मनहूस रातों का रुदन ! – रमेश चंद्र शर्मा
” नंदा, तुम यह सब कैसे बर्दाश्त कर लेती हो। तुम्हारी जगह दूसरी औरत होती तो कुछ भी कर गुजरती।” नेहा ने अपनी सहेली नंदा से तीखा सवाल पूछ लिया। नंदा (नेहा से) ” सच कहूं ।गलती मेरी ही है। जवानी की दहलीज़ पर कदम रखते ही मेरे कमजोर कदम लड़खड़ा गए।” दरअसल ग्रेजुएशन के … Read more