ढ़लती साॅंझ – डाॅ संजु झा : Moral Stories in Hindi

कमला जी की जिंदगी ढ़लती साॅंझ  बन गई है,जहाॅं से रात ही शुरू होनेवाली है।अपने बड़े से घर में एकाकी जीवन जीते हुए उनके मन में तरह-तरह के ख्याल आते रहते हैं। व्यक्ति की जिंदगी में बालपन सुबह की प्यारी धूप की तरह होती है,जहाॅं सब कुछ सुनहरी आभा से लिपटा हुआ महसूस होता है। … Read more

जीवन यात्रा… – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

सबके चेहरों पर खुशी झलक रही थी… केवल एक को छोड़कर… वे खुश नहीं थे…  रामनरेश जी लाख मन को मनाने की कोशिश कर रहे थे कि सबकी खुशी के लिए खुश हो लूं… लेकिन नहीं हो पा रहे थे…  बेटी… दामाद… दोनों बेटे बहु… सब के बच्चे… पत्नी प्रभा… सभी तो थे… सभी खुश … Read more

नज़रिया – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

छवि जब से बड़ी बहन अरुणा की बेटी संजना की शादी से लौटी है,कुछ अन्यमनस्क दिख रही थी, कभी दर्पण के सामने अपने केश देखती तो कभी माथे की लकीरें…, उसको इस तरह देख विशाल जी से रहा ना गया पूछ बैठे,   “क्या बात है छवि… जब से संजना की शादी से लौटी हो, कुछ … Read more

घर की इज्जत – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

अरे साक्षी ये क्या हैं मैक्सी पहनकर आंटी के सामने आ गई घर की इज्जत का कुछ ख्याल है कि नहीं।अरे साक्षी छत पर क्यों उघाड़े सिर घूम रही हो इस पड़ोस के लोग देखेंगे तो क्या कहेंगे घर की कुछ इज्जत है कि नहीं।अरे साक्षी बाहर दूध लेने के लिए ऐसे ही खड़ी हो … Read more

सिंदूर – एम पी सिंह : Moral Stories in Hindi

पढ़ लिख कर कनिका ने नोकरी शुरू की ओर साथ ही शुरू हुई सपनो की उड़ान। छोटे शहर से आई और कारपोरेट में जॉब, जेब में ढेर सारे पैसे, अकेले रहना, पूरी मर्जी की मालिक, कोई रोकटोक नही, बस एकदम आजाद पंछी, पर हर काम एक सीमित दायरे में। उसकी खूबसूरत मुस्कान ओर सूंदर कद … Read more

ढलती साँझ – गीता यादवेन्दु : Moral Stories in Hindi

“साँझ को तो ढलना ही होता है तो उसके लिए रोना क्या,घबराना क्या ! हम भी तो ढलती साँझ हैं उर्वशी तो क्यों न ढलते-ढलते अपनी लालिमा को सामर्थ्य भर बिखेर जाँय ।” रामेंद्र जी अपनी पत्नी उषा से कह रहे थे । उषा जो अब ज़िंदगी के 62 वें बसंत में थी और रामेंद्र … Read more

“ सुख सुविधा नहीं अपनापन चाहिए” – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

हेलो.. निक्की बेटा… सुन… कल तेरे दादा दादी चार धाम की यात्रा सकुशल पूरी करके वापस आ रहे हैं तो हम सभी ने सोचा है कि उनकी सकुशल वापस आने  की खुशी में हम धूमधाम से बैंड बाजे  के साथ उन्हें घर लेकर आए, बेटा… इस उम्र में यह मौका बड़े नसीबों से मिलता है … Read more

ढलती सांझ – खुशी : Moral Stories in Hindi

दोस्तों जब हम जवानी में होते हैं तो हमें लगता है हम हमेशा ऐसे ही रहेंगे कभी हम बूढ़े ही नहीं होंगे हमें किसी की जरूरत नहीं होगी हमारा सब बहुत अच्छा होगा पर ऐसा नहीं है जब हमारे पास अपने होते हैं हम उनकी कदर नहीं करते और जब भाग दौड़ से निजात मिलता … Read more

मौन सामंजस्य – उमा महाजन : Moral Stories in Hindi

 आज भी शाम की सैर के समय मेरा ध्यान अपनी सैर में कम और उस वरिष्ठ दंपति की धीमी गति से चल रही सैर की ओर ही अधिक था। उन पति महोदय के एक पैर में संभवतः कुछ तकलीफ थी क्योंकि वे अपने दूसरे पैर पर तनिक अधिक दबाव बनाते हुए अत्यंत धीमी गति से … Read more

ढ़लती शाम – मधु वशिष्ठ : Moral Stories in Hindi

पूरा घर अस्त व्यस्त कपड़ों से फैला हुआ था। असली घी के मेवा डालकर बनाए हुए लड्डू यूं ही परात में रखे हुए थे। माधवी अंधेरे कमरे के अंधेरे कोने में बैठकर पुरानी यादों में खोई आंसू बहा रही थी।     कितने समय से वह राजेश के दुबई से आने का इंतजार कर रही थी। … Read more

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