मुझे एतराज़ है – रश्मि प्रकाश :  Moral Stories in Hindi

“ बस करिए पापा… इतना जहर कैसे उगल सकते हैं आप…. जो दिन रात आपके हर काम में लगी रहती है उसको जाहिल गंवार कहते आपकी ज़ुबान लड़खड़ाती क्यों नहीं है….अब तो आप माँ को ऐसे बोलना बंद कर दो…घर में नई बहू आ गई है ये सब देख कर वो क्या सोचेगी सोचा है … Read more

जाहिल कौन – कमलेश राणा : Moral Stories in Hindi

सेठ धनपत राय के यहां केतकी उनके पारिवारिक सदस्य की तरह रहती थीं। जब से सलिल ने होश संभाला था उनका प्यार भरा स्पर्श हमेशा महसूस किया था। वो अपने बेटे सरजू से भी ज्यादा प्यार करती थीं सलिल को और वह भी उसे अपना सच्चा दोस्त मानता था। चाहे वह बात अच्छी हो या … Read more

जाहिल -रेनू अग्रवाल :  Moral Stories in Hindi

गाँव के चौपाल में बैठे लोग अक्सर रघुनाथ को देखकर हँसते, कोई कहता – “अरे, वो रहा जाहिल!” तो कोई ताना मार देता – “इससे बात करोगे तो अपनी भी अक्ल कम हो जाएगी।” रघुनाथ को पढ़ाई-लिखाई का कभी मौका ही नहीं मिला। बचपन में ही बाप चल बसे, माँ खेतों में मज़दूरी करती रही, … Read more

जाहिल,गंवार हो क्या – मंजू ओमर

कैसे जाहिल लोग हैं पढ़े लिखे हैं की गवांर है। अरे क्या हो गया आज फिर क्यों सवेरे सवेरे बड़बड़ किये जा रहे हो पुष्पा जी ने पति अरुण जी से पूछा। अरे क्या बताऊं देखो तो सब जगह पानी की कितनी त्राहि त्राहि मची है और लोग बिना मतलब की पानी बर्बाद करते रहते … Read more

बिटिया का घर बसने दो। – मधु वशिष्ठ :

 Moral Stories in Hindi बिटिया का घर बसने दो। कल भी जब मैं इनकम टैक्स ऑफिस गया था तो रमन को वहां बैठे देखा। उसने दफ्तर में ही सबके बीच में मेरे पैर भी छुए और मेरा काम भी आसानी से हो गया। भाई मुझे तो रमन अपनी बेटी शिप्रा के लिए बहुत पसंद है। … Read more

परिवार – खुशी :

 Moral Stories in Hindi जगन्नाथ जी समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति थे जिनकी कपड़े की मिल थी।घर में दो बेटे विनय और गौरव प्यारी सी बेटी मेघा और पत्नी पूजा थे।सुखी परिवार था। जगन्नाथ जी बाहर का देखते और उनकी मां जानकी देवी की मृत्य के बाद घर की सारी जिम्मेदारी पूजा पर थी।जब तक सास … Read more

राज को राज रहने दो – डॉ बीना कुण्डलिया :

आज रेखा सवेरे सवेरे जल्दी उठ गई उसको बाजार जाना था बहुत सामान जो खरीदना उठकर बिस्तर में बैठे बैठे सोचने लगी जल्दी से घर के काम निपटा सीधे बाजार की तरफ निकल जाऊंगी दरअसल उसे आज ही शाम की ट्रेन से अपने मायके के लिए निकलना था। राखी का त्यौहार जो था साल में … Read more

हैलो ! कामिनी कैसी है – सुदर्शन सचदेवा :  Moral Stories in Hindi

सुबह ६ बजे ही फोन कर दिया | रवि ने फोन उठाया | हां जी मम्मी जी ! बोलो  ! आवाज़ में नींद भरी हुई थी, प्लीज़ सोने दिजिए , बाद में फोन करना | सुबह सुबह नींद खराब कर दी , एक तो रात को देर से आता हूं और अब……… कामिनी ! इधर … Read more

बिटिया का घर बसने दो – कंचन प्रभापांडे :  Moral Stories in Hindi

सृष्टि किसी उलझन में बैठी हुई थी तभी कॉल वेल बजती है। सृष्टि उठाती है तो उसकी मां दहाड़ती है कहां जा रही है? गेट नहीं खोलना ,घुमक्कड़ आया होगा। सृष्टि के कदम रुक जाते हैं कुछ देर बाद फोन की रिंग बजती है ।सृष्टि जैसे ही फोन उठाती है उसकी मां की आवाज आती … Read more

बिटिया का घर बसने दो -के कामेश्वरी :  Moral Stories in Hindi

सावित्री दस दिन से शापिंग करने में व्यस्त थी साथ ही …… अपनी पल्लू से आँसू पोंछती जा रही थी क्योंकि ……उसकी बेटी रत्ना की बिदाई जो है । वह बहुत कुछ अपनी बेटी को देना चाहती थी ……इसलिए जितना भी खरीदती थी उसका दिल नहीं भरता था । यहाँ तक ठीक है ….. लेकिन … Read more

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