विश्वास की डोर – नताशा हर्ष गुरनानी
आज रजत बहुत उदास और परेशान है उसे समझ नही आ रहा है वो करे तो क्या करें। कल तक जो परिवार उसका अपना था आज एक पल सब पराए लगने लगे उसे। क्यों सुनी उसने अपने मम्मी पापा की बात कि उसे अनाथालय से गोद लिया था। ओह मैं अनाथ था इन्होंने मुझ पर … Read more