नाम लेने से इज्ज़त नहीं घटती…!  – मीनू झा

क्या बताऊं विमला..तू तो मेरा स्वभाव जानती है ना मैं शुरू से बहुत मीन मेख निकालने वाली नहीं रही हूं…जो खाना है खाओ जो पहनना हो पहनो जैसे रहना हो रहो जहां जाना आना है जाओ आओ…तुम तो देखती हो ना…बड़ी बहू के समय से ही हां सविता भाभी…बड़ी किस्मत वाली है तुम्हारी बहुएं सच … Read more

सही राह – लतिका श्रीवास्तव

वृद्धाश्रम के दरवाजे पर ही पिता रमानाथ जी को उतार कर राजन चलने लगा तो वृद्ध अशक्त पिता ने कोई शिकायत नहीं की बस आंसू भरी आंखों और रुंधे गले से हमेशा की तरह सदा खुश रहो बेटा का आशीष जरूर दिया जिसे सुनने के लिए बेटा राजन रुका ही नहीं….तुरंत कार स्टार्ट करके घर … Read more

मां हो बच्चों की ढाल बनो उन्हें कमजोर मत करो। – संगीता अग्रवाल 

” मम्मी देखो मेरे चोट लग गई !” पांच साल का आरव पार्क में खेलते हुए गिरने पर रोता हुआ वही बैठी अपनी मम्मी के पास आया। ” ओह माई गॉड इतनी चोट चलो जल्दी घर डेटॉल से साफ करके पट्टी कर दूंगी !” आरव की मम्मी स्वाति उसकी चोट को देख बोली उसके ऐसा … Read more

बहू ने बेटे को घर से निकाल दिया –  पूजा अरोरा

आज वृंदा जब आँगन में बैठी धूप सेंक रही थी तो पास बैठे उसके पोते-पोती गली के दूसरे बच्चों के साथ घर-घर खेल रहे थे कि अचानक उसके पोते अंश की आवाज कानों में पड़ी, “हमारे घर कोई शराब नहीं पीता, य़ह बुरी बात है | हैं ना दादी!” मुस्कराकर वृंदा ने स्वीकृति में गर्दन … Read more

ऐसी बहु हो तो बेटी की क्या जरूरत – कुमुद मोहन 

“बेटा क्या थोड़ा टाइम निकाल कर मुझे एक जगह ड्राॅप कर दोगी?” नीरा ने अपनी बहू सुमी से पूछा? “क्यूँ नहीं मम्मा,कब कहाँ जाना है बताईये?” सुमी ने बड़े प्यार से कहा। “असल में जब हम कानपुर में थे,हमारे पड़ोसी शर्मा जी से हमारी अच्छी दोस्ती थी,उनकी वाइफ़ का मायका यहाँ है,लंबा अरसा हो गया … Read more

अपाहिज कौन है – संगीता त्रिपाठी

“ये क्या अनर्थ कर दिया तुमने।” सुमन जोर से चिल्लाई। तुझे क्या लड़कियों की अकाल पड़ी थी जो एक पैर ख़राब वाली लड़की से कोर्ट- मैरिज कर ली। “नहीं माँ!!मैंने कोई अनर्थ नहीं किया एक दिन आप भी महसूस करोगी “सोहम ने सुमन को समझाते हुई कहा। “मेरे बेटे को फंसा कर तुम्हे चैन मिल … Read more

संस्कार – मंजुला 

“शाम के साढे पाँच बज रहे थे। मैं न्यू मार्केट के बस स्टाॅप शेड में खड़ी बस का इंतज़ार कर रही थी। सामने से आती सूरज की चमकीली किरणें शेड से टकराती हुई मेरे चेहरे को जला रही थीं। शरीर पहले ही पसीने से तर-बतर हो रहा था। मैं दो कदम पीछे हट गयी। तभी … Read more

कुछ नहीं – विजया डालमिया

नीला आज सारे काम जल्दी जल्दी करके बार-बार घड़ी देख रही थी। हर टिक -टिक के साथ उसके दिल के धक-धक भी बढ़ते जा रही थी ।…”ओ माय गॉड 5:00 बज गए पता नहीं कब निलेश आ जाए दोस्तों को लेकर”। उसने एक लंबी साँस ली और फटाफट बर्तन साफ करने में जुट गई।…” कमबख्त … Read more

संस्कार तो गिरवी रख दिये – चेतना अग्रवाल

वह हमारा सपनों का घर था और आपने उसे गिरवी रख दिया।” कहते-कहते काजल की आँखों में आँसू आ गये। “मुझे भी बहुत दुख है, काजल। लेकिन मैं क्या करता। लड़के वालों की माँग थी गाड़ी की। कहाँ से देता…. कितना जोड़-तोड़ करके शादी का इंतजाम किया था। दो दिन रह गये हैं शादी में। … Read more

संस्कार – पूजा मिश्रा

  मैं अपने दूर के रिश्ते के भाई अशोक के यहाँ कानपुर अपने इलाज के लिये आई थी ,भाई डाक्टर है सही राय देगा और अगर रुकने को कहेगा तो रुक जाऊंगी यही सोचकर आई थी ।   अशोक ने बहुत प्यार से मेरी पूरी बात सुनकर इलाज के लिये सही राय दी टेस्ट बगैरह के लिये … Read more

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