मुसीबतो को नेवता – रोनिता कुंडु : Moral Stories in Hindi

मम्मी जी, कल मैं अपने मायके जा रही हूं, वह क्या है ना..? मेरी भाभी, भैया के साथ शॉपिंग पर जाने वाली है, तो मेरी मां ने कहा उनके साथ जाकर मैं भी अपने राखी का तोहफा खरीद लूं, अपनी पसंद का… श्रद्धा ने अपनी सास जया जी से कहा  जया जी:  पर तुम्हारे भैया … Read more

दिव्या(भाग–9) – आरती झा आद्या : Moral stories in hindi

“माँ मुझे लेकर बाहर आ गई। मैंने माँ से पूछा है वो लोग ऐसे क्यूँ बोल रही थीं।” प्रियम्वदा खुद की रक्षंदा से होने वाली वार्तालाप को बता रही थी। “उनकी और हमारी स्थिति एक ही है। उन सब की स्थिति भी गुलामों जैसी ही है और हमारी भी.. इस स्थिति से निकलने के लिए … Read more

दिव्या(भाग–8) – आरती झा आद्या : Moral stories in hindi

“राघव क्या तुम पूर्वजन्म या पुनर्जन्म में मानते हो?” आनंद पूछता है। “हाँ आनंद.. हम लोग सिर्फ विज्ञान नहीं अध्यात्म को भी साथ लेकर चलते हैं। थोड़ा सा आध्यात्मिक होकर सोचें तो संबंधों का विज्ञान, मनोविज्ञान और सामाजिक ज्ञान स्वयं ही अनुभवित हो सकता है। अध्यात्म और विज्ञान एक दूसरे के बहुत हद्द तक पूरक … Read more

अपना घर – पूनम अरोड़ा 

स्कूल की घंटी बजते ही जहाँ सब बच्चे घर जाने की जल्दी में एक दूसरे से पहले भागने की दौड़ में धक्का मुक्की कर रहे थे वहीं  शाश्वत धीरे धीरे बिना किसी उत्साह  के स्कूल के मेन गेट की तरफ बढ़ रहा था। ऐसा लग रहा था मानो उसे घर जाने की कोई  जल्दी ही … Read more

मां से बढ़कर एक माँ (भाग 2)- मुकेश पटेल : Short Moral Stories in Hindi

Short Moral Stories in Hindi : कुछ महीनो बाद मौसी की शादी तय हो गई।  लड़के वाले मौसी को देखने आने वाले थे। जब सब लोग आ गए तो  मौसी सबके लिए चाय लेकर आई। सब लोगो ने  मौसी को पसंद कर लिया।  मेरे नाना जी और मौसी के होने वाले ससुर बात कर रहे … Read more

मां से बढ़कर एक माँ (भाग 1)- मुकेश पटेल : Short Moral Stories in Hindi

Short Moral Stories in Hindi : सुबह-सुबह किचन में चाय बना रही थी तभी मेरे पति ने आवाज दी, “रमा देखो तुम्हारे माँ का फोन आ रहा है।”  मैंने आश्चर्य से कहा, “माँ का फोन इतनी सुबह सुबह जरूर कोई बात होगी, मन में एक डर सा हो गया क्योंकि पापा कई दिनों से बीमार … Read more

दूसरी पारी का वह पहला दिन – नरेश वर्मा 

सोचा था कि आज देर से सोकर उठूँगा क्योंकि यह एक बंधन मुक्त सुबह होगी ।किंतु शरीर जो इतने वर्षों से चली आ रही दिनचर्या का अभ्यस्त रहा था उसने नियत समय सुबह के साढ़े पाँच बजे आँखें खोल दीं।अब शरीर का भी क्या दोष ,उस बेचारे को तो नहीं पता था कि इस सुबह … Read more

दूसरी पारी का वह पहला दिन (भाग 1) – नरेश वर्मा 

सोचा था कि आज देर से सोकर उठूँगा क्योंकि यह एक बंधन मुक्त सुबह होगी ।किंतु शरीर जो इतने वर्षों से चली आ रही दिनचर्या का अभ्यस्त रहा था उसने नियत समय सुबह के साढ़े पाँच बजे आँखें खोल दीं।अब शरीर का भी क्या दोष ,उस बेचारे को तो नहीं पता था कि इस सुबह … Read more

मुसीबत – वीणा सिंह : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : पांचवी कक्षा में संजय का नामांकन हुआ. सारे बच्चों से अलग गुमसुम सा रहता! उसी स्कूल में दो साल पहले तीसरी कक्षा में एडमिशन लिया था कविता ने! ये उम्र होती है जिसमे लड़कियां और लड़के मस्त बेफिक्र और खूब बातूनी होते हैं. लड़कियां भी खूब शरारती नटखट और शोख … Read more

आपकी पूर्णिमा – रचना कंडवाल: Moral Stories in Hindi

 पल्लवी और अमित की चार साल पुरानी शादी का अंत हो चुका था। पल्लवी ने उसे कभी दुःख के अलावा कुछ नहीं दिया था।मेजर अमित शर्मा की शादी शहर के सबसे बड़े वकील देवेन्द्र कुमार जी की बेटी से बहुत धूमधाम से हुई थी। दोनों के माता-पिता की अच्छी खासी दोस्ती थी। पल्लवी जब शादी … Read more

error: Content is protected !!