मन से मन मिले तो दीप जल उठे – लतिका श्रीवास्तव 

…थोड़े दिनों बाद ही दिवाली है…..सुमेर अत्यधिक उत्फुल्लित और उत्साहित था …इस बार आराम से अपनी पत्नी और बच्चों के साथ स्वतंत्रता पूर्वक दिवाली मनाऊंगा….पिछली दिवाली पर मां पिताजी थे….हर बात पर टोका टाकी….ये ऐसा करना था ..वो वैसा करना चाहिए था….!! उसकी तो बहस हो गई थी  पिता जी से….. साफ कह दिया था … Read more

रिश्तों का नया दौर – रश्मि सिंह : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : सचिन-माँ मैंने रागिनी (सचिन की बहन) का कार्ड आपको ह्वाट्सऐप कर दिया है, आप अपने सारे ग्रुप और दोस्तों को भेज देना।  संतोषी (सचिन की माँ)-मेरा कोई ग्रुप नहीं है, घर जाकर कार्ड देकर आयूँगी, और पहला कार्ड तो  मामा को देना था, उसके बाद ही दूसरों को कार्ड बाटना … Read more

अरमान ज़िंदगी के- बेला पुनिवाला  : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : सुबह से ये सोचकर मैं कितनी खुश हूँ कि आज मेरी शादी की पाँचवीं  सालगिरह है, सब लोग मुझे शादी की सालगिरह की बधाइयाँ दे रहे हैं मेरे वॉट्स अप, फेसबुक, इंस्टा पर भी सभी दोस्त और रिश्तेदारों के मैसेज आ रहे हैं बस मैं इसी मैसेज और लोगों की … Read more

मतलबी रिश्तों की कहानी- पूजा गीत : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : हाँ। जानकी नाम था उसका। १२ साल की अबोध बालिका, पर बचपना कहीं नहीं था। बस जब कभी मुझसे गोल गप्पे खाने की जिद्द करती तो बच्ची लगती थी। मैंने अपनी पहली नौकरी एक एनजीओ से शुरू की। एमएससी का प्रोजेक्ट लगभग खत्म होने को था इसलिए नौकरी करने की … Read more

दहेज-एक लालच – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : ‘ वान्या एक उच्च  मध्यम परिवार में पली बढ़ी चुलबुली लड़की थी। पिता का एक छोटा सा बिजनेस था। सान्या उसकी छोटी बहन थी । यह दोनों ही माॅ पिता की दो आँखे थी। ऐसा लगता था कि जैसे वो दोनों बेटियों  को ही देख कर जी रहे थे। दोनों … Read more

हरी कांजीवरम – अमरपाल सिंह ‘आयुष्कर’ : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : ‘ लो पहन लो बहू !’ सासू माँ की सीलन भरी आवाज़ सुन मुड़ी, तो देखा !  वह अपने हाथों में बेरंग जीवन लिए खड़ी थीं | कैसे बताऊँ कि जीवन में रंग तो अब आया है , पर वो तो माँ थीं !             निकेत अब इस दुनिया में नहीं … Read more

न्याय – उमा वर्मा : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : अनमनी सी मै घर के काम निपटा ही रही थी कि बेल बजी।काम वाली बसंती कयी दिन से नहीं आ रही थी तो मन बहुत खिन्न था।इनको जितना सुविधा दो यह अपने तरीके से बाज नहीं आने वाली।यही सोचती द्वार खोला तो बसंती हांफती हुई खड़ी थी ।पुरे दस दिन … Read more

एक बार फिर (भाग 23) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

पिछले भाग में प्रिया और शेखर आपस में बातचीत करते हैं। शेखर उसे कहता है कि उसे उस पर भरोसा है। प्रिया डाइनिंग टेबल पर वापस जाने की बात करती है। यह सुनकर शेखर नाराज हो जाता है अब आगे- ‌प्रिया इंवनिग में डिजाइनर के पास जा रहे हैं। तुम तैयार रहना। शेखर की मम्मी … Read more

एक बार फिर (भाग 22) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

प्रिया का अतीत जान कर जब शेखर उससे कोई बात नहीं करता तो प्रिया बहुत दुःखी होती है। वो उससे खुद बातचीत करने का फैसला करती है अगले दिन सुबह वह उसके रूम में जाती है। वह बाथरूम से नहाकर बाहर आता है। अब आगे- मुझे भी तुमसे बात करनी है। आपको???? हां, जाओ डोर … Read more

एक बार फिर (भाग 21) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

शेखर के घर में प्रिया और शेखर दोनों के लिए पूजा रखी जाती है। पूजा के बाद प्रिया शेखर को अपने अतीत के बारे में बताती है। शेखर को डीजीपी का फोन आता है कि हमलावर पकड़ा गया। आपको आना होगा। शेखर चला जाता है। शेखर के जाने के बाद प्रिया बहुत परेशान हो जाती … Read more

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