अफ़सोस – सीमा सिंघी

आज फिर रजत को कॉलेज छोड़ काम पर जाते देख कौशल्या जी बोल उठी। रजत यह तुम ठीक नहीं कर रहे हो। तुम अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ कर जो नई राह पकड़ रहे हो।

 देखो तुम्हें कोई नया व्यापार करना हो या… कोई और नई राह तुम्हें अपनी और आकर्षित कर रही हो तो… बेशक जाओ… उसे आजमाओ…. मगर उसके पहले तुम अपनी पढ़ाई कंप्लीट करो क्योंकि… कहीं ऐसा ना हो। एक वक्त में जाकर कुछ बरसों बाद तुम्हें अपनी पढ़ाई पूरी नहीं करने का अफ़सोस रह जाए।

देखो रजत…वैसे अभी तुम्हारी उम्र ही क्या है। सच कहूं तो इस उम्र में ही हर जज्बे से लड़ने की… उसे पाने की ताकत होती है… हिम्मत होती है। 

वैसे भी पारिवारिक जिम्मेदारी तुम पर कुछ है नहीं क्योंकि….. अभी तुम्हारे पापा पूरे घर की जिम्मेदारियां बहुत अच्छी तरह संभाल रहे हैं तो… तुम बेशक नए-नए तरीके अपना कर देख सकते हो मगर… उसके पहले अपनी पढ़ाई पूरी कंप्लीट कर लो तो ही बेहतर होगा। 

अपनी मां कौशल्या जी की बात सुनकर रजत तुरंत बोल उठा। 

नहीं मां मेरा मन फिलहाल पढ़ाई में बिल्कुल भी नहीं है। मैं अब कोई इम्तिहान नहीं देने वाला । आप जानती है मां….मेरा एक मित्र है । जो कुछ महीने पहले ही ऑनलाइन में किसी नए काम पर लगा है। उसे तो पैसे मिलने शुरू भी हो गए हैं तो फिर इतनी मेहनत क्यों करनी…… क्यों पढ़ाई पूरी करने के चक्कर में समय गंवाना।

कौशल्या जी अपने बेटे रजत की बात सुनकर उसे शांत मन से समझाने लगी। देखो बेटे मैं मानती हूं आज ऑनलाइन का जमाना है और इसने तरक्की भी बहुत की है मगर… कुछ बड़ी कंपनियों को छोड़कर तुम हर किसी कंपनी पर पूरी तरह भरोसा नहीं कर सकते हो क्योंकि…. जिस दिन वह कंपनी बंद हो जाती है और अपनी ऐप को डिलीट कर देती है तो…. तुम्हें उसके कोई नामोनिशान तक भी नहीं मिलेंगे । तब फिर तुम क्या करोगे?????

 तुम तो बीच राह में ही रह जाओगे और फिर तुम खुद के कमाए हुए पैसे से भी हाथ मलते रह जाओगे क्योंकि वह तुम्हारी पगार तक डकार चुके होगे। दीनानाथ जी जो इतनी देर से दोनों मां बेटे की बातें सुन रहे थे।

 वह भी रजत को समझाते हुए बोल उठे। तुम्हारी मां बिल्कुल सही कह रही है बेटे। अभी कुछ दिन पहले ही एक बहुत बड़ी कंपनी ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया है । 

अब सोचो जरा…. उसमें नौकरी करने वाले कहां जाए…वह तो रातों-रात सड़क पर आ गए है और तो और उस कंपनी में कार्यरत रहने वाले कर्मचारियों को तीन महीने की तनख्वाह तक नहीं मिली है। सोचो…अब उन पर क्या बीत रही होगी और वैसे भी रजत बेटे हम मध्यम वर्गीय परिवारों को एक-एक कदम संभल कर रखने होते हैं क्योंकि… हम पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी होती है और उस पर अगर हमारी आय का जरिया सही और पक्का नहीं हो तो सोचो…. हम परिवार की जिम्मेदारियों को कैसे उठाएंगे इसीलिए रजत बेटा…. मैं और तुम्हारी मां तुम्हें आगे भविष्य के लिए भी सचेत कर रहे हैं कि…. तुम जो भी कदम उठाओ….सोच समझ कर उठाओ… ताकि बाद में तुम्हें कोई अफ़सोस ना रह जाए।

रजत अपनी मां और पापा की बात सुनकर शांत मन से बोल उठा।

मां पापा आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। मैं थोड़े से पैसे की लालच में अपने भविष्य को बर्बाद करने जा रहा था । मैं अच्छी तरह समझ चुका हूं कि ऑनलाइन के प्रलोभन में मुझे अपनी पढ़ाई अधूरी नहीं छोड़नी है और वैसे भी मां पापा आप मुझे जो भी राय देंगें । 

वह मेरे लिए सही ही साबित होगी क्योंकि… आप दोनों उम्र के इस पड़ाव तक कदम कदम पर मिले हुए अपने अनुभव से ही मेरी जिंदगी सुधारना चाहेंगे ताकि जो तकलीफें आपको झेलनी पड़ी। वह मुझे ना झेलनी पड़े और ना ही मुझे उसका अफ़सोस रहे कह कर रजत अपनी मां और पापा के कदमों में झुक गया और फिर बोल उठा।

 मां पापा… आप दोनों मुझे आशीर्वाद दीजिए कि इस बार इम्तिहान में मैं अच्छी तरह पास हो जाऊं कह कर वो मुस्कुराने लगा। कौशल्या जी और रघुनाथ जी ने भी अपने बेटे रजत को ढेर सारा आशीर्वाद दिया और उन दोनों के चेहरे पर भी हल्की मुस्कान उभर आई। 

वह शायद यही सोच रहे होंगे कि…. अगर संतान अपने माता-पिता की बातों को इस तरह मान ले… सहजता से स्वीकार कर ले तो…शायद उनकी संतानों को आगे भविष्य में कोई अफ़सोस नहीं रह जाएगा और ना ही उन माता-पिता को भी ….।

स्वरचित 

सीमा सिंघी 

गोलाघाट असम

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