आउट डेटेड बुढ़िया – कविता भड़ाना

रीमा और सीमा की आँखें विस्मय से फ़टी रह गयी जब उन्होंने रेस्टोरेंट के सामने वाली टेबल पर सासु माँ दामिनी जी को अपनी सखियों के साथ खिलखिलाते हुए गरम गरम छोले भटूरे खाते हुए देखा, उससे भी ज्यादा हैरानी उनके कपड़ो को देख कर हो रही थी, गुलाबी रंग की शिफान की साडी, उम्र … Read more

जिंदगी की दूसरी पारी – विनीता सिंह

राहुल जी एक स्कूल में गेम के टीचर थे।उनकी उम्र 60साल की थी स्कूल से रिटायर हो चूके उन्होंने सोचा सारी जिन्दगी बहुत काम कर लिया अब अपने पोते पोतियों के साथ समय बीताऊगा। लेकिन कहते हैं जो होना होता है वहीं होता है। उनके दोनों बेटे अपनी नौकरी के लिए अपने अपने परिवार को … Read more

जिंदगी की दूसरी पारी – परमा दत्त झा

आज फिर रोहन और उसकी पत्नी श्यामा विजय बाबू और उनकी पत्नी संग उलझ गए थे। पापा पैसे पेड़ पर नहीं उगते?-यह रोहन था। ऐसा क्या मांग लिया हमने,बस तेरी मां की दवा लाने को कहा था जो खत्म हो गई है।-वे सहज भाव से बोले। वहीं तो मैं समझा रहा हूं,पैसे पेड़ पर नहीं … Read more

विषमता में समता ढूँढती लेखिका – रश्मि वैभव गर्ग

भरा,पूरा परिवार था मेरा.. एक बेटा ,एक बेटी, सास -ससुर का सानिध्य..खुद से भी ज्यादा चाहने वाला पति, संपन्नता …सब कुछ तो था ..जो एक गृहिणी अपने जीवन में चाहती है… बड़े बुजुर्गों के आशीर्वाद से सिंचित आशियाना ..जिसमें न केवल अपने सास ससुर ,बल्कि उनके मित्रों के आशीर्वाद से भी पूर्णतः संतृप्त रहती थी … Read more

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