अस्तित्व की पहचान

आरव दबे कदमों से अंदर आया और मां की साड़ी का पल्लू पकड़कर बोला, “मां, तुम सुबह सबसे पहले जागती हो और रात को सबसे बाद में सोती हो। पूरे दिन तुम किसी न किसी के लिए कुछ न कुछ करती रहती हो। कभी झाड़ू, कभी खाना, कभी कपड़े… फिर भी दादाजी, दादी और पापा … Read more

स्वाभिमान का पहिया

 रामदीन का गला भर आया। उन्होंने अपनी कांपती आवाज को संभालते हुए कहा, “बाबूजी, हम अनपढ़ रहे, जिंदगी भर लोगों का बोझ ढोते-ढोते हमारी पीठ झुक गई। हम नहीं चाहते कि हमारे बेटे को भी समाज की यह जिल्लत और बेबसी देखनी पड़े। उसकी फीस, उसकी किताबें, रहने-खाने का खर्चा बहुत है। वह कहता है … Read more

मौन की दीवार

तुम्हारी आँखों से आँसू गिर रहे थे, पर तुम्हारे हाथ कांपते हुए आटे की थाली में चलते रहे। मैं दरवाज़े की ओट में खड़ा सब सुन रहा था। मेरे सीने में कुछ बुरी तरह टूटा, एक टीस उठी कि मैं आगे बढ़ूँ, माँ का हाथ थाम लूँ और कहूँ कि बस कीजिए। पर मेरे पाँव … Read more

स्वाभिमान की भोर

“मेरा नाम सोफिया है। सोफिया मिलर। मैं लंदन से बोल रही हूं… और मुझे नहीं पता कि मुझे यह बात कैसे कहनी चाहिए, लेकिन सच को छुपाना अब मेरे लिए मुमकिन नहीं है।” अनन्या का माथा ठनका। उसने काम बंद कर दिया। “किस बारे में बात कर रही हैं आप?” “विक्रम के बारे में। तुम्हारे … Read more

किस्मत की रेत और दोस्ती का हाथ

शालिनी समझ गई कि राघव के सामने ज्यादा कुरेदना उनके स्वाभिमान को और चोट पहुंचाएगा। उसने केवल सामान्य बातें कीं, बच्चों का हालचाल पूछा जो पास के एक सरकारी स्कूल में पढ़ते थे, और रागिनी का फोन नंबर अपनी डायरी में लिख लिया। जाते समय उसने रागिनी के कंधे पर हाथ रखा और कहा, “बस … Read more

अनकही सरगम

 बाबूजी की यह बात अवनि के सीने में तीर की तरह चुभी। ‘किसी अपने के लिए जज्बात…’ इसका मतलब राघव किसी और से प्यार करता था? अवनि को लगा जैसे उसकी पूरी दुनिया ही ढह गई हो। उसका एकतरफा प्रेम, जो बिना किसी उम्मीद के पनप रहा था, अब एक असहनीय दर्द बन चुका था। … Read more

रेत पर खिली धूप

किचन के स्लैब पर रखा मोबाइल फोन लगातार थरथरा रहा था और हर कंपन के साथ देवयानी की सांसें अटक रही थीं। स्क्रीन पर जगमगाता नाम था—‘अन्वी’। वही अन्वी, जिसकी एक आह पर कभी देवयानी ने अपनी पूरी रातें कुर्बान कर दी थीं, आज उसी बेटी का फोन उठाने में उसके हाथ कांप रहे थे। … Read more

न्याय की लाठी

 पार्वती ने हाथ जोड़कर कांपते हुए कहा, “मुखिया जी, मैं एक लाचार औरत हूँ। दिन-रात मेहनत करके अपने बच्चे का पेट पालती हूँ। आज दोपहर जब मैं खेत पर थी, तो मेरे जेठ भवानी और देवर महिपाल ने मेरे घर का ताला खोलकर संदूक से मेरे सास के दिए सोने के जेवर चुरा लिए। मेरे … Read more

दहलीज़ का देवदूत

 साधना जी ने कुणाल के सिर पर हाथ रखा और बहुत ही दृढ़ स्वर में बोलीं, “बेटा, अगर यह सौ प्रतिशत झूठ है और कोई मुझे ठग भी रहा है, तो मेरे पंद्रह सौ रुपये चले जाएंगे। इससे मेरे घर का चूल्हा बंद नहीं होगा और न ही हम सड़क पर आ जाएंगे। लेकिन सोच, … Read more

आँधी में जलती मशाल

शारदा अपनी बेटियों से हमेशा एक बात कहती थी, “मेरी बच्चियों, समाज कहेगा कि लड़की की असली मंजिल उसकी शादी है। लेकिन मैं कहती हूँ कि लड़की की पहली मंजिल उसकी आत्मनिर्भरता है। जब तुम्हारे हाथ में अपनी कलम और अपने पैरों पर खड़े होने की ताकत होगी, तो दुनिया का कोई भी तूफान तुम्हें … Read more

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