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बुद्धिमान लालची
एक राजा अपने लिए समझदार और ईमानदार मंत्री की तलाश कर रहे थे.राजा ने कई लोगों का साक्षात्कार लिया लेकिन कोई भी व्यक्ति उन्हें मंत्री बनने के लायक नहीं लगा. वहीं जब यह बात राज्य के | सबसे बुद्धिमान व्यक्ति को पता लगी तो वो फौरन राजमहल चला गया. राजा से मिलकर उसने कहा, मैं … Read more
व्यवहार का ज्ञान
एक गांव की चार महिलाएं कुएं पर पानी व्यवहार का ज्ञान भरने गईं, पानी भरते समय चारों महिलाएं इधर-उधर की बातें कर रही थीं. कुछ समय बात करने के बाद वह अपने बेटों की तारीफ करने लगी. पहली महिला बोली, मेरा बेटा काशी से पढ़कर आया है, वह संस्कृत विषय का विद्वान हो गया है. … Read more
राखी का तोहफ़ा – प्रेम बजाज
ये उन दिनों की बात है जब करोना की महामारी फैली थी और बहुत से लोगों की नौकरी भी छूट गई थी, हमारे पड़ोस में रहने वाले रमेश की भी नौकरी छूट गई, जैसे-जैसे समय बीता थोड़ा सा कुछ जमापूंजी थी सब खत्म हो गया, खाने तक के लाले पड़ गए, 5-6 महीनों में बूरा … Read more
रक्षा – पुष्पा पाण्डेय
शालिनी को बचपन से सुरक्षा विभाग में नौकरी करने की प्रवल इच्छा थी, लेकिन वह जानती थी कि उसके माता-पिता उधर नहीं जाने देंगे। अंततः उसका नामांकन मेडिकल काॅलेज में हुआ। मन-ही-मन वह हमेशा यही सोचती रही कि वह आर्मी के अस्पताल में नौकरी करेगी। वो वक्त भी आया जब उसे निर्णय लेना था। माँ-बाप … Read more
राखी का गिफ़्ट – प्रीति आनंद अस्थाना
ऑफ़िस के रास्ते में एक अत्यधिक व्यस्त ट्रैफ़िक सिग्नल पड़ता था। अगर उस पर रुकना पड़ गया तो कम से कम पाँच-सात मिनट की तो छुट्टी हो ही जाती। मेरी नई-नई नौकरी लगी थी तो ऑफ़िस पहुँचने की जरा जल्दी रहती। वहाँ रुकना बेहद अखरता था। इसी सिग्नल पर कुछ लोग तमाम तरह का सामान … Read more
साँसों का तार… – विनोद सिन्हा “सुदामा”
अर्पिता मन में अथाह प्रेम लिए पलकपांवडे़ बिछाए बैठी अपने भाई के आने का इंतजार कर रही थी.. एक नई उम्मीद के साथ एक नए अहसास के साथ…इस राखी पर्व पर.अनुभव की राह तक रही थी… मन की भावनाएं शांत होने का नाम नहीं ले रही थी..खुशी आँखों से आँसूं बन कर निकल रही थी..भाई … Read more
पश्चाताप – गार्गी राय
शर्मा जी , जो सरकारी नौकर होते हुए भी स्वाध्याय के द्वारा अच्छा-खासा साहित्यिक समझ रखते थें । अध्ययन में रुचि रखने से काम में हमेशा ईमानदार रहें ….नतीजा हमेशा आर्थिक तंगी का शिकार होना पड़ा । हालाँकि शर्मा जी ऊँचे पद पर कार्यरत थें । हमारे देश की विडंबना है की पैसे बेईमानो के … Read more
उपहार – रश्मि स्थापक
“नेहा का फोन आया था…।” अविनाश बाथरूम से जैसे ही नहा के बाहर निकला कि पत्नी ने बताया। “अरे!मैं वही सोच रहा था कि छुटकी आज पहली बार रक्षाबंधन पर दूर है और अभी तक उसका फोन नही आया…मैं खुद ही नहा कर लगाने वाला था…क्या कहा छुटकी ने?” “आपसे बात करेगी…पर मुझे समझ नहीं … Read more
“माँ के हाथ की सब्जी ” – *नम्रता सरन”सोना”*
सुषमा आज फिर सकारात्मक उत्तर की अपेक्षा मे प्रमोद जी की खाने की थाली परोस रही थी कि, शायद आज दिल खुश हो जाये … प्रमोद जी ने खाना शुरू कर दिया , पहला निवाला मुँह मे रखते ही वे बोले ,अरे वाह ,,,आलू प्याज़ की सब्जी,,,, सुषमा की जिज्ञासा और बढ़ी कि,शायद अब वे … Read more