इस गुनाह की माफी नहीं – संजय सिंह

डॉ रमेश जाने-माने प्राइवेट डॉक्टर। अपने जीवन में हर काम को बड़ी ही बारीकी से करना, उनके जीवन की खासियत रही है। समय बीतता गया और जीवन का वह दिन आ गया। जिस दिन अब डॉक्टर रमेश को अपने जीवनसाथी के साथ नए जीवन की शुरुआत करनी थी। उनकी धर्मपत्नी का नाम लक्ष्मी था । … Read more

इस गुनाह की माफी नहीं… – तोषिका

*”इस गुनाह की माफी नहीं”* मिलेगी आपको समझे आप, रोते रोते अमृता बोली और वह से भाग कर अपने कमरे में चली गई और अपने आप को अंदर बंद कर लिया। और वहां उसका पति रोहन बस कड़ा का कड़ा रह गया। आखिर उसने काम ही ऐसा किया था कि वो अब किसी को मुंह … Read more

विरासत खून से नहीं, संस्कारों से मिलती है – रोनिता कुंडु

“अब एक पल भी… बस एक पल भी मैं इस गँवार और सुस्त औरत के साथ नहीं रह  सकता! मेरा स्टैंडर्ड, मेरी रेप्युटेशन, सब मिट्टी में मिला दिया है इसने!” विक्रम की दहाड़ से पूरे बंगले की दीवारें जैसे कांप उठी थीं। लिविंग रूम के बीचों-बीच इटैलियन मार्बल के फर्श पर एक टूटी हुई एंटीक … Read more

खुशी के आँसू – आरती शुक्ला

कमरे में सन्नाटा था, लेकिन सावित्री के मन में शोर गूंज रहा था। आज उसके जीवन का सबसे बड़ा दिन था, और विडंबना देखिए, यही दिन उसके जीवन का सबसे भारी दिन भी साबित हो रहा था। सामने टीवी पर समाचार चल रहा था, जिसमें एक युवा पुलिस अधिकारी को राष्ट्रपति द्वारा वीरता पुरस्कार से … Read more

इस गुनाह की माफी नहीं – गरिमा चौधरी 

 समर ने अपनी गाड़ी पार्किंग में लगाई और एक गहरी सांस ली। ऑफिस की थकान तो थी ही, लेकिन पिछले कुछ महीनों से घर लौटने में उसे एक अजीब सी घबराहट होने लगी थी। लिफ्ट से पांचवीं मंजिल तक जाते हुए उसका मन भारी हो रहा था। उसने चाबी घुमाकर दरवाजा खोला ही था कि … Read more

नया घर – संगीता अग्रवाल 

बारिश की बूंदें कार के शीशे पर लगातार टकरा रही थीं, मानो बाहर का मौसम गाड़ी के भीतर बैठे हरिशंकर बाबू के मन में चल रहे तूफ़ान को भांप गया हो। कार की पिछली सीट पर बैठे सत्तर वर्षीय हरिशंकर अपनी गोद में रखे पुराने ब्रीफकेस को कसकर पकड़े हुए थे। उस ब्रीफकेस में न … Read more

पिता का स्वाभिमान – शुभ्रा बनर्जी

दीवार पर टंगे कैलेंडर की तारीखें जैसे पंख लगाकर उड़ रही थीं। वंदना के लिए यह सफर सिर्फ़ एक शादी में शामिल होने का नहीं था, बल्कि अपनी ममता के एक हिस्से को विदा करने का था। वह अपनी ननद, सुनिधि, की इकलौती बेटी प्रिया की शादी में शामिल होने के लिए इंदौर पहुंची थी। … Read more

गृहस्थी – हेमलता गुप्ता

“मीरा, कल सुबह से तुम और सुमित अपनी रसोई अलग कर लोगे। ऊपर वाले फ्लोर पर छोटा किचन बना हुआ है, गैस और बर्तन मैंने रखवा दिए हैं। राशन का सामान कल सुमित ले आएगा। अब से तुम दोनों का खाना-पीना वहीं होगा।” सावित्री देवी ने अपनी नई-नवेली बहू मीरा से यह बात इतने सपाट … Read more

खामोशी की गूंज – हेमलता गुप्ता

सुबह के 6:30 बज रहे थे। अलार्म की आवाज़ से नहीं, बल्कि रसोई में बर्तनों के पटकने की तेज़ आवाज़ से 65 वर्षीय सुमेधा देवी की आँख खुली। उनके सिर में हल्का भारीपन था। कल रात ब्लड प्रेशर थोड़ा बढ़ा हुआ था, इसलिए नींद देर से आई थी। अभी उन्होंने करवट बदली ही थी कि … Read more

कड़वाहट –  शुभ्रा बनर्जी

मुंबई के एक पॉश बैंक्वेट हॉल में झूमर की रोशनी और शहनाई की धुन के बीच मेहमानों का तांता लगा हुआ था। अवसर था ‘आरव’ का अन्नप्राशन संस्कार। आरव, जो शिखा और मयंक का पहला बेटा था, आज मखमल की शेरवानी में किसी राजकुमार से कम नहीं लग रहा था। मीरा अपने पति, आकाश, के … Read more

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