फरेब की दीवार

 ओंकारेश्वर जी ने आगे बढ़कर सिद्धांत और अनन्या दोनों के सिर पर हाथ रखा और भावुक होकर कहा, “लोग कहते हैं कि बेटियां पराया धन होती हैं और शादी के बाद रिश्ते बदल जाते हैं। लेकिन आज मुझे गर्व है कि मेरी बेटियों ने मुझे दुनिया का सबसे अमीर पिता बना दिया है। मेरे पास … Read more

माँ का डर

 तान्या ने माँ के आंसू पोंछते हुए कहा, “माँ, आप गलत नहीं थीं। आपका डर अपनी जगह सही था क्योंकि आप दुनिया की नजरों से मुझे बचाना चाहती थीं। लेकिन पापा और भैया ने जो मुझे उड़ने का हौसला दिया, उसने मुझे कभी कमजोर नहीं बनाया। जब अपनों पर आंच आती है न माँ, तो … Read more

सरहद की सांध्यवेला

 अवनि छत के एक कोने में अपनी पूजा की थाली लिए जड़वत खड़ी थी। उसकी छलनी हाथ में थी, पर उसकी आँखें पूरी तरह बंद थीं। पलकों की कोर से गर्म आँसू ढुलक कर उसके गालों पर सज चुके सिंदूर को भिगो रहे थे। वह उस आसमानी चाँद को कैसे देखती? उसका अपना चाँद, उसका … Read more

सोने का कंगन

आलोक ने तुरंत सुहासिनी को सहारा देकर उठाया और अपने सीने से लगा लिया। उस आलिंगन में सारे शिकवे, सारी कड़वाहट और सारा खोखलापन धुल गया। सुहासिनी ने छलनी उठाई, पहले बादलों के बीच चमकते पूनम के चांद को देखा और फिर उसी छलनी की छांव में अपने जीवन के सबसे बड़े सत्य—अपने पति आलोक … Read more

मन के रिश्ते

“नहीं पापा, दफ्तर का कोई बहाना नहीं है। मैं पूरी तरह खाली हूं, लेकिन फिर भी नहीं जाऊंगा,” मयंक ने नजरें मिलाकर कहा। “पापा, सच तो यह है कि मुझे किसी ने बुलाया ही नहीं है। मौसा जी ने आपको फोन किया, प्रतीक ने आपको निमंत्रण दिया। मुझसे किसी ने एक शब्द नहीं कहा। हर … Read more

रिश्तों की नई सुबह

बच्चों की आवाज सुनते ही सुप्रिया के भीतर की सारी दीवारें, सारा गुस्सा और सारा दर्द एक झटके में ढह गया। वह जमीन पर बैठ गई और दोनों बच्चों को अपने सीने से चिपका लिया। बच्चों के रोने और सुप्रिया की सिसकियों से पूरा आँगन गूँज उठा। वह अपने बच्चों के चेहरे, माथे और हाथों … Read more

पराए घर की बेटी

 रीना को अपनी पुरानी सारी बातें, अपने ताने और अपनी माँ की ज़हरीली सीखें याद आने लगीं। उसे याद आया कि जब भी अंजलि यहाँ आती थी, वह कभी किसी से ऊंची आवाज़ में बात नहीं करती थी। वह चुपचाप घर के कोने में बैठकर काम करती रहती थी। उसकी आँखों के नीचे के वो … Read more

उम्मीद की सुबह

 जानकी के भीतर अचानक एक बिजली सी कौंधी। उसने आईने में अपने चेहरे को देखा। उसकी आंखों में आंसू तो थे, पर उन आंसुओं के पीछे एक नई ज्वाला जलने लगी थी। उसने महसूस किया कि लगातार समझौता करना त्याग नहीं, बल्कि अपनी आत्मा के प्रति किया जाने वाला अपराध है। अत्यधिक समझौता इंसान को … Read more

राख में खिली उम्मीद की किरण

 अवंतिका को जब होश आया, तो उसने अपनी कांपती हुई उंगलियों से मेनका का हाथ पकड़ा। उसने अपनी नवजात बच्ची को देखने की अंतिम इच्छा जताई। मेनका ने रोते हुए बच्ची को उसकी छाती से लगाया। अवंतिका ने बच्ची के माथे को चूमा, उसके आंसुओं की बूंदें बच्ची के गालों पर गिर पड़ीं। उसने लड़खड़ाती … Read more

कर्ज से रिश्ते तक

 मैंने आगे बढ़कर शारदा को उठाया और देवेश से कहा, “देवेश जी, पुरानी गलतियों का पश्चाताप रोने से नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी को सुधारने से होता है। अगर आप सच में शारदा और अपनी बेटियों से प्यार करते हैं, तो आपको इस दलदल से बाहर निकलना होगा। क्या आप एक नई शुरुआत करने के लिए … Read more

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