प्यार…धोखा और…. मर्डर – संगीता अग्रवाल

मै बालिग़ हूँ अपने फैसले कर सकती हूँ आप लोगो को कोई हक नही मुझपर अपने फैसले थोपने का !” सरला जी के कानो मे अभी तक बेटी रिया के ये अंतिम शब्द गूँज रहे थे जो उसने चार दिन पहले घर छोड़ने से पहले कहे थे । कितना समझाया था उनके पति और रिया … Read more

गृहणी –  रंजना वर्मा उन्मुक्त

गौरी अपने पति से बड़ी नाराज थी। क्यों वह उसे शहर ले आया? वह अपना गाँव छोड़कर नहीं आना चाहती थी ।गाँव के साथ उसकी बहुत सारी यादें जुड़ी हुई थी। वहीं उसका जन्म हुआ और वहीं वह पली-बढ़ी ।वहीं उसके माता-पिता ,भाई-बहन और ससुराल में सास- ससुर रहते थे। इसके अलावा उसका पति हर … Read more

“सास हो तो ऐसी” –  कविता भड़ाना

घर का माहौल आज बड़ा बोझिल सा हो रहा था  कांता जी कई दिनों से ये बदलाव महसूस तो कर रही थी की दोनों बहुएं आपस में ना तो बात कर रही है और ना ही पहले की तरह घर के कामों में खुशी खुशी सहयोग ही कर रही है,पर उन्हें समझ नही आ रहा … Read more

तुलसी वाले बाबा – गीता वाधवानी 

दुर्गा देवी ने अपने बेटे सुशील को अपने पास बुलाया और कहा-“सुशील, पास वाले गांव में तुलसी वाले बाबा जी आए हुए हैं। राहुल की दादी बता रही थी कि लोग उनके पास संतान प्राप्ति के लिए और विशेषकर पुत्र संतान के लिए आशीर्वाद लेने जाते हैं। बाबा जी जिन लोगों को प्रसाद के रूप … Read more

स्नेह का जुड़ाव – लतिका श्रीवास्तव

आज ऑफिस में काम ही इतना ज्यादा था कि श्रुति थक के चूर हो गई थी ऐसा मन हो रहा था घर पहुंचते ही कोई इलायची वाली गरम गरम चाय बना कर दे दे फिर थोड़ी देर कमर सीधी कर लूं…..घर में घुसते ही ड्राइंग रूम से बातें करने हंसने की आवाजे सुनाई पड़ी श्रुति … Read more

सहारा –  संगीता त्रिपाठी

 “मम्मा.. टीचर ने भेदभाव पर निबंध लिखने को कहा है, आप थोड़ा मदद करोगी “कक्षा पांच में पढ़ने वाला मेहुल ने अपनी माँ मीना से पूछा..।     “हाँ क्यों नहीं, तुम लिखना शुरु करो, मै तुम्हे मदद कर दूंगी “मीना ने बेटे को दिलासा दिया।       “मम्मा, पहले भेदभाव तो स्पष्ट करो ..”मेहुल ने कहा।      “भेदभाव करना … Read more

मायके की महक – पूनम अरोड़ा 

शादी के बाद जब भी मायके जाती मम्मी, पापा, भाई सभी लोग स्टेशन पे लेने आते, हुड़क के गले लगते। घर पर मेरे मनपसन्द व्यंजन बने होते, सब चाव से खातिरदारी में जुटे रहते। शाम को चाय के समय कभी पापा बाजा़र से खस्ता, कभी समोसे ले आते तो कभी मम्मी पकौडे़ तल लेती। रात … Read more

साथी हाथ बढ़ाना – नीरजा नामदेव

 सुमित और तन्मय मौसेरे भाई थे। दोनों अलग-अलग शहर में रहते थे। उनकी उम्र में 5 साल का अंतर था। वे छुट्टियों में हमेशा एक दूसरे से मिलते रहते थे। दोनों में बहुत स्नेह था। सुमित बी.टेक .कर रहा था। तन्मय11वीं कक्षा में पहुंच गया था ।उसने गणित विषय लिया था।बाकी विषय तो उसे समझ … Read more

मैं और मेरी दुनिया – के कामेश्वरी

मैं विजया हूँ । मेरी एक खूबसूरत छोटी सी दुनिया है । मेरे माता-पिता की तीन बेटों के बीच मैं अकेली लाड़ली बेटी हूँ । मुझे माता-पिता ने मास्टर्स कराया मैंने फ़िज़िक्स में मास्टर्स किया । मैं बहुत ही होशियार थी । अपने माता-पिता का नाम रोशन किया वे गर्व से लोगों को बताते थे … Read more

हमसफर – गरिमा जैन 

हर किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता कही जमीं कही आसमां नहीं मिलता  आरती का हमसफर उसे विवाह के पहले ही वर्ष छोड़कर चला गया । लेकिन अब आरती अकेली नहीं थी उसके साथ छोटा सा रोहन भी था। इतनी लंबी जिंदगी कैसे कटेगी?  पंडित कहते आरती के जीवन में पति का सुख नहीं लिखा … Read more

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