जीवन भर के जख्मों पर भगवान ने एक साथ मरहम लगा दिया – शालिनी श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

जब मैं पहली बार दफ्तर में सुधा से मिला, तो वह बहुत साधारण सी साड़ी पहने हुए थी और जैसे जीवन की मुश्किलों से जूझती हुई इस बात का सबूत देना चाहती हो कि वह अपने बलबूते पर एक अच्छा जीवन जी सकती है…. मैं उसी दफ्तर में एकाउंट्स देखने का काम करता था…. मेरी … Read more

सपना मैम – सुनीता मुखर्जी “श्रुति” : Moral Stories in Hindi

उठो बेटा! जल्दी उठो! सुबह के साढ़े चार बज गए हैं। सपना दोनों बच्चों को सुबह-सुबह जगा रही थी…. यह सपना के दिन की शुरुआत का पहला महत्वपूर्ण पड़ाव होता था। सुबह बच्चों को उठाकर पढ़ने बैठाना बहुत ही टेढ़ी खीर होती, क्योंकि बच्चे तो बच्चे ही हैं!! जल्दी उठना ही नहीं चाहते। लेकिन मम्मी … Read more

ढ़लती साँझ – डॉ आभा माहेश्वरी : Moral Stories in Hindi

सुबह होती है शाम होती है जिंदगी बस यूँही तमाम होती है– जिंदगी का सफर चलता जाता है अनवरत रुकता नही।जैसे भोर हुयी फिर दोपहर हुयी और फिर साँझ गहराने लगी– मन में अपने अपने भाव के अनुरूप समाहित होने लगी।      सुखिया और उसके पति एक गाँव में रहते थे।वही खेतीबाड़ी थी– बहुत जमीन थी … Read more

मैं अपने अहंकार में रिश्तो को महत्व देना भूल गई – विधि जैन : Moral Stories in Hindi

छोटी चल खेलने का टाइम खत्म हो गया शाम हो गई है.. घर चल पापा आते ही होंगे.. तुझे बहुत डांट पड़ेगी नहीं मैं अभी और खेलूंगी.. मुझे खेलने में बहुत मजा आता है ..मानव किरण और शांतनु तीनों भाई बहन बड़े ही लाड-प्यार से रहते थे किरण सबसे छोटी दोनों भाइयों में और सब … Read more

*ढलती सॉंझ से मिला तोहफा* – पुष्पा जोशी : Moral Stories in Hindi

     सॉंझ ढल रही थी। सूर्य धीरे-धीरे अस्त हो रहा था। अविनाश की नजर दूर क्षितिज पर टिकी थी ,जहाँ अस्त होते हुए सूर्य की लालिमा फैली हुई थी। वहाँ देखकर ऐसा लग रहा था जैसे जमीन और आसमान दोनों मिल रहे हैं। वह सोच रहा था, यह‌ एक आभास ही सही, जो कुछ देर रहता … Read more

ढलती सांझ – नीलम शर्मा : Moral Stories in Hindi

रिया मेरा टिफिन तैयार हो तो जल्दी दो मुझे ऑफिस के लिए देर हो रही है। रिया…क्या आज भी आप पापा से मिले बिना ही ऑफिस चले जाओगे। वह आपके पापा हैं, अगर उन्होंने आपको कुछ कह भी दिया तो क्या हुआ। लेकिन रवि रिया की बात का कुछ भी जवाब दिए बिना चुपचाप घर … Read more

ढलती सांझ – शशि शर्मा : Moral Stories in Hindi

हरिद्वार – मायके, गर्मियों की छुट्टियाँ बिताने गुड़िया को लेकर आयी थी। खाना खाने के बाद गुड़िया को सुलाकर छत पर चली गयी। अँधेरा हो चुका था, छत पर टहल रही थी कि अचानक आवाज़ सुनाई दी – गुड्डू बेटे नीचे आ जा। नहीं नानी मैं नीचे नहीं आऊँगा, आप रोज़ कहती हो मम्मा आ … Read more

न्याय – संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

आज कैसी सब्जी बनी है सर्वथा…?  मुंह बनाते हुए समीर ने कहा ….. होठ बिचका कर बिटिया अनन्या ने भी समर्थन किया ….!      देखो समीर , ….अब तो देश-विदेश सभी जगहो पर कार्य की गुणवत्ता के मद्देनजर , कार्य की अवधि कम करने की सोच रहे है….।       बस एक हम गृहणी के कार्यों के बारे … Read more

सबक ( अपने लिए खुद लड़ना पड़ता है ) – डॉ कंचन शुक्ला : Moral Stories in Hindi

काव्या जल्दी जल्दी रसोई का काम निपटाने में लगी हुई थी आज उसे अपनी सहेली के घर उसके गृहप्रवेश के कार्यक्रम में जाना था  काव्या ने रसोई का काम खत्म किया अपने माथे का पसीना  पोंछते हुए गहरी सांस ली वो थक गई थी आज रसोई में काम भी ज्यादा था उसका कहीं जाने का … Read more

ओपन जेल – सीमा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

सात-आठ साल पहले का किस्सा है जब समिधा अपने कॉलेज के अंतिम वर्ष में थी। NCC कैडेट के तौर पर उसे पर्वतारोहण प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने का अवसर मिला। शिविर का आयोजन केरल राज्य के तिरूवनंतपुरम जिले के अंतर्गत आने वाले नेय्यार डैम क्षेत्र में किया गया था। प्रशिक्षण कार्यक्रम में एक दिन शैक्षिक … Read more

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