अनकहा दर्द — विभा गुप्ता
” देख छोटी, तू अंश के सामने अपनी मनहूस सकल लेकर मत आ जाना।पूरे दो बरस बाद मेरा लाल आ रहा है, तेरा क्या भरोसा, कहीं टोटका-मंतर कर…” जेठानी सुमित्रा के तीखे शब्द और आग उगलने वाली नज़रें जानकी अब बर्दाश्त नहीं कर पाई और अपने कमरे के सूनी पलंग पर जाकर फूट-फूटकर रोने लगी। … Read more