जिल्लत के छप्पन भोग – मनीषा भरतीया : Moral Stories in Hindi

बाबूजी कब तक मुफ्त की रोटियां तोड़ते रहेंगे?? चलिए उठिए  जाकर बाजार से सब्जी और फल ले आइए…. और हां यह लीजिए 10 किलो गेहूं  है…”इसका आटा भी पिसवा कर ले आइएगा!  “लेकिन प्रिया बेटा तुम तो जानती हो कि मैं 10 दिन से बुखार से पीड़ित था… आज अभी तो बुखार उतरा है… मेरे … Read more

मेरी दोनों बहू आपस में बहन जैसी रहती है! – संध्या सिन्हा : Moral Stories in Hindi

सुरभि आज कल बहुत ख़ुश थी क्योंकि अभी तक वो अपने ससुराल में सबसे छोटी बहू थी जो पूरे परिवार की दुलारी थी , लेकिन कुछ ही दिनों के वो # जेठानी बनने वाली थी।                             सुनिधि का ब्याह एक बड़े परिवार में हुआ था। उसके ससुराल में सास-ससुर और उसकी तीन बड़ी जेठानी और चार … Read more

“सम्मान की सूखी रोटी” – सरोजनी सक्सेना : Moral Stories in Hindi

रामचरण जी की शहर में ऑटो पार्ट्स मैन्युफैक्चरिंग की फैक्ट्री है । रामचरण जी एक सुलझे हुए दयाशील सर्वगुण संपन्न बहिर्मुख व्यक्तित्व के मालिक हैं । व्यवहार कुशलता ही उनके जीवन की आधारशिला है । जो उनके पारिवारिक संस्कारों को आधार है । अपने पारंपरिक व्यवहार कुशलता भाव भंगिमा से परिलक्षित होती है । यही … Read more

दर्द – राशि सिंह : Moral Stories in Hindi

शादी के दस साल बाद भी संतान न हो पाने का दर्द सुहानी को भी है। जब हँसते खिलखिलाते हुए छोटे बच्चों को देखती है तो ममता जा उठती है बारिश के दिनों में बरसने को आतुर उमड़ते घुमड़ते बादलों की तरह मगर जब हकीकत का एहसास होता है तो खुद को रोक लेती है। … Read more

अकेली – गीतू महाजन : Moral Stories in Hindi

“चटाक”, एक झन्नाटेदार तमाचे की आवाज़ आई और रूपेश अपना गाल सहलाता हुआ धम्म से पलंग पर बैठ गया। “दर्द हुआ, ऐसे ही दर्द होता है मुझे..जब तुम अपना हाथ मुझ पर उठाते हो”, मालती गुस्से से चिल्ला उठी थी।  “अभी निकल जा मेरे घर से…अभी के अभी..तेरे जैसी औरत को मैं एक पल भी … Read more

प्रत्यागमन – सुनीता मुखर्जी “श्रुति” : Moral Stories in Hindi

बिपाशा क्या कर रही हो..? यह करने से पहले मुझसे पूछा होता, लवली भाभी बोली।  भाभी यह छोटे-मोटे काम के लिए आपसे क्या पूछना.. अपना घर है, इसलिए मैं खुद ही कर रही हूंँ। नहीं बिपाशा दीदी ..! कौन सामान कहांँ रखना है यह तुम अपनी पसंद से नहीं मुझसे पूछ कर ही रखोगी..? “भाभी … Read more

सम्मान का स्वाद – आरती झा आद्या : Moral Stories in Hindi

काँधे पर झुकी उम्र, आँखों पर मोटे शीशों वाला चश्मा, और उँगलियों में अब भी वर्षों पुरानी सुई की पकड़—ये थे विष्णु प्रसाद। दिल्ली की एक पुरानी गली के कोने पर उनका छोटा-सा सिलाई ठेला था, जो वर्षों पहले एक सुनहरे सपने की तरह शुरू हुआ था। अब वहीं बैठकर वे फटी जेबें टाँकते, टूटे … Read more

 सम्मान की सूखी रोटी – डॉ आभा माहेश्वरी : Moral Stories in Hindi

बूढ़े पिता हरि को गाँव में अकेला छोड़कर उसका बेटा जो शहर में इंजीनियर था बम्बई चला गया और वहीं अपने साथ काम करने वाली वसुधा से शादी करली और बम्बई में ही सैटिल होगया- –अकेला बेटा  लेकिन निर्मोही– जिसको अपने पालक पिता का तनिक भी ख्याल नही– चला गया अकेला छोड़कर असहाय। लेकिन उसके … Read more

 सम्मान किसी पद या विभाग का मोहताज नहीं होता – प्रतिभा भारद्वाज ‘प्रभा’ : Moral Stories in Hindi

सुबह की ठंडी हवा चल रही थी; कैलाश नाथ जी छत पर बैठकर सुबह की चाय का आनंद ले रहे थे और अखबार पढ़ते जा रहे थे कि तभी अखबार के एक पृष्ठ की हैड लाइन पर उनकी नजर पड़ी ‘प्रधानाचार्य कक्ष में बोर्ड परीक्षाएं देते विद्यार्थी पकड़े, कार्यवाही’ जब उन्होंने पूरी खबर पढ़ना शुरू … Read more

 ये हुई ना बात – करुणा मलिक : Moral Stories in Hindi

माधुरी सास की बात सुनकर चुप रही । वह जानती थी कि कुछ भी कह ले …. माँ को अपनी ही बात ऊपर रखने की आदत है । चाहे गलती उनकी ही क्यों ना हो । सच कहें तो अब उसे बुरा भी नहीं लगता था….. या शायद उसने यह कहना सीख लिया था कि … Read more

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