आखिर कब तक – नीलिमा सिंघल 

रात के 12 बज गए थे पर तनुजा की आँखों मे नींद नहीं थी वो बार बार फोन उठाती कुछ देखते फिर रख देती, नीलेश बहुत देर से तनुजा की हरकतों को देख रहा था पर जब रहा नहीं गया तो झुंझला कर बोला,” क्या, तनुजा, सारा दिन मोबाइल हाथ मे रहता है और अब … Read more

प्यार की जिद.. – दिव्या  शर्मा

“वृंदा….!!” “छनाक…।” एक आवाज हुई और उसकी हथेली लहुलुहान हो गई।दर्द की लहर नसों में दौड़ गई।वह यथार्थ में लौट आया।हाथ में पकड़ा शराब का गिलास उसकी ऊंगलियों के दबाव से चकनाचूर हो चुका था।बिल्कुल उसके दिल की तरह। वह भी तो रीस रहा था… रो रहा था…. वृंदा की फोटू को सीने से लगाए … Read more

सोच बहू की ” – सरोज माहेश्वरी

सुबह के 9 बजे चुके थे राधा अपने कमरे में अभी तक सो रही थी…नाश्ते की टेबल पर उसकी हमउम्र भावी शालिनी सभी का मनपसंद नाश्ता बनाकर सभी के आने का इंतजार कर रही थी….उसे दस बजे कॉलेज पढ़ाने भी जाना था….राधा की इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी घर बैठ कर नौकरी के … Read more

वाह पापा ,दोस्ती हो तो आप जैसी  – मीनाक्षी सिंह 

अनीता,घर की नई नवेली बहू ,जिसके ब्याह को अभी 8 माह ही हुए थे ,घूंघट किये ,घर के  बाहर गेट पर कूड़े वाली गाड़ी में कचरा फेंक रही थी कि तभी उसे एक बुजूर्ग आदमी मैली कुचैली धोती कुर्ता पहने हाथ में लाठी लिए ,आँखों पर चश्मा लगाये  ,अनीता के घर की तरफ टकटकी लगाये, … Read more

हक – नन्दिनी

मालती जी का भरा पूरा परिवार तीन बेटे तीन बहुएँ छोटे बेटे की शादी अभी दो महीने पहले ही हुई । पोता पोती से भरा पूरा परिवार भूली न समाती थीं मालती जी पूरे घर पर राज था ,सब काम उनके हिसाब से ही होता तीज त्यौहार पर क्या बनेगा , बहु मैके कब जाएगी … Read more

विदाई – अभिलाषा कक्कड़

वकील जयराम ने फ़ोन रखते ही अपनी ओर आँखें गड़ाये पुरे परिवार की ओर देखा । सब बड़ी आस लगाए उनकी ओर देख रहे थे । बेटी प्रीति कोने में चुपचाप बिना कोई उत्सुकता दिखाये आराम से बैठी अपना टी वी देख रही थी । जैसे वो जानती थी कि जवाब क्या है ।माँ यशोदा … Read more

 ‘ सच्चा सुख ‘ –   विभा गुप्ता

 आज पूरा घर रंग – बिरंगी रोशनी से जगमगा रहा था।ममता दुल्हन बनी अपने होने वाले पति के सपनों में खोई बारात के आने का इंतज़ार कर रही थी।बचपन से वह राजकुमार-सा पति ,बड़ी गाड़ी , नौकर- चाकर और सुख -सुविधाओं से भरे घर का सपना देखती आई थी जो आज पूरा होने जा रहा … Read more

“पोते की चाहत में पोतियों के साथ भेदभाव क्यों???” – अमिता कुचया

वो मासूम सी लड़की क्या जानती थी कि उसे दुआ नहीं बल्कि कोसा जा रहा है। वह निधि अपनी मां की तीसरी संतान थी। पहली और दूसरी लड़की होने के बाद भी घर में तीसरी लड़की के रूप में  निधि के होने से घर निराशा ही बनी रही। जबकि दादी को तो पोते की चाहत … Read more

भेदभाव की हद। – रश्मि सिंह

सीमा-मेय आई कम इन सर। सुनील (सीमा के बॉस)-कम इन सीमा। सीमा-गुड मॉर्निंग सर। देयर आर सम फ़ाइल्स फॉर योर प्रायर अप्रूवल, सो काइंडली साइन दीज़ फ़ाइल्स। सुनील (सीमा के बॉस)-ओह हाँ, दीज़ आर सो इंपोर्टेंट, इन्हें आगे तुरंत फाइनल अप्रूवल के लिये भेजो। सीमा-सर पर अंकित भैया (प्यून) तो आए नहीं है, तो डायरेक्टर … Read more

थैंक्यू मेरी बिटिया रानी – आरती झा आद्या

सुनो ना मैं सोच रहा था अब तुम किसी स्कूल में शिक्षिका बन जाओ … बीएड करने के बाद से तुम्हारी डिग्री धूल ही खा रही है। धूल झाड़ते झाड़ते ऊब गई होगी तुम भी… बड़े प्यार से कृपा के पति श्याम ने सुबह की सैर करते हुए कहा। और घर बच्चे कौन देखेगा… कृपा … Read more

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