साजन घर आए  – अनिता गुप्ता

भानू प्रताप सिंह के घर से लेकर बाहर मोहल्ले तक फूलों से सजावट हो रही थी। जगह – जगह फूलों के दरवाज़े बने थे और भानु प्रताप सिंह जिंदाबाद लिखा था। बैंड वाले स्वागत धुन बजा रहे थे। पूरा मोहल्ला ठसाठस लोगों की भीड़ से भरा हुआ था। मोहल्ले के बाहर भी बहुत लोग जमा … Read more

सगे भाई का फर्ज – अनामिका मिश्रा 

सविता के दो बच्चे थे और उसके पति छोटी-मोटी नौकरी करते थे। वो एक स्कूल में शिक्षिका थी।  छोटे बच्चों को पढ़ाया करती थी।  सविता बहुत ही मिलनसार स्वभाव की थी सब स्कूल में उसे पसंद करते थे। एक दिन प्रधानाध्यापक ने किसी स्टाफ से पूछा, “मोहन, क्या बात है चार दिनों से सविता नहीं … Read more

*राखी* – नम्रता सरन”सोना”

हर वर्ष की तरह रागिनी ने इस बार भी रक्षाबंधन की तैयारी कर रखी थी… अपने भाई के लिए सुंदर सी राखी… भाभी के लिए कंगन और साड़ी.. नारियल… रुमाल…घेवर…फ़ैनी…और भी बहुत कुछ… जो भी उसे याद आया..एक एक चीज़ बड़े ही प्यार से संजोई थी…कि जब भाई राखी बंधवाने आए तो कोई कोर कसर … Read more

मेहंदी का रंग – दीप्ति सिंह

आज शकुंतला के सामने पिछली कई तीजों के दृश्य घूम गये। छोटी बहू श्यामली  सबके हाथों में मेहंदी लगा कर अपने बाईं हथेली को सुंदर तरीके से मेहंदी से अलंकृत करती तथा पति तुषार से दाईं हथेली पर एक गोल टिक्की बनवा कर अपना और तुषार का नाम लिखवाती थी। तीज के दिन उठ कर … Read more

शादी के बाद की पहली राखी – उषा गुप्ता

शादी के बाद की पहली राखी !!कितना बेकरार दिल !  मन तो बस रमा रहता है भाइयों को राखी बांधने के लिए। मैं भी बहुत बेकरार हूँ इस रक्षाबंधन के लिए।वैसे भी शादी के बाद शुरू -शुरू में पीहर और राखी का त्यौहार बहुत ही याद आता है।जैसे-तैसे अपने ससुराल में मैंने सब को मनाया … Read more

 बेटी होने की जिम्मेदारी – सुमन श्रीवास्तव

सुरु वो सुरु ” देखो बेटा, सुमित के कमरे की सफाई ठीक से कर देना । ऐसा न हो तेरे भईया भाभी को आने के बाद किसी किस्म की परेशानी हो और हां जिस समान की जरूरत हो बाजार से मंगवा ले। मुझे देखने के लिए कितना लम्बा सफर करके आ रहे हैं। “सुरुभि ” … Read more

प्रेम का एक रूप यह भी – वीणा

ये फगुनिया,कब आई ससुराल से –बालचन ने टहोका मारते हुए पूछा… फगुनिया कुछ नहीं बोली बस डबडबाई आँखों से बालचन की तरफ देखती रही। ये फगुनिया–ई तोहार आँख में आँसू…का हो गया, कऊनो बात हो गई का ससुराल में।इस बार सहानुभूति पाकर फगुनिया फूट पड़ी और बोली –साल भर में एक बार हम आते हैं … Read more

  राखी – उमा वर्मा

 अब के बरस भेज भैया को बाबुल, सावन में लीजो बुलाये—“” गुनगुना रही थी नन्दिनी ।दो दिन बाद राखी है ।इस बार खुद जाकर राखी बांधना चाहती है वह ।”” भैया को क्यो, खुद ही चली जाओ ना,मै कल ही टिकट का इन्तजाम करता हूँ “” अजय ने कहा ।आठ साल बाद नन्दिनी अपने पीहर … Read more

 डोर टूट गयी – रीटा मक्कड़

रक्षाबन्धन के त्योहार को 2 ही दिन बचे थे। अनिता कुछ गुमसुम सी , कुछ उदास और सोच में डूबी थी।कहने को तो वो घर के काम जल्दी जल्दी निपटा रही थी ।क्योंकि उसे उसके बाद बाजार जो जाना था अपने भाईयों के लिए राखियां लेने। अब तो भाभियों को भी लुम्बा राखी बांधने का … Read more

राखी का अनमोल तोहफ़ा,, ना कभी देखा होगा ना सुना होगा,, – सुषमा यादव

,, मेरे प्यारे भैया, कहां हो तुम ? जहां भी होंगे, अच्छे से ही होंगे,, राखी का त्यौहार आ रहा है, तुम्हारी बहुत याद आ रही है, और उस राखी पर तुमने मुझे ऐसा अनमोल उपहार दिया शायद ही किसी भाई ने आज़ तक अपनी बहन को दिया होगा ,, तुम्हें याद है,जब मैं तुम्हारे … Read more

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