खुशियाँ लौट आईं – ज्योति अप्रतिम

वर्मा जी का बहुत बड़ा परिवार है।बड़े  बूढ़ों से ले कर  छोटे बच्चे भी घर में हैं।कह सकते हैं कि एक भरा पूरा सम्पन्न परिवार जहाँ सरस्वती और लक्ष्मी दोनों की कृपा बरसती है।  सभी लड़के, बहुएं ,पोते ,पोती पढ़े लिखे हैं और अच्छी नौकरी और व्यवसाय में हैं।घर के बड़े बहुत दयालु हैं। नियमित … Read more

वह जली हुई रोटी – पूजा मनोज अग्रवाल

स्निग्धा,,,!!  मानवी ! ! ,अरे !!  कहां रह गई तुम दोनों ,,?  शांति जी ने अपनी दोनों बहुओं को रौबीले स्वर में आवाज़ लगाई ,,।  खाना टेबल पर लग गया है देरी मत करो,,, खाना ठंडा हो जाएगा,,। जी ,,,  मां जी ,,,आई ।। दोनों देवरानी – जेठानी ने एक ही स्वर मे बोलीं,,। घर … Read more

दिव्यात्मा – कमलेश राणा

उससे मेरी मुलाकात हॉस्पिटल की लिफ्ट में हुई जहाँ मैं अपने एक रिश्तेदार से मिलने गई थी। उसने हॉस्पिटल स्टाफ की ड्रेस पहनी हुई थी मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ कि इतनी छोटी सी बच्ची यहाँ काम करती है, मन में उठते हुए भावों ने आखिर शब्दों का रूप इख़्तियार कर ही लिया … इतनी छोटी … Read more

बहू का रंग – डॉ उर्मिला शर्मा

“क्या बात करती है सुलेखा!…आज के जमाने में रंग को लेकर ऐसा व्यवहार? यकीन नहीं होता।” – निकिता की भौंहें तनी हुई थीं। आगे भी उसने कहा -“शक तो मुझे तभी हुआ था जब तेरे एंगेजमेंट में तेरे ससुराल वाले सब के सब ब्रांडेड व लक्जरी आइटम से लदे- फदे थे और तेरे लिए जो … Read more

अनछुआ पल – डॉ पुष्पा सक्सेना

फूल लगा रही हो? तुम्हारी उम्र अब क्या फूल लगाने की है?सिर के निकट पहुंचा हाथ वहीं थम गया। दृष्टि पति के मुख पर स्थिर हो गई। अधखुले होंठों से एक प्रश्न बाहर आने को बेचैन हो उठा-जब उम्र थी तो क्या तुमने कभी लगाया था? लगाना तो दूर, कभी कहा भी था? सुना है … Read more

अनकहा एहसास – स्नेह ज्योति

चौधरी फतेह सिंह के आँगन में दस वर्ष बाद बच्चे की किलकारी गूंजी बच्चे की चाह में मत पूछो क्या-क्या किया?किस-किस कि चौखट पे गए ??और आज उन्हें उनके सब्र का फल एक बेटे के रूप में मिल ही गया। चौधरी साहब और उनकी पत्नी ने गाँव में एक बड़ा आयोजन किया ।जिसमे सबको बुलाया … Read more

उस पर सिर्फ बहू का टेग नहीं लगा है  – पुष्पा जोशी

‘बेटा सुधा रसोई में जाकर भाभी के काम में मदद कर, वह अकेली है, मुझसे आज कुछ करते नहीं बन रहा है’.मीना जी ने कराहते हुए कहा.कल बाथरूम में उनका पैर फिसल गया था और कमर में बहुत दर्द था.सुधा बोली- ‘तो आपसे किसने कहा काम करने के लिए, भाभी है ना वो सब कर … Read more

विदेशी बहू – गीता वाधवानी

आज पूरे 4 साल बाद गुरमीत अमेरिका से वापस आ रहा था। उसकी मां और बाऊजी बेहद खुश थे और उससे मिलने के लिए बहुत सारे रिश्तेदारों को आमंत्रण दे रखा था। घर मेहमानों से भरा हुआ था।  जैसे ही टैक्सी घर के सामने रुकी, गुरमीत की मां दौड़ती हुई और खुशी से रोते हुए … Read more

अच्छी बहू – नंदिनी

मानसी अल्हड़ सी बिंदास जिंदगी जीने वाली, किसी की उसे ज्यादा कोई परवाह रहती  नहीं थी ,एक जुडवा भाई रमन था ,बराबरी के थे पर चलाती अपनी ही थी उस पर भी । पढ़ाई पूरी हुई और जॉब भी लग गई अपने व्यस्त दिनचर्या में घर के कामों में भी कोई रुचि नहीं थी । … Read more

अनाम रिश्ता – डॉ पुष्पा सक्सेना 

“ये पोटली बांध कर कहां चलीं, माँजी?”जस्सी के घर से बाहर जाने के उपक्रम पर निम्मो बहू ने आवाज़ लगाई। “आज सरसों का साग पकाया था, भाई जी को बहुत अच्छा लगता है। थोड़ा सा साग और चार मकई की रोटी ले जा रही हूं।“जस्सी ने धीमी आवाज़ में कहा। “बहुत सेवा कर ली भाई … Read more

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