रीमा और सीमा की आँखें विस्मय से फ़टी रह गयी जब उन्होंने रेस्टोरेंट के सामने वाली टेबल पर सासु माँ दामिनी जी को अपनी सखियों के साथ खिलखिलाते हुए गरम गरम छोले भटूरे खाते हुए देखा, उससे भी ज्यादा हैरानी उनके कपड़ो को देख कर हो रही थी,
गुलाबी रंग की शिफान की साडी, उम्र के अनुरुक गरिमामयी हल्का मैकअप, दुबली पतली काया और सर पर बड़ी नजाकत के साथ लगा हुआ काला चस्मा, बिल्कुल पुरानी फिल्मो की हीरोइन जैसी दिख रही थी….
तीन महीने पहले रोती बिलखती अपनी दोनों बहुओ से घर ना छोड़ कर जाने की विनती करने वाली दामिनी तो उन्हे दूर दूर तक नही नज़र आ रही थी….
दो दो बहुओ के होते हुए भी पूरा घर संभालने वाली सास और ससुर, दोनों बहुओ को अपने स्तर से नीचे और “आउट डटेड” लगते थे, जिन्हे बहुओ का रोज किट्टी पार्टी में जाना, बच्चो पर ध्यान ना देना, देर रात आने पर रोकना टोकना बहुत खलता था,
दोनों देवरानी जेठानी ने अपनी आजादी में रुकावट बने हुए सास ससुर के साथ रहने से साफ इंकार कर दिया और आये दिन घर में कलेश करने लगी, तब दोनों बेटों ने भी अपनी पत्नियों को समझाने के बजाय अपने माँ पिता को छोड़कर दूसरे घर में जाना उचित समझा….
दामिनी और उनके पति ने कितना रोकने की कोशिश की पर उनकी किसी ने भी एक ना सुनी और आज इतने दिनों बाद अपनी सास का ये बदला रूप देख दोनों अचरज में थी…
किसी तरह खा पीकर रीमा और सीमा जल्दी से बिल पे करके बाहर निकल कर कैब का इंतज़ार करने लगी, अभी कैब आने में थोड़ा वक़्त लग रहा था
की दोनों पर एक और आश्चर्य का बॉम्ब फट गया… उन्होंने देखा की दामिनी जी अपनी चार सखियों को कार में बिठाकर खुद गाड़ी ड्राइव करती हुई “सायरा बानो” की तरह इठलाती हुई सामने से फुर्र हो गयी….
गाड़ी चलाती हुई दामिनी जी मन ही मन अपने पति को शुक्रिया अदा कर रही थी जिन्होंने बेटे बहुओ के तिरस्कार के बाद उन्हे
संभाला और #जिंदगी की दूसरी पारी के लिए तैयार किया, हर वो अधूरी इच्छा, जो पूरी ना हो सकी, उसे पूरा करने के लिए प्रेरित किया, खुद को बोझ समझने के बजाए खुद के लिए जीना सिखाया, कुछ भी नया करने या सीखने की कोई उम्र नही होती ये बात समझाई…
इधर बेबस, लाचार “आउटडटेड सास” की जगह “अपडेटेड सास” देखकर दामिनी जी की दोनों बहुए अभी तक भी सदमे मे थी, जीवन की दूसरी पारी इतनी खूबसूरत भी हो सकती है ये तो उन्होंने सोचा भी नही था।।।
#जिंदगी की दूसरी पारी “
मौलिक रचना
कविता भड़ाना✍️