जिंदगी की दूसरी पारी – मंजू ओमर

पापा आप तो आप खाली हो नौकरी से रिटायर हो चुके हो फिर क्यों सुबह-सुबह नहा धोकर तैयार होकर बैठ गए हो। आराम से उठिए इतनी जल्दी उठ कर सबको परेशान करने की क्या जरूरत है। आपके साथ-साथ मम्मी को भी सुबह उठना पड़ता है। हां बेटा सही कह रहा है लेकिन 40 साल नौकरी … Read more

जो तुमको हो पसंद – लतिका श्रीवास्तव

शालू कितनी देर लगाओगी नाश्ता लाने में दुकान से ग्राहक लौट जाएंगे कैलाश जी ने थोड़ा खीज कर कहा तो शालू रसोई से प्लेट लिए भागती आती दिखाई दी। तुम्हे पता है मेरी दुकान सबसे पहले खुलती है।लेकिन जब मैं ही घर से देर से निकलूंगा तो कैसे खुलेगी… कैलाश जी ने प्लेट में रखा … Read more

जिन्दगी की दूसरी पारी – बीना शुक्ला अवस्थी

आज हरिद्वार के इस होटल में काम करते महेन्द्र को पूरे पॉच साल हो गये। आज से पॉच साल पहले वह सेवा निवृत्त हुआ था। बहुत खुश था वह जिन्दगी की दूसरी पारी अपने परिवार के साथ बितायेगा।‌ जिन्दगी भर नौकरी के कारण न घर परिवार को समय दे पाया और न खुद को। माता … Read more

ज़िन्दगी की दूसरी पारी – बिमला रावत जड़धारी

दिव्या ने कभी नहीं सोचा था कि जिन्दगी की दूसरी पारी इतनी खुबसूरत होगी। कभी शौक से सीखा हुआ योगा आज उसका व्यक्तित्व ही बदल देगा।कभी घर से बाहर ना निकलने वाली दिव्या अपने घर के काम में ही व्यस्त रहती। दिव्या के दो बच्चे, दोनों ही अपनी गृहस्थी में व्यस्त रहते। कभी वह अपने … Read more

जिंदगी की दूसरी पारी – शिवांगी जैन

तालियो की तेज गड़गड़ाहट और मंच की ओर से कानों में सुनाई पड़ते अपनी बेटी शुभि के तीन वाक्य  ‘जिंदगी की दूसरी पारी ‘…  शिखा की आंखों में खुशी व चेहरे पर संतुष्टि के भाव जाग गए। शुभि ने अपना अवार्ड अपनी मां को देते हुए कहा ,मेरी इस कामयाबी का श्रेय मेरी मां को … Read more

दूसरी पारी – खुशी

राघव जी एक सीधे साधे ईमानदार आदमी थे। परिवार में पत्नी आरती तीन बच्चे महक,प्रफुल और खुशबू थे।मां पिताजी गांव में रहते थे।बचपन से ही राघव पढ़ाई लिखाई में अव्वल थे।तो जब उनकी 10 वीं की परीक्षा हुई तो ख़ाली समय में वो गांव के बच्चों को पढ़ाते थे।सब कहते राघव भैया ने पढ़ाया तो … Read more

मोह से मुक्ति – शुभ्रा बैनर्जी 

शिवांश इस अगले हफ्ते सेवानिवृत्त हो रहे थे। छह महीने पहले ही से पार्टी की लिस्ट बना रहे थे।किसे-किसे बुलाना है?कैटरिंग किसे देना है? मेनू में क्या रहेगा? सुषमा अपने पति की आदत से भलीभांति परिचित थी।बस बहाना चाहिए, खिलाने का।अपने पैसे खर्च होने पर इतना खुश होने वाला इंसान शिवांश ही हो सकता था।बच्चों … Read more

*जिंदगी की दूसरी पारी* – तोषिका

कमाल है, आप इतनी मशहूर है, फिर भी कितने सभ्य तरीके से बात करती है और इतनी ज्यादा उम्र में आपने लंच सर्विस जैसा कारोबार शुरू किया और कुछ सालों में इतना बड़ा किया ये बहुत ही काबिल्य तारीफ है। हस्ते हुए एक रिपोर्टर ने राशि को बोला। राशि हल्का सा मुस्कुराई और बोली “इस … Read more

जिंदगी की दूसरी पारी – आरती निलेश खरबडकर

वृंदा हाथ में बड़ी सी अटैची लेकर घर से बाहर निकल रही थी। उसका भाई उसे लेने आया था। आंसू भरी निगाहों से उसने विनय की ओर देखा। लेकिन आज वो वृंदा से नजरे नही मिला पा रहा था। क्योंकि आज वृंदा की आंखो में अनगिनत सवाल थे और अपार दुःख भी। कितना प्यार किया … Read more

निर्णय – संगीता त्रिपाठी

  “सुलभा तुम ..”एक जानी पहचानी आवाज उसके कानों में टकराई   ,कैसे भूल सकती है इस आवाज को ,जिसकी वो दीवानी थी ,।    पलट कर देखा तो नितांत अजनबी सा बिखरे  सफेद बालों वाला ,मोटे फ्रेम का चश्मा लगाए ,एक प्रौढ़ व्यक्ति खड़ा था । न ये सुशांत नहीं हो सकते……,उसके कानों ने गलत सुना … Read more

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