सारे दर्द औरत को ही क्यूँ ???? – मीनाक्षी सिंह

विन्नी – मम्मा ,बहुत दर्द हो रह हैँ पेट में ,पेट के आस पास और कमर में ! लग रहा हैँ मर जाऊंगी ! कुछ तो करो मम्मा ! सीमा (13 साल की विन्नी की माँ ) – कोई बात नहीं बेटा ,अभी तुझे गरम दूध दे दूँगी ! पी लेना आराम मिल जायेगा ! … Read more

“दर्दे जुदाई ”  –  कुमुद मोहन 

“सुनो सुनो राधा कहां हो भाई! कहते हुए महेश जी घर में घुसे” “क्यों चिल्ला रहे हो” पीछे से घर में घुसते हुए ताला खोलती राधा ने कहा! “कहां निकल गई थी?तुम्हें पता है ना कि मैं घर आऊं तो तुम मुझे घर में मिलनी चाहिए ,मुझे ये घर में ताला नहीं तुम चाहिए “!बताओ … Read more

दर्द का दिखावा – आरती झा आद्या

निशि निशि… साड़ी की दुकान से निकलती निशि अपना नाम सुन पलट कर देखती है। सुनिधि… सामने पुकारने वाली को देख निशि रुक गई। तुझे आज शॉपिंग करनी थी तो बताना था न, दस बजे से कॉल करके थक गई यार… निशि मुंह बनाती हुई कहती है। अरे नहीं निशि… मैं अपनी रिश्तेदार के घर … Read more

एक बेटे का दर्द तुम कभी समझ ही नही पाईं !! – स्वाती जैंन

सुनीता बोली सच गाँव के लोगो को शहर के कितने भी तौर – तरीके सीखा लो मगर वे गाँव वाली हरकतें ही करेंगे !! यह सुनकर रुक्मणि जी का दिल एक बार फिर टूट गया , कितनी उम्मीदे लेकर गाँव से आए थे रमाकांत जी और रूक्मणि जी मगर सुनीता दोनों को कुछ भी सुनाने … Read more

 एक हसरत थी कि…. – विभा गुप्ता

 एक लड़की होने के नाते मेरी भी एक इच्छा थी कि मुझे भी कोई छेड़े।मुझ पर नई-नई जवानी आई थी,नई इसलिए क्योंकि तब मैं स्कूल में थी और कॉलेज तक जाते-जाते जवानी बेचारी पुरानी हो जाती है।हाँ, तो मेरी सहेलियाँ जब छुट्टियों से वापस आती तो मुझे बताती कि बस में किसी ने मेरे कंधे … Read more

अपने लोग – कंचन श्रीवास्तव

आज बेटे की बात सोच मैं भीतर से टूट गई,और सोचने लगी। यकीनन आज के बच्चे ‘ जहां हम आज भी भावनाओं में उलझे हुए हैं जो भी दो शब्द प्यार से बोल दे, उसी के हो जाते हैं ।चाहे वो अपना हो या पराए’  बहुत प्रैक्टिकल है। और सही भी है आज में जीते … Read more

मायका – गीतांजलि गुप्ता

रवीना ने छोटी सी उम्र में ही अपने माता पिता को खो दिया था। दादा दादी ने पूरे लाड़ प्यार से पाला था। चाचा चाची और  बच्चों को वो फूटी आँख नहीं भाती थी, इसलिए दादा जी  चाचा जी से अलग़ रहने लगे थे। रवीना की शादी के बाद दादा दादी को चाचा जी अपने … Read more

किटी पार्टी – आरती असवानी

किटी पार्टी खत्म हो चुकी थी, सुधा जूठे बर्तन किचन में ले जा रही थी। कांता, सुजाता खास दोस्त थी सो मदद के लिए रुक गयी। “बात जब सास या ससुराल की हो तब तो सब सहेलियाँ खूब बढ़ चढ़ कर चर्चा करती हैं, लेकिन जैसे ही पति के मदद की बात आती है तो … Read more

दर्द का संगीत – रश्मि सिंह

मोहन (फ़ोन पर)- ललित जी, पाँच बज गए है, सैर पर चला जाए। ललित- हाँ। मैं बस 10 मिनट में आया, जब तक तुम और लोगों को बुला लो। ललित-देवकी, गरम पानी तो लाना, फिर मैं सैर पर निकलूँ। देवकी (पानी देते हुए)-लौटते वक़्त मंडी से फल और सब्ज़ियाँ लेते आना। मैंने लिस्ट बना दी … Read more

” माँ ने जब बेटे के दर्द एवं दुःख को उसका हौसला बना दिया !” – ज्योति आहूजा 

गर्वित स्कूल से घर वापस आते ही बहुत उदास होता है। उसे उदास देखकर घर के सभी लोग उसे पूछने लगते हैं “क्या हुआ बेटा? बताओ तो सही। बहुत उदास नजर आ रहे हो।” तभी गर्वित कहता है आप सबको पता है! थोड़े दिनों के बाद हमारे स्कूल में स्पोर्ट्स कंपटीशन (खेल प्रतियोगिता) रखा गया … Read more

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