पिंजरा सोच का – अभिलाषा कक्कड़
क़िस्सा है यह पुराना मोबाइल का नही था तब ज़माना उफ़ !! दस बज गये हैं आज भी कहीं देर ना हो जाये, संजना जल्दी जल्दी किताबें उठाकर बाहर की ओर निकल गई । अभी दस कदम चल भी नहीं पाई थी कि सामने से बड़ा सा ट्रक देख कर मन में बुदबुदाई… इन छोटे … Read more