दादी की जूठन
मैंने बिना एक पल गँवाए, बिना कोई तर्क किए, अपना मुँह खोल दिया। दादी ने अपने कांपते हाथों से वो खीर मेरे मुँह में रख दी। वो साबूदाने की खीर, जो शायद थोड़ी ठंडी हो चुकी थी, मुझे दुनिया का सबसे स्वादिष्ट व्यंजन लगी। उसे निगलते हुए मेरी आँखों से आंसुओं की एक धार बह … Read more