हृदयहीन – कमलेश राणा

मम्मी आज कैसी सब्जी बनाई है आपने कितना ज्यादा नमक भर दिया है न बनाने का मन हो तो बता दिया करो हम होटल से मंगा लेंगे।  हाँ हाँ मंगा लो खुशी से और हाँ मेरे लिए भी मंगा लेना यह नहीं दिखता तुम्हें कि कितनी गर्मी में सुबह से किचन में खड़ी हो कर … Read more

 मर्द को भी दर्द होता है – अमित रत्ता

मनोज की आंखों में सूजन थी रंग लाल हो चुका था ऐसा लग रहा था मानो की वो  रो कर हटा हो और चेहरा उतरा हुआ था । मैंने उससे पूछा मनोज क्या हुआ सब ठीक तो है न? कोई परेशानी है तो बताओ? मनोज के गले से आवाज नही निकल पा रही थी उसने … Read more

पुरूष होने का इतना अहं … – रश्मि प्रकाश 

“ क्या बात है बहू देख रही हूँ तुम कब से इधर से उधर चहलक़दमी किए जा रही हो… कोई परेशानी है क्या?” सुनंदा जी ने बहू राशि से पूछा  “ हाँ माँ… वो कमली को लेकर थोड़ी परेशान हूँ… कुछ दिनों से वो बहुत परेशान लग रही थी जो पूछा तो सुन कर मेरा … Read more

स्टेपलर – आरती झा आद्या : Moral stories in hindi

स्वाति बेटा देख ले एक बार मैंने सूटकेस और बैग में कौन सा समान कहाँ जमाया है.. हॉस्टल में दिक्कत नहीं होगी…सीमा ने अपनी बेटी स्वाति से कहा। स्वाति – देख लूँगी माँ.. इतनी हड़बड़ी क्या है.. अभी तो चार दिन है ना जाने में सीमा – अच्छा ठीक है.. लिस्ट ही दिखा.. देखूँ क्या … Read more

जागृत पुरुषत्व – बालेश्वर गुप्ता : Moral stories in hindi

  वैशाली मुझे लगता है मेरे हाथ ऊपर हवा में लहराते हुए से हैं और मैं अनंत गहराई में डूबता जा रहा हूँ।मैं क्या करू,वैशाली,मैं हार गया,मैं अपने से हार गया।      अभिषेक,क्यूँ हिम्मत हारते हो?एक रास्ता बंद होता है तो ईश्वर दूसरा रास्ता खोलता है, बस हमे उस रास्ते की खोज ही तो करनी है।मैं हूँ … Read more

अपने लिए : पूनम अरोड़ा : Moral in Hindi

आज सौम्या की जिन्दगी का यादगार दिन था , बरसों  से घुटते संजोए सपने को यथार्थ के धरातल की स्वर्णिम  आभा मिल रही थी ।कभी सोचा भी न था कि  खाली समय में  ऐसे ही मन के उद्गारों को कागज पर उकेरते उकेरते खेल खेल में  एक दिन पत्रिका में  प्रकाशित होने भेज दिया था … Read more

घमंड – उमा वर्मा : short hindi stories

आज मौली की बरसी है ।उसे गये एक साल बीत चुके हैं ।समय कितना जल्दी अपनी यात्रा पूरा करता है, यह उसकी जेठानी आभा को पता चल रहा है ।बरसी की तैयारी जोर शोर से चल रहा है ।परिवार के बहुत सारे लोग जुटे हुए हैं । मौली के पापा बहुत पहले गुजर गए थे … Read more

ऐसे पुरुष से पाला क्यों पड़ा..?- रोनिता कुंडु : Samajik kahani

बेटा..! अगले महीने तेरी बुआ के यहां जाना है… रुचि की शादी जो है…और हमें कुछ अच्छा भी देना पड़ेगा… एक सोने का..? रोहित:   सोने का..? मां..! कहने से पहले घर की हालत भी देख लीजिए… अभी अभी पापा के इलाज में इतने रुपए खर्च हो गए… उन सब के कर्ज शुरु ही हुए … Read more

 घमंड तो रावण का भी नहीं चला था – सुषमा यादव

एक छोटे शहर में किरायेदारों के लिए दो, दो कमरों का मोहल्ला बसाया हुआ था। मकान मालिक बहुत अमीर थे, उन्होंने  कालोनी का नाम अपनी पत्नी के नाम से रखा था।रमा सदन। रमा जी बहुत ही कठोर, और कड़क मिजाज वाली घमंडी महिला थीं। उन्हें अपने तीन बेटों और दो बेटियों पर बहुत घमंड था। … Read more

वरदान – डॉ संगीता अग्रवाल : Short Stories In hindi

“मां!मां!” क्षितिज बहुत देर से आवाज़ लगा रहा था रुचि को। “आई बेटा! पल्लू से हाथ पोंछती वो आई,क्यों तूफान सिर पर उठा रखा है?”वो हंसती हुई बोली। “कल सुबह आप पानी मत पीना”,वो उसे समझाते हुए बोला। “क्यों भला? कल मेरा निर्जला उपवास है?” “अरे नहीं मां!कल पापा का ब्लड सैंपल लेने आएगा जो … Read more

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