अक्स: जब बेपरवाही को मिला ज़िम्मेदारी का सुकून – हर्षिता सिंह

शहर की भागदौड़ से दूर, एक पुरानी लेकिन बेहद खूबसूरत कॉलोनी में रहने वाली मानवी एक ऐसी लड़की थी, जो अपनी ही ख्यालों की दुनिया में मगन रहती थी। उसके लिए दुनिया का मतलब सिर्फ उसकी कैनवास, उसके रंग, कुछ पुरानी किताबें और अपने कानों में इयरफ़ोन लगाकर अपनी धुन में खोए रहना था। तेईस … Read more

अधूरी लकीरों का सफर – नमिता पंडित

“अगर, मगर और काश… इन शब्दों में जिंदगी नहीं जी जाती राघव। मैं मानती हूं कि हमने अपने सबसे अच्छे साल तकलीफों में गुजारे। मैंने अपने मायके का सुख हमेशा के लिए खो दिया और तुमने अपने शुरुआती संघर्षों में वो सुकून नहीं पाया जो एक नौजवान को मिलना चाहिए। लेकिन आज हम कहां हैं? … Read more

जड़ों की पुकार – मीरा महेश

अमन ऑफिस की फाइलें पलट तो रहा था, लेकिन उसका दिमाग उन पन्नों पर नहीं था। उसकी आँखों के सामने बार-बार अपनी माँ का वो उदास चेहरा आ रहा था, जो उन्होंने कल रात उसे खाना परोसते समय छुपाने की कोशिश की थी। शादी के तीन साल बाद ही उसके और उसकी पत्नी दिशा के … Read more

असीम प्रेम की अनूठी दास्तान – निधि सहाय

पार्टी के बीच में अचानक काव्या की नज़र एक ऐसे चेहरे पर पड़ी जिसे उसने पिछले कई सालों से नहीं देखा था। वह समीर था। समीर, काव्या के साथ कॉलेज में पढ़ता था। वह हमेशा शांत रहता था, क्लास में सबसे पीछे बैठता था और अपनी किताबों में खोया रहता था। लेकिन वह अक्सर छुप-छुप … Read more

फ़र्ज़ की डोरी – कृति रश्मि 

“बहू, ये लाल रंग का भारी काम वाला लहंगा कितने का होगा?” विमला बुआ ने अपनी बड़ी भतीज-बहू, मानसी के कंधे पर हाथ रखते हुए पूछा। उनकी नज़रें स्टेज पर बैठी अपनी सगी भतीजी और आज की दुल्हन, शिखा पर टिकी थीं। मानसी ने एक हल्की, लेकिन थकी हुई मुस्कान के साथ जवाब दिया, “बुआ … Read more

पत्थर के रिश्ते – आर्या विनोद

नंदिनी सुबह के चार बजे से ही उठकर घर के कामों में जुट जाती थी। रसोई से बर्तन खटकने की हल्की सी आवाज भी आती, तो उसे डर लगता कि कहीं उसकी सौतेली भाभी सुलेखा की नींद न टूट जाए। अगर सुलेखा की नींद टूट गई, तो नंदिनी का पूरा दिन तानों और गालियों के … Read more

प्यार – खुशी

मैं बालकनी में खड़ी इधर उधर देख रही थी।तभी एक ट्रक और एक गाड़ी आ कर रुके ।मुझे लगा चलो पड़ोस में कोई आया है कुछ दिन से सामने वाले फ्लैट में काम चल रहा था।गाड़ी में से एक डैशिंग सा आदमी उतरा और दूसरी तरफ से एक लड़की जो बिल्कुल सांवली थी चाहे तो … Read more

हैसियत – एम. पी. सिंह

सेठ मोहन दास आज जयपुर के जाने माने मार्बल एक्सपोर्टर है. ये सब उनकी मेहनत का नतीजा था. उनका बेटा रोहित भी एम.बी.ए. करने के बाद पिताजी के साथ काम करने लगा था. रोहित के आने के बाद एक्सपोर्ट की नई उचाईयो क़ो छू लिया. वैसे रोहित के दादाजी की साइकिल रिपेयर की दुकान थीं … Read more

 बेनाम रिश्तों की अनकही दास्तान – आर्या विनोद

 श्रुति अपनी डेस्क पर रखा अपना सारा सामान समेट रही थी। पिछले दो सालों से जिस आर्किटेक्चरल प्रोजेक्ट पर वह और उसकी कंपनी काम कर रही थी, वह आज सफलतापूर्वक पूरा हो गया था। अब उसकी कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो चुका था और कल से उसे इस ऑफिस में नहीं आना था। फाइलों को … Read more

कर्मों का अनकहा हिसाब: एक निस्वार्थ कदम

अनिकेत के जीवन में पिछले कुछ महीने किसी डरावने सपने से कम नहीं थे। पिता के अचानक हुए देहांत के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उसके युवा कंधों पर आ गिरी थी। घर में एक बीमार माँ और कॉलेज के अंतिम वर्ष में पढ़ रही छोटी बहन रिया थी। पिता की जमा-पूंजी माँ के इलाज … Read more

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