किटी पार्टी” हो रही हैं लेडीज़ की, यह कूलर बिल्कुल चीप टाइप लगता है.. तुम्हें नहीं पता है अनुष्का, तुम से शादी करके तो मैं रोज खून के आँसू रोता हूँ… कहकर उसका पति संजू उर्फ़ संजय … Read more

माफी की खुशबू – लतिका श्रीवास्तव

प्रतिदिन की भांति ही आज भी  प्रेयर हुई समाचार वाचन फिर नीति वाक्य बोले जा रहे थे…एक बच्ची ऋतु बहुत उत्साह से माइक पर बोल रही थी “……माफी तो वो खुशबू होती है जो एक फूल उन्हीं हाथों में छोड़ जाता है जिन हाथों ने उसे तोड़ा होता है….इसलिए जीवन में हमेशा माफी मांगने और … Read more

माफी (कहानी) – डाॅ संजु झा

अनिता मूँदीं आँखों से अस्पताल के बिस्तर पर लेटी-लेटी अपनी जिन्दगी का लेखा-जोखा लगा रही थी।उसकी आँखों के कोर से आँसू बह रहे थे।उसी समय हरी मखमली घास -सी  डाॅक्टर  बेटी नीरा की शीतल छुअन उसके तन-मन को शीतल कर गई। पश्चाताप उसकी आँखों से आँसू बनकर बह रहा था।उन आँसुओं ने उसे बेटी नीरा … Read more

मुहावरा – विभा गुप्ता

अध्यापिका होने के नाते मुझे सैकड़ों विद्यार्थियों की उत्तर- पुस्तिका जाॅंचने का अवसर प्राप्त हुआ था।कुछ उत्तरों को पढ़कर हॅंसी आती थी तो किसी विद्यार्थी के कम अंक आने पर मन उदास भी हो जाता था।समय के साथ फिर वे धुंधली भी पड़ जाती थीं लेकिन एक उत्तर ने मेरे मन को झंझोर दिया था। … Read more

इस गुनाह की माफ़ी नहीं! –  प्रियंका सक्सेना

आज गार्गी और राकेश बहुत परेशान हैं बार-बार एकदूसरे को देख रहे हैं। वे दोनों पापाजी के रूम में कुर्सियों पर बैठे हैं ,पास में ही पापाजी लेटे  हैं शायद अब जाकर उनकी आँख लग गई है।  तभी उन दोनों ने एकदूसरे को आँखों ही आँखों में कुछ इशारा किया और पापाजी के रूम से … Read more

खून के आँसू रुलाना – के कामेश्वरी

सुरेश चंद्र जी की मृत्यु की खबर पूरे फ़्लैट में आग की तरह फैल गई थी । सब की जुबान पर एक ही बात थी कि कितने अच्छे इन्सान थे । वे रोज़ मंदिर जाते थे । अपने जन्मदिन पर मंदिर के पुजारियों को कपड़े बाँटते थे और तो और ज़रूरतमंदों की सहायता करते थे,तभी … Read more

बस अब और खून के आंसू नहीं रुलायेगा तू बहू को  – मीनाक्षी सिंह

अंदर से जोर जोर से बहू के रोने की आवाज आ रही थी ,खिड़की से झांककर देखा रमेशजी (ससुर ) और मधुजी (सास ) ने तो गिड़गिड़ाने लगे -छोड़ दे बहू को नीरज (बेटा ) ! मर जायेगी वो और कितना मारेगा उसे बेल्ट से ! मधुजी सिस्कियां भरती हुई बोली ! माँ जी ,पापा … Read more

आज कुछ एक्सपेरिमेंटल करती हूं। – मुक्ता सक्सेना

मां, आगे से आप हमसे तो कोई उम्मीद मत रखिएगा। आपने क्या सोच कर हमे पैदा किया था? क्या हमारा कोई अपना भविष्य, पत्नी बच्चे, चाहतें नही है। आपके पास ये अपना घर है। हमे कुछ नही चाहिए। लेकिन हम जीवन भर का बोझ नहीं उठा सकते। क्या इसी दिन के लिए हम लोग पढ़े … Read more

पता नहीं कैसे – गुरविंदर टूटेजा

आज सुधा बहुत खुश थी अपने इकलौते बेटे के लिए  तन्वी जैसी बहू पाकर बहुत समझदार व संस्कारी थी उसे विश्वास था कि वो उसे अपने प्यार से संभाल लेगी…!!!!    अरे चाची क्या सोचने लगी जल्दी से आरती उतारिए व बहू का गृहप्रवेश कराईये…हाँ कहकर उसने आरती उतारी और उसे बड़े प्यार से अपने घर … Read more

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