वही हार – विमला गुगलानी : Moral Stories in Hindi

सच ही कहते है कि जब तक ख़ुद पर न बीते असलियत समझ नहीं आती। कैसे हम दूसरों की छोटी से छोटी बात में आसानी से बड़े बड़े नुक़्स निकाल लेते है, लेकिन जब वही काम ख़ुद करना पड़ता है, तो पता चलता है कि कैसी कैसी रूकावटें सामने आती हैं।रूचि के बेटे व्यास की … Read more

 तकदीर फूटना – निमीषा गोस्वामी : Moral Stories in Hindi

आज तो भंडारे का भोजन मिलेगा जल्दी-जल्दी सब काम खत्म करके मालिक से छुट्टी ले लेता हूं। फिर मंदिर जाकर भंडारा खा लूंगा कम से कम एक रात का खाना तो बचेगा।भानू यह सब सोचते हुए माल का ट्रक खाली कर रहा था। बड़े-बड़े बाक्स को उठाकर गोदाम में रख रहा था बस ये आखिरी … Read more

 अपना घर अपना ही होता है – प्रतिमा श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

सुमन चार भाई – बहनों में सबसे बड़ी थी। पिता जी कम उम्र में जिम्मेदारियों का बोझ उसके कंधे पर डाल कर दूसरी दुनिया बसा लिए थे। उनकी सहकर्मी थी रंजना जिसके प्रेम जाल में फंस कर मां और बच्चों को छोड़कर दूसरे शहर जा कर विवाह कर लिया था। मां बहुत टूट गई थी… … Read more

 “इज्जत इंसान की नहीं पैसे की होती है” – प्रतिमा श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

बड़ी बुआ जी की शान शौकत और रुतबा समाज में तो था ही साथ में परिवार में भी खूब चलती थी।जो देखो उनका गुणगान करते नहीं थकता था। बुआ जी को भी अपनी अमीरी पर बहुत घमंड था। जब भी मायके आती सब के लिए कीमती तोहफे लातीं और पैसे भी बताया करती कि फला … Read more

 प्रायश्चित – ऋतु यादव : Moral Stories in Hindi

संस्कृति का हंसता खेलता परिवार उस समय उजड़ गया जब अचानक पति सोहम रोड एक्सीडेंट में उसे छोड़कर चले गए। रह गई अकेली संस्कृति और उसके दो बच्चे। कहने को रुपए पैसे की कोई कमी नहीं थी, सोहम ने इंश्योरेंस, किराए और कई ऐसी स्कीम्स पर इन्वेस्ट कर रखा था कि संस्कृति और बच्चों का … Read more

 सम्मान किसका? – डा० विजय लक्ष्मी : Moral Stories in Hindi

समीर की उंगलियाँ जब भी ब्रश थामती थीं, रंग जैसे सांस लेने लगते थे। कैनवास पर फैला हर रंग, उसकी आत्मा की गहराइयों से निकला एक भाव लगता था। लेकिन हैरत की बात थी कि इन रंगों की आवाज़ कभी किसी ने सुनी ही नहीं। बीते बीस वर्षों से समीर अपनी कला में रमा था।खेलने … Read more

 क्या करूं बहन मेरी तो तक़दीर ही फूटी है। – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

अरे क्या हुआ भाभी जी आप तो बेटा बहू के पास गई थी ,कब वापस आ गई।आप तो कुछ दिन रहने के लिए गई थी न । कुछ दिन क्या अब तो आपको उन्हीं के पास रहना चाहिए ।विजय भाई साहब की इतनी तबियत खराब रहती है कितना कितना तो उनका आपरेशन हो चुका है … Read more

 इज्जत का बाज़ार – डॉ० मनीषा भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

मेट्रो शहर की चकाचौंध में “स्टार र्लाइट टावर्स अमीरी का प्रतीक था। बिल्डर विशाल मल्होत्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की, “यह टावर समाज के ‘एलीट’ को समर्पित है! ” कैमरों की फ्लैश लाइट्स के बीच उसके चेहरे पर अकड़ थी। उधर, सोसाइटी के पिछवाड़े बसे झुग्गी-झोपड़ी में रोशनी बच्चों को पढ़ाती थीं। जब एक … Read more

 इसका क्या दोष? – शुभ्रा बैनर्जी : Moral Stories in Hindi

“मां,अब मैं इस औरत के साथ एक दिन भी नहीं रह सकता।मैं दूसरे घर में शिफ्ट हो रहा हूं आज ही।पापा से नहीं कह पाऊंगा मैं।तुम बता देना,जब बाजार से आएं।उनसे पूछ लेना कि अपने बेटे के साथ रहेंगे या इस घर में।मेरी तकदीर ही फूटी निकली।मेरी वजह से तुम लोगों को भी जाते जी … Read more

 इज्ज़त – खुशी : Moral Stories in Hindi

रीना और राजीव रामदयाल जी की संतान थे।उनकी पत्नी शीला का निधन हो गया तो उन्होंने अपने दोनों बच्चों को फूल की तरह पाला। रामदयाल जी की कपड़ों की बहुत बड़ी फैक्ट्री थी।राजीव ने बीकॉम किया और पिता का कारोबार संभाल लिया।रीना का भी बीए पूरा होते ही उसके लिए लड़का देखा जाने लगा।रीना के … Read more

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