अस्तित्व की पहचान
आरव दबे कदमों से अंदर आया और मां की साड़ी का पल्लू पकड़कर बोला, “मां, तुम सुबह सबसे पहले जागती हो और रात को सबसे बाद में सोती हो। पूरे दिन तुम किसी न किसी के लिए कुछ न कुछ करती रहती हो। कभी झाड़ू, कभी खाना, कभी कपड़े… फिर भी दादाजी, दादी और पापा … Read more