क्या यही प्यार है ? (भाग  -3)  – संगीता अग्रवाल 

कुछ दिनों की कोशिश के बाद मीनाक्षी ने केशव की नौकरी अपने ऑफिस मे लगवा दी। केशव शुरु मे ये नौकरी करना नही चाहता था क्योकि उसे ऐसा लगता था एक ऑफिस मे नौकरी होने से कही दोनो मे दूरियां ना आ जाये या कही किसी मोड़ पर दोनो का अहम ना टकरा जाये।  तब … Read more

क्या यही प्यार है ? (भाग  -2)  – संगीता अग्रवाल

अब प्यार का इजहार तो हो गया पर कॉलेज का आखिरी दिन था तो रोज मिलना तो संभव था नही तो अब एक ही जरिया था जिससे उन दोनो का प्यार परवान चढ़ सकता था वो था फोन …तो फोन पर लम्बी लम्बी बाते होने लगी …। ” मीनू क्या हम मिल नही सकते ?” … Read more

क्या यही प्यार है ? (भाग  -1)  – संगीता अग्रवाल 

“ये अदालत एक घंटे तक के लिए मुल्तवी की जाती है ।” जज के इतना बोलते ही शांत अदालत मे चहल पहल शुरु हो गई। दोपहर के डेढ़ बजे थे लंच ब्रेक था। जज अपनी कुर्सी छोड़ जा चुके थे। कुछ लोग बाहर आ चाय पी रहे थे कुछ आस पास के स्टॉल से कुछ … Read more

सच्ची दोस्ती – चंद्रमणि चौबे

मैं और अमीषा एक साथ एक ही स्कूल में बचपन से ही पढ़ती थी हम लोगो में बहुत ही घनिष्ठता थी ग्रेजुएशन के बाद मैं मास्टर करने दिल्ली चली गई अमीषा भी भोपाल जाकर अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की एक दिन अचानक अमीषा का कॉल आया बहुत घबड़ाई सी लगी पूरी बात तक नही … Read more

चल रे विभूति वृद्धाश्रम – मीनाक्षी सिंह

समीरा जी और विभूति जी ने नाजों से पाला अपने बच्चें ललित को ! पर जब बुढ़ापे में बेटा ,बहू दिल को ढेस पहुंचाते तो वो दोनों लोग अपने पुराने मित्र रवि प्रकाश से थोड़ा दुख बांटने चले ज़ाते ! आज फिर वो रवि जी के पास आयें हैँ ! रवि प्रकाशजी  उन्हे सांत्वना देते … Read more

अधूरी चीख –  बालेश्वर गुप्ता

 एक शोर उठा,भगदड़ मची,काफी लोग उसी दिशा में दौड़ लिये,कुछ अपने स्थान पर ही खड़े खड़े, क्या हुआ जानने का प्रयास करने लगे।कुली ने बताया कि एक कुलीन शालीन सा व्यक्ति यही बैंच पर काफी देर से बैठा था।सफेद झक धोती,ऊपर से सफेद ही कमीज।बस जैसे ही ट्रेन आयी वो एकदम झटके से उठकर  चलती … Read more

बट्टा – कंचन श्रीवास्तव

चार पैसे क्या कमाने लगी, वक्त ही नहीं मिलता,पास बैठकर हाल चाल पूछने का ,कहते हुए राधा ने श्याम को चाय की प्याली पकड़ाई और बगल में ही बैठते हुए बोली,सुनो- बिटिया अब सयानी हो गई कुछ सोचा, अरे उसके हाथ पीले कर दो वरना उमर बढ़ती जा रही है, आखिर और सब भी तो … Read more

इज्जत – ममता गुप्ता

अरे !! यार शिल्पा ये तो आजकल फैशन है। ड्रिंक करना,स्मोकिंग करना,क्लब में ये सब तो चलता है ना। तू भी हमारे साथ रहकर ये सब सीख जाएगी। देख” तू अभी नई नई आई इसलिए तुझे यह सब थोड़ा अजीब लगता है,लेकिन गर तुझे इस शहर में रहना है तो थोड़ा बहुत तो खुद को  … Read more

इज्जत कमाओ – भगवती सक्सेना गौड़

रीना सर्विस से रिटायर हुई, आजकल बड़े शांत भाव से आराम फरमाती थी। कई दिनों से अपनी बड़ी दीदी सीता की बहुत याद आ रही थी। बेटे से कहा, सुनो अगर हो सके तो ट्रेन का ही रिजर्वेशन करा दो, दीदी की बहुत याद आ रही, व्यस्तता के कारण कुछ वर्षों से मिलना नही हुआ। … Read more

छुट्टियां  – नन्दिनी

छुट्टियां गर्मी की, ये शब्द हमेशा से ही बड़ा लुभावना रहा है हेना ….  छोटे थे तो परीक्षा के बाद मामा नानी घर जाने की खुशी अलग ही होती थी। बड़े होकर शादी हुई तो मायके जाने की खुशी तो शब्दों से परे है ,बचपन को फिर से जीवंत करने के दिन ,बेपरवाह बिना अलार्म … Read more

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