उलझन सुलझ गई – अर्चना कोहली “अर्चि”

विवाह के बाद नम्रता पहली बार मायके रहने आई तो माँ की पारखी दृष्टि ने पहचान लिया कि वह कुछ परेशान -सी है। उसके दिमाग में ऊहापोह-सी चल रही है। नम्रता की हँसी में वह बात न थी जो विवाह से पहले थी। वह चुलबुलापन लुप्त था, जिससे यह घर रोशन रहता था। यह देखकर … Read more

राखी नहीं मिली  – गुरविंदर टूटेजा

 राखी के एक दिन पहले नीतू की रचना से बात हो रही थी तो…रचना  ने बोला दीदी राखी नहीं मिली और हँसतें हुये बोली राज बोल रहें थे कि कोरियर वालों की राखी तो समय से पहुँचनी चाहिए…!! राज ने फोन ले लिया और बोला दीदी जीजाजी ने भेजी या वही तो नहीं पड़ी है…!! … Read more

सैरोगेट-माँ” – सीमा वर्मा

हरिहर पुर निवासिनी मृणाल की शादी हंसापुर के अमीर घराने के प्रभास जी से तब तय हुआ था जब वह पंद्रह वर्ष की थी। और जिसे उस अपरिपक्व बच्ची ने अपने पिछले जन्म के किसी पुण्य कर्म का फल समझ कर सहर्ष स्वीकार कर लिया था। विवाह की पहली शर्त होती है — समर्पण और … Read more

माता-पिता की सजा संतान को क्यों – सुषमा यादव 

मैं शिक्षिका थी, मेरी दो बेटियां हैं , हमेशा से पढ़ाई में दोनों बहुत तेज   थीं, पति भी अधिकारी थे, ये सब देख कर  पता नहीं क्यों मेरे भाई भाभी को हमारे परिवार से जलन होने लगी, बात बात पर ताने, उलाहने दिये जाते, मैंने अपनी तरफ से संबंधों को सुधारने की बहुत कोशिश … Read more

मासूमियत – पी.एन. मिश्रा

अनुराधा ने आवाज लगाई  तो नवीन घूमा क्या है कल से गर्मियो की छुट्टिया आ रही है तो कल से रोज हम नदी की बालू मे मिट्टी के महल बनाकर खेलेंगे सुबह भी और शाम को भी मगर मै तो कल अपने गांव जा रहा हूं क्या?? तुम गांव चले जाओगे तो मै किसके साथ … Read more

वो एक थप्पड़ – सरिता गर्ग ‘सरि’ 

       बरसों बाद अपने इस पुराने शहर लौटा तो मन में अजीब से भाव कोलाहल मचा रहे थे। बस से उतरते ही देखा आसमान में बादल के काले  -सफेद टुकड़े दौड़ लगा रहे थे। ठंडी हवा बेलौस मतवाली नार सी बह रही थी। मैं चाह रहा था जल्दी घर पहुंच जाऊँ मगर मैने वो रास्ता चुना … Read more

नज़रअंदाज़ – बेला पुनीवाला

    दोस्तों, ज़्यादातर हमारे सुनने में यही आता है की, बच्चो ने अपने माँ – बाप को घर से निकाल दिया या उनका ख्याल नहीं रखा, मगर आज में आप सबको इससे अलग कहानी सुनाना चाहती हूँ, जैसे की हर बार गलती बच्चो की नहीं होती, कभी कभी माँ – बाप भी ज़िम्मेदार होते है।         आकाश … Read more

मीठी नींद – रंजू भाटिया

अभी तक यही अटका है तू …क्या वह मेज मैं साफ करूँगा ? चल जल्दी से जा वहाँ । ग्राहक खड़ा है। पहले मेज साफ कर, फ़िर यह बर्तन धोना । पिंटू जल्दी से वहाँ से उठा और भागा कपड़ा ले कर मेज साफ करने को। ठंड के मारे हाथ नही चल रहे थे, उस … Read more

रिश्ता  नहीं  सौदा था. –  सन्दीप गढवाली

लडके के पिता ने पंडित जी को एक लडकी देखने को कहा ! पण्डित जी बोले हाँ एक लडकी है. अभी कुछ दिनों पहले उसके पिता ने भी एक लडका देखने को कहा था.             एक दिन तय हुवा और शादी हो गयी. सब कुछ ठीक चल रहा था कि कुछ महीनो बाद. लडका लडकी मे … Read more

कलयुग नही मतलबी युग चल रहा है – संगीता अग्रवाल

“बेटा तुम्हारी माँ की तबियत सही नहीं है वो हर पल तुम्हे याद करती हैं एक बार तुम आ जाओ गांव वैसे भी दो साल हो गए तुम्हे यहां आए हुए !” हरिहरण जी अपने बेटे सोमेश से फोन पर बोले। “ओहो बाबूजी मां की तबियत खराब है तो उन्हें डॉक्टरको दिखाओ मेरे आने से … Read more

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