तुलना-मनीषा सिंह : Moral Stories in Hindi

“अंबा! बापू के बातों का बुरा नहीं मानते•• चल कपड़े बाहर निकाल! राधा अपनी बड़ी बेटी जो पेटी में कपड़े डाल वहां से जाने की तैयारी कर रही थी, से बोली। अम्मा! मुझे रूकने के लिए मत बोल भले ही मैं सन्नो जैसी अमीर घर में नहीं ब्याही गई परंतु मेरा भी कुछ स्वाभिमान है! … Read more

 सम्मान की सूखी रोटी – मुकुन्द लाल : Moral Stories in Hindi

 धर्मपाल और  अनीश्वर एक ही मोहल्ले में रहते थे। दोनों पड़ोसी थे। दोनों के मकान पास पास ही थे। दोनों दो विभाग में सर्विस करते थे। अंतर सिर्फ इतना था कि  अनीश्वर अपने दफ्तर का बॉस था, जबकि धर्मपाल अपने ऑफिस का बड़ा बाबू था। कभी- कभार किसी फंक्शन या पर्व त्यौहार के मौकों पर … Read more

 गिरजा बुआ… – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

“जा…गिरजा बुआ को बुला ला… तुझसे नहीं होगा…!” कोई भी शादी ब्याह हो… तीज त्यौहार हो या फिर जन्म मरण… बिना गिरिजा बुआ के तो पूरा माहौल ही सुना हो जाता था… मंडप सजाने से लेकर… रंगोली बनाने… गीत गाने से लेकर अपनी चटपटी बातों से महफिल जमाने में गिरजा बुआ से बेहतर कोई नहीं … Read more

 मेरी दोनों बहुएं बहन जैसी रहती है – दीपा माथुर : Moral Stories in Hindi

धूप सी सुबह थी। रसोई में हँसी की खनक थी। राधिका बेलन से पूरियां बेल रही थी और अनुजा कड़ाही में हलवा चला रही थी। मसालों की खुशबू, दूध की मिठास और दोनों के बीच की खनकती बातचीत जैसे घर को जीवंत बना रही थी। “देख अनुजा,” राधिका ने मुस्कुराते हुए कहा, “इस बार तेरे … Read more

 “सम्मान की सूखी रोटी” – प्रीति श्रीवास्तवा : Moral Stories in Hindi

प्रमिला एक मध्यम वर्ग परिवार की साधारण लड़की थी, वह बहुत सुंदर थी, उसने अंग्रेजी विषय से ग्रेजुएशन किया था, घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण प्रमिला साइकिल से बच्चों के घर जाकर के ट्यूशन पढ़ाया करती ।          एक दिन  प्रमिला ट्यूशन पढाने गई थी, वहां पर एक लड़का आया था ,जिसका … Read more

 सम्मान की सूखी रोटी – विधि जैन : Moral Stories in Hindi

सरिता और मानसी पक्की सहेली थी बचपन से ही दोनों साथ में रहती हर काम एक साथ करती दोनों ने बी ए की परीक्षा साथ में उत्तीर्ण की।  और दोनों की शादी अलग-अलग शहर में हो गई गर्मियों की छुट्टी में कभी कभार दोनों की मुलाकात हो जाती थी। सरिता और मानसी दोनों फोन पर … Read more

 मेरी दोनों बहू आपस में बहन जैसी रहती है – सीमा सिंघी : Moral Stories in Hindi

शाम ढलने को थी।परिंदे भी अपने घर को लौट रहे थे । मैं घर के नजदीक वाले पार्क में जा बैठी मगर आज मन किसी से दो घड़ी बातें करने का नहीं कर रहा था ।  मुझे ऐसा लग रहा था आज मेरे मन के किसी कोने में उदासी जा कर बैठ गई है । … Read more

 आघात – रवीन्द्र कान्त त्यागी : Moral Stories in Hindi

चौधरी मलखान सिंह के गन्ने के कोल्हू पर चहल-पहल थी। कढ़ाव में उबलते रस से मीठी बाप उड़कर सारे वातावरण को मधुर सुगंध से सराबोर कर रही थी। कई मजदूर गन्ना पेरने, खोई सूखाने और भट्टी में सूखी पत्तियों की झोंक लगाने में मगन थे। सफेद धोती कुर्ता पहने और कंधे पर काले सफेद चैक … Read more

 बहू, मैं यहां मुफ़्त का नहीं खाती हूं। – अर्चना खंडेलवाल : Moral Stories in Hindi

मम्मी जी, मेरे ऑफिस जाने का समय हो रहा है, आप यश को दूध पिला देना और कूकर में उसके लिए थोड़ी सी खिचड़ी चढ़ा देना, और हां यश दोपहर को जब सोकर उठे तो ओरेंज जूस भी बना देना, उसमें बर्फ मत डालना, नहीं तो गला पकड़ लेगा और नियति जब स्कूल से आयें … Read more

 मीठी छुरी चलाना – डाॅ संजु झा : Moral Stories in Hindi

काॅलेज में खुबसूरत शीना को देखते  ही अमन उस पर लट्टू  हो गया था।  अमन दिलफेंक  किस्म का इंसान था।उसे पढ़ाई -लिखाई से कोई मतलब नहीं था।वह काॅलेज में शीना के आगे -पीछे घूमा करता था। आखिरकार अपनी चिकनी -चुपड़ी बातों से उसने शीना को अपने प्रेम जाल में फाॅंस ही लिया। सामान्य परिवार की … Read more

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