किस्मत अपना रास्ता खुद चुनती है – गरिमा चौधरी
रीमा ने गेट से अंदर दाख़िल होते ही नाक पर रुमाल रख लिया। “हे भगवान, ये कैसी जगह है?” उसने धीरे से माँ के कान में फुसफुसाया, “चारों तरफ़ धूल, खुले नाले, गाय-बैल… और आप कह रही थीं कि यहाँ ‘बहुत बड़ा कारोबार’ है!” माँ ने आँखें तरेरीं—“धीरे बोल, लोग सुन लेंगे। ये तेरे मामा … Read more