संकीर्ण मानसिकता-हेमलता गुप्ता: short stories in hindi

    कहने को तो आज महिलाओं और पुरुषों की समानता की कितनी ही बातें की जाती है! पर क्या पुरुषों की संकीर्ण मानसिकता औरतों के प्रति बदल पाई है! सदियों से पुरुष महिलाओं पर अपना एकाधिकार समझता आया है ,और वर्तमान समय में भी बह इससे पूरी तरह मुक्त नहीं हो पाया है ! कुछ अपबादो … Read more

बड़े बोल – डा. मधु आंधीवाल

हलो कौन बोल रही हैं । हलो हांं मैं राधिका बोल रही हूँ सौम्या पहचाना नहीं । दीदी आपका नं नहीं था बताइये आज कैसे याद कर लिया। कुछ जरूरी काम था मै तुम्हारे शहर आई हूँ । तुमसे मिलना बहुत जरूरी था ।            डा. सौम्या एक जानी मानी स्त्री रोग विशेषज्ञ थी । उनसे … Read more

पछतावा-शिव कुमारी शुक्ला: Short Story

कहते है कि रूप, योवन, पैसे एव॔ पद का कभी घमंड नहीं करना चाहिये क्योंकि ये चारों ही जीवन में क्षणिक साथी है। पता नही कब दगा दे जायें। किसी भी चीज पर गर्व करना सही है, किन्तु घमंड नहीं। यह इन्सान को ले डूब ता है । गर्व और घमंड के बीच सिर्फ एक … Read more

खोखले रिश्ते – डाॅ संजु झा

सामान्य परिवार की नीना की शादी बहुत  अमीर घराने में हुई। आम लड़कियों की तरह नीना का भी सपना था कि उसका पति खूबसूरत  और सुदर्शन व्यक्तित्व का हो,परन्तु साधारण कद-काठी और साँवले रंग के पति अनिल को पाकर उसके सपनों पर मानो तुषारापात हो गया। नीना के गोरे रंग काली घनी जुल्फें,छरहरी काया,बड़ी-बड़ी गहरी … Read more

दो पल का सुकुन – मीनाक्षी सिंह : Moral Stories in Hindi

मनु का सर सुबह से ही चकरा रहा था .. किसी काम में मन नहीं लग रहा था .. थोड़ा आराम करना चाहती थी मनु .. कमजोरी भी थी शरीर में.. अभी दो महीने पहले ही तो बिटिय़ां को जन्म दिया था उसने… हर औरत अच्छे से वाकिफ हैं बच्चा होने के बाद कुछ महीने … Read more

“हां शून्य है मेरे पापा” – ऋतु गुप्ता : Short Story in hindi

हां बस पापा, आप और मम्मी कल सुबह की ट्रेन से कॉलेज आ जाइएगा, आपकी और मम्मी की दोनों की टिकट मैंने करवा दी है, बस आपको अपने जरूरत का जरुरी सामान लेकर ही यहां आना है, बाकी किसी ज्यादा सामान की जरूरत नहीं है। देव ने अपने पापा आलोक से कहा तो आलोक ने … Read more

मेरे पापा – विभा गुप्ता : short stories in hindi

” एक बार कह दिया न आपको कि मेरा कन्यादान वो नहीं करेंगे।मेरे साथ आप अकेली ही बैठेंगी।” दुल्हन बनी रीमा चीखते हुए अपनी माँ मालती से बोली तो मालती ने पीछे मुड़कर अपने पति यशवंत को देखा जो दरवाजे के बाहर ही खड़े होकर बेटी के जवाब का इंतज़ार कर रहें थें। रीमा तब … Read more

हर पुरूष पिता नहीं  हो सकता – पूनम अरोड़ा

 कल पितृ दिवस था । पापा  को याद करते फिर आँखे भर आई उसकी।जब भी उनको याद करती एक टीस मन में  कसक के रह जाती ।एक ही आवाज  निकलती उसके मन से “पापा मुझे  माफ कर दो आपके  अंतिम समय में  आपके पास रहकर कुछ समय क्यों नहीं  बिता सकी । माना कि घर … Read more

क्या सच मे पुरुष कठोर होते है ? – संगीता अग्रवाल 

” मम्मी ये पायल कितनी सुंदर है ना !” आठ साल की टिया माँ की अलमारी से एक पायल निकाल बोली। ” ये पायल मुझे तेरी नानी ने दी थी और अगर तुझे पसंद है तो तू बड़ी होगी तो तुझे दे दूँगी..खुश अब !” टिया की माँ नैना हंस कर बोली। ” क्या बाते … Read more

मुझे माफ कर दो नीरा – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय

“फिर से एक और बेटी..!,पता नहीं क्या ग्रह लेकर यह मनहूस इस घर में आई है…कुलक्षिणी…!,एक तो खाली हाथ आई है…यहां पड़ी रहकर सिर्फ माल ही उड़ाती रही है.. अब बेटी पर बेटी…उंह…!” मुँह बिचका कर कैकई यानी नीरा की सास ने गुस्से में नीरा से कहा।  एक तो नवजात को जन्म देने के बाद … Read more

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