मिलन – डाॅ उर्मिला सिन्हा
“मां…मां..आप सुन रही हैं न.. हम परसों सुबह पहुंच रहे हैं..बाय..” बेटा आयं..बायं ..हजारों बातें…अपनी मां से फोन पर ……उम्र के आखिरी पडा़व पर वह..अपनी देवी सदृश मां का आंचल .. खुशियों से भर देना चाह रहा था.. “ठीक है…ठीक है..”वे सुन कहां रही थी..दिल-दिमाग में तूफान -सा मचा हुआ था. आज चालीस वर्षों … Read more