चौथा बेटा – रंजू अग्रवाल ‘राजेश्वरी’

बहु शब्द कानों में पड़ते ही साड़ी में लिपटी ,सोलह श्रृंगार से सजी ,संकोची ,शर्मीली ,सुसंस्कृत  महिला की छवि मानसपटल पर उभरती है ।और कहीं इस पूर्व अंकित छवि में थोड़ा भी विरोधाभास नज़र आया तो समाज और परिवार उसे अलग ही अलंकारों से सुशोभित कर देता है ।हालांकि आज इस धारणा में कुछ बदलाव … Read more

बड़े घर वाली बहू – अमित किशोर

शालू की शादी मोहित से हुई तो मानो राजेश बाबू ने चैन की सांस ली। शालू का हाथ मोहित के हाथों में थमाते हुए आंखों की चमक बता रही थी जैसे इस जीवन में ही उन्हें मोक्ष मिल गया हो। भले ही आंखों से राजेश बाबू और जया जी के झर झर आंसू बह रहे … Read more

परफेक्ट बहु – प्रीति वर्मा 

गौरी की भाभी (नित्या) बड़ी मेहनती है, बहुत अच्छी बहु मिल गई सुनीता (गौरी की मां) को, सारा घर आते ही संभाल लिया.सुबह चार ही बजे जगती है और शाम तक लगी रहती है फिर भी जरा सी भी शिकन नहीं लाती चेहरे पर!परफेक्ट बहु है नित्या। सासू मां जबसे बड़ी वाली जेठानी जी (गौरी)के … Read more

पतोहू (बहू ) हो तो ऐसी – रश्मि सिंह

सुदीप-हमने सुना है पुराने जमाने में तो बहू के आने पर बुआ, मौसी, चाची सब कई तरह की परीक्षाएँ लेते थे, आपके यहाँ भी बड़ा पुराना तौर तरीक़ा और इतना बड़ा परिवार है, हमारी चाँदनी (सुदीप की भांजी) बहुत सीधी है वो ये सब चालाकियाँ नहीं समझ पायेंगी, तो ध्यान रखिएगा। सरला (चाँदनी की सास)-आप … Read more

मम्मी जी,दूसरों की बहू तो सबको अच्छी लगती है – गीतू महाजन

निलिमा जी के बेटे प्रशांत की शादी को लगभग एक महीना हो चला था।नीलिमा जी बहुत सोच समझकर अपने लिए बहू चुन कर लाई थी।उनके अनुसार बहू ऐसी होनी चाहिए थी जो कि कामकाजी भी हो और बड़ों का लिहाज करना भी जानती हो और घर में रच बस भी जाए पर निलिमा जी की … Read more

विश्वासघात – के कामेश्वरी 

नारायण के ऑफिस से आते ही जानकी ने कहा कि सुनिए आज अजय के लिए एक रिश्ता आया है । मेरी बात तो वह नहीं सुनेगा आप ही उसे समझाइए।   नारायण ने कहा कि— जानकी तुम्हें मालूम है न कि अजय सिर्फ़ बी कॉम पास है और एक छोटी सी कंपनी में नौकरी करता है … Read more

औरत को इतना भी नसीब नहीं होता – मीनाक्षी सिंह

सुरभी ,शाम को तैयार हो जाना और बच्चों को भी कर देना…घूमने चलेंगे …कई दिन हो गए ,तुम लोगों को कहीं घुमाया नहीं हैँ…खाना भी बाहर ही खायेंगे ,,कुछ बनाना मत …पतिदेव के मुंह से ये शब्द सुन सुरभी ख़ुशी से झूम उठी…. विक्रम मैं क्या पहनूँ ,वेस्ट्रन य़ा साड़ी …कुछ भी पहन लो यार … Read more

संस्कार – सुधा शर्मा 

रास्ते भर सोचते हुये आ रही थी सुशीला जी ‘ पता नहीं इस लड़की ने क्या गजब किया जो माला जी ने कह दिया कि निशा की बहुत शिकायतें इकट्ठी हो गई है जब भी समय और सुविधा हो तो आने का प्रयास कीजियेगा।    शहर में ही शादी की थी उन्होंने बेटी की ।वैसे तो … Read more

खुशी की किरण –   रीता खरे

 “आज फिर पूनम की रात, वही पूर्ण चांद, जिसने अपनी चांदनी से सारा जहां  दुधिया  रंग में रंग दिया है, कितनी सुन्दर लगती है, फिर .. फिर क्यों? इस इतनी उज्जवल रात ने मेरे मन को इतना मलिन कर दिया, क्यों यह पूनम की रात मेरे जिंदगी में अपने हिस्से की थोड़ी सी किरणें नहीं … Read more

 रूबरू – पुष्पा कुमारी “पुष्प”

“रात काफी हो गई है अतुल!. जाओ सो जाओ।” धीरे से बिस्तर पर करवट लेते हुए उसने अभी-अभी फिर से अपने कमरे के भीतर आते बेटे की ओर देखा… “नहीं!.नींद नहीं आ रही है।” अतुल ने पिता की बात को नजरअंदाज कर दिया। आज अचानक फिर से तबीयत नासाज हो जाने की वजह से बिस्तर … Read more

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