इज्जत की बेड़ी। – रश्मि सिंह

प्रणव-आप सभी को सुप्रभात। आज हिन्दी सम्मेलन में आप सभी का स्वागत है। आपका विषय है-#इज़्ज़त। इस विषय पर लिखने के लिए आपके पास तीन घंटे का समय है।  गरिमा विषय का नाम सुनते ही अतीत में पहुँच जाती है। माँ ने शादी के दिन समझाया था-जवानी से लेकर अब तक तुमने हमारा मान सम्मान, … Read more

लता – कमलेश राणा

बड़े अरमानों से रक्खा है बलम तेरी कसम प्यार की दुनियां में ये पहला कदम।  कमोबेश हर लड़की जब ससुराल में अपने पति के साथ गांठ जोड़कर महावर भरे पैरों से प्रवेश करती है तो उसके दिल और दिमाग में यही विचार चल रहे होते हैं चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या प्रांत की … Read more

“चरण स्पर्श” – ऋतु गुप्ता

दरवाजे पर शहनाई बज रही थी, कल्पना जी फूलों से नई बहू की अगवानी (स्वागत)कर रही है, वो सबसे पहले अपनी नई बहू सपना को दादी सास के पास ले जाती हैं, जैसे ही न‌ई बहू सपना ने दादी सास के चरण स्पर्श किए, दादी जी ने आशीर्वाद के साथ साथ नसीहत और सलाहों की … Read more

एक गलत फैसला – गीता वाधवानी

आज मैं आपको एक कहानी सुनाती हूं। शायद यह कहानी सुनकर कोई और लड़की मेरी गलती से सबक ले सकें। जी क्या कहा आपने, मैं कौन हूं? आप मुझे नहीं जानते।  हां सही कहा आपने, कैसे जानेंगे मुझे। मैं कोई मशहूर हस्ती या सेलिब्रिटी तो हूं नहीं। मैं हूं एक आम लड़की, नाम टीशा।  एक … Read more

इत्र वाला नशा – स्नेह ज्योति

सन सत्तर का ज़माना था ऊंची पैंट पहन आँखो पे गोगल लगा,गली में इतराना था।कोई अपुन को टोक दे,ऐसा बस फ़साना था।हीरो नही पर हीरो वाला रुबाब दिखा लड़कियों पे इंप्रेशन जमाना था ।अपुन का नाम बोले तो लियाक़त हरफ़नमौला सक्षीयत वाला बंदा हूँ।प्यार से लोग मुझे लियाक कहते हैं।विरासत में दो ही चीजें मिली-एक … Read more

गलती का अहसास – के कामेश्वरी 

रमेश और रचना के तीन बच्चे थे । सबसे बड़ा लड़का शिशिर था उसके बाद जूही और ख़ुशबू । रचनाके घर जो भी आते थे उनके बच्चों के नाम सुनकर कहते थे तुम्हारा घर तो बाग है । शिशिर नेइंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और एक बहुत बड़े कंपनी में नौकरी करने लगा था । … Read more

माता-पिता बच्चों पर बोझ क्यों हो जाते…. – रश्मि प्रकाश

“ अरे अरे ये क्या कर रहे हैं जी आप…. सामान क्यों बाँध रहे हैं…?” सुनंदा जी ने रामशरण जी से पूछा  “ हम अपने घर जा रहे हैं… अब यहाँ एक पल भी नहीं रूकना..समझी तुम ।” डपटते हुए रामशरण जी ने कहा  “ अरे धीरे बोलिए ना…बेटा बहू सुन लेंगे ।“ सुनंदा जी … Read more

क्या यही प्यार है ? (भाग  -3)  – संगीता अग्रवाल 

कुछ दिनों की कोशिश के बाद मीनाक्षी ने केशव की नौकरी अपने ऑफिस मे लगवा दी। केशव शुरु मे ये नौकरी करना नही चाहता था क्योकि उसे ऐसा लगता था एक ऑफिस मे नौकरी होने से कही दोनो मे दूरियां ना आ जाये या कही किसी मोड़ पर दोनो का अहम ना टकरा जाये।  तब … Read more

क्या यही प्यार है ? (भाग  -2)  – संगीता अग्रवाल

अब प्यार का इजहार तो हो गया पर कॉलेज का आखिरी दिन था तो रोज मिलना तो संभव था नही तो अब एक ही जरिया था जिससे उन दोनो का प्यार परवान चढ़ सकता था वो था फोन …तो फोन पर लम्बी लम्बी बाते होने लगी …। ” मीनू क्या हम मिल नही सकते ?” … Read more

क्या यही प्यार है ? (भाग  -1)  – संगीता अग्रवाल 

“ये अदालत एक घंटे तक के लिए मुल्तवी की जाती है ।” जज के इतना बोलते ही शांत अदालत मे चहल पहल शुरु हो गई। दोपहर के डेढ़ बजे थे लंच ब्रेक था। जज अपनी कुर्सी छोड़ जा चुके थे। कुछ लोग बाहर आ चाय पी रहे थे कुछ आस पास के स्टॉल से कुछ … Read more

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