रिश्ते अहंकार से नहीं त्याग और माफी से चलते हैं – मंजू ओमर 

आज बेटे के घर से वापस आते वक्त संध्या के गले से लगाकर सौम्या रो पड़ी, मम्मी मुझे माफ कर दो , मम्मी मैंने आपका बहुत दिल दुखाया है।आप मुझसे बात करो , मुझे अच्छा नहीं लगता आप बात नहीं करती तो। संध्या जी का मन थोड़ा पसीज गया और कह उठी ठीक है पुरानी … Read more

चौथी बेटी – परमा दत्त झा

अरे रमेश बाबू अब आप खतरे से बाहर हैं।आप सभी से मिल सकते हैं।-यह डा मिश्र बंसल के थै जो रूटीन विजिट में आये थे। मैं कहां हूं, मुझे क्या हुआ था -ये अकचका गये। आपको सिरियस हार्ट अटैक आया था और आप अस्पताल में भर्ती हैं।परसों आपकी बायपास सर्जरी हुई है।-डा उन्हें समझाते बोले। … Read more

बाँझ – रीतू गुप्ता

“संध्या,संध्या जल्दी आओ यार… डॉक्टर के पास जाना है ना आज…सारे टेस्ट होने है ना आज  … भूल गई क्या?”~ तैयार होते हुए मेहुल बोला। संध्या~ “आ रही हूं जी।” संध्या और मेहुल की शादी को 5 साल हो गए थे । दोनों के कोई औलाद नहीं थी। आज डॉ. के कहने पर सभी टेस्ट … Read more

रिश्ते – शालिनी दीक्षित

डॉक्टर की क्लीनिक में बैठे हुए मनीषा की नजर दूसरी तरफ बैठे हुए एक इंसान पर पड़ी, दुख और टेंशन में भी उसके चेहरे पर चमक सी आ गई लेकिन वो सोच में पड़ गई क्या ये सच मे अनुराग है? पहचान पाना मुश्किल हो सकता है क्योकि करीब करीब 25 साल हो गए उस … Read more

“कठोर शब्दों की पीड़ा ” – कमलेश आहूजा

“क्या इसी दिन के लिए तुम्हें इतना पढ़ाया लिखाया था,कि तुम अपने पिता को समझाओ क्या गलत है?क्या सही?मैं मर जाऊँ तो मेरा मुँह भी मत देखना।” पिता के मुँह से ऐसे कठोर वचन सुनकर नेहा बहुत रोई।उसकी गलती सिर्फ इतनी थी,कि वो अपने पापा को ये समझा रही थी..माँ को परेशान ना किया करें … Read more

एक आंख ना भाना – विनीता सिंह

रमेश एक छोटे शहर का लड़का था उसने बड़ी मेहनत की मुंबई में एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी प्राप्त कर ली। वह दिन रात मेहनत करता जिससे उसकी कंपनी ऊंचाईयों को छूए। यह सब देख कम्पनी के मालिक अनूप सेठी जी रमेश के काम से खुश थे उन्होंने रमेश की ईमानदारी और मेहनत देखते हुए … Read more

नालायक बेटा – शुभ्रा बैनर्जी

“सुनो मधु,आज जैसे ही शंभू आए मुझसे मिलने के लिए कहना।पता नहीं कब आता है,मुंह छिपाकर कमरे में चला जाता है।तुम भी तो कमरे में जाकर खाना दे आती हो। दो दिन नहीं खाएगा ना,तो सब अकल ठिकाने पर लग जाएगी।मुझसे कभी सीधे मुंह बात भी नहीं करता। शर्मा जी के बेटे को देखो।राम है … Read more

एक आँख न भाना – मीरा सजवान ‘मानवी’

राधा और सुषमा एक ही मोहल्ले में रहती थीं। दोनों पहले बहुत अच्छी सहेलियाँ थीं—साथ बाजार जातीं, त्यौहार मनातीं, और हर बात साझा करतीं। पर वक्त के साथ रिश्तों में एक छोटी सी दरार आ गई। हुआ यूँ कि एक दिन राधा की बेटी ने स्कूल प्रतियोगिता में पहला स्थान पा लिया तो सुषमा के … Read more

कुछ गलती की माफ़ी नहीं होती – लतिका पल्लवी

रामायण जी के घर पर सत्यनारायण की पूजा हो रही थी। करीब करीब पूरा गाँव इकट्ठा था।आज रामायण जी के पोते का पहला जन्मदिन था।वे इस ख़ुशी मे नारायण पूजा करवा रहे थे उसके बाद भोज का भी इंतजाम था।पूजा हो ही रही थी कि तभी उनके पड़ोस का लड़का संजय दो लड़को के साथ … Read more

दुआ का असर – लतिका श्रीवास्तव

शाम ढल रही थी धीमे धीमे।सूर्यास्त की लालिमा बहुत मनोयोग से आसमान को अपने आगोश में लेने को तत्पर हो चली थी।सांध्यकालीन आकाश में बादलों की मनोहारी छटा किसी अनोखे अबूझ चित्रकार की सधी हुई तूलिका से अनुपम रंग संयोजन  उकेरने में दत्त चित्त थी।कैसा चित्रकार है यह जो रोज उसी काम को पूरी तत्परता … Read more

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