मिलन – डाॅ उर्मिला सिन्हा

 “मां…मां..आप सुन रही हैं न.. हम परसों सुबह पहुंच रहे हैं..बाय..”    बेटा आयं..बायं   ..हजारों  बातें…अपनी मां से फोन पर ……उम्र के आखिरी पडा़व पर वह..अपनी देवी सदृश मां  का आंचल .. खुशियों से भर देना चाह रहा था..          “ठीक है…ठीक है..”वे सुन कहां रही थी..दिल-दिमाग में तूफान -सा मचा हुआ था.  आज चालीस वर्षों … Read more

माँ जी संस्कारों की बात आप तो कीजिये ही मत – (पार्ट – 2 एवं अंतिम भाग)  – मीनाक्षी सिंह 

जैसा कि अभी तक आपने पढ़ा बबिता जी की बीटिया बिन्दू रात के 9 बजे रोते हुए अपने मायके आयी ! उसकी भाभी संगीता ने दरवाजा खोला ! बबिता जी पूछती हैं – बिन्दू री क्या हुआ ,,तू इतनी घबरायी हुई क्यूँ हैं ?? सब ठीक तो हैं ,,दामाद जी नहीं आये क्या ! अब … Read more

संस्कार : नौकरी करने वाली में भी होता है   – सुभद्रा प्रसाद 

” मम्मी , लिजीए, चाय” सुघा ने चाय का कप देते हुए कहा |       “अरे, इतनी सुबह तुम उठ गई ” सुषमा चाय का कप पकडते हुए बोली |          “मुझे पता है, आप सुबह जल्दी उठ जाती हैं और चाय पीती हैं |” सुघा  उनके बगल में बैठते हुए बोली -“मम्मी, ठंड बढ़ गई है … Read more

विज्ञापन में नारी – कल्पना मिश्रा 

“चाचा ,देखना अब खूब सारी लड़कियाँ आपसे लिपटकर इत्ती सारी किस्सी लेंगी” सूरज को डियो डालते देखकर छह साल की रिया ने अपने नन्हें-नन्हें हाथ फैलाते हुए कहा तो वह हँस पड़ा “ये क्या कह रही है बेटू… ऐसे कहाँ देखा?” सूरज ने पूछा तो उसने टेलीविजन की तरफ इशारा किया “इस पर दिखाते हैं … Read more

आलसी बहु  – चेतना अग्रवाल

“अनुज, जरा थोड़ी देर के लिए गुनगुन को सँभाल लीजिए। लगातार रो रही है, इस तरह मैं रसोई में काम नहीं कर पा रही।” खाना बनाती रचना ने रसोई से अपने पति को आवाज दी जो टी वी देखने में मशगूल था। रचना के सास-ससुर भी हॉल में बैठे टी वी देख रहे थे। अनुज … Read more

नहीं! मुझे बुरा नहीं लगता। – मधू वशिष्ट 

“सुनो, आज शाम को सरसों का साग बना कर रखना, थोड़ा सा गाजर गोभी का अचार भी डाल देना। यह रोटी ले जाओ, ठंडी हो गई है गरम फुल्का ले आना।” बिना विरोध किए गंगा विनय की हर बात मुस्कुराकर मानी जा रही थी। शीला ने देखा था रात को जीजा जी ने सोते हुए … Read more

बेकारी की दौड़ – माता प्रसाद दुबे

बेकारी की दौड़ में जीत हासिल करना आसान नहीं होता। ना जाने कितने लोगों का पूरा जीवन इस दौड़ को पूरा करने में समाप्त हो जाता है। रविवार का दिन था। रेलवे स्टेशन की बेंच पर बैठा हुआ प्रकाश हजारों की संख्या में रेलवे की भर्ती की परीक्षा देने आए नौजवानों की भीड़ देखकर वह … Read more

“यह कैसा संस्कार” – ऋतु अग्रवाल

 “मम्मीजी! कल मेरे मामाजी और मामीजी लखनऊ से आ रहे हैं। वे लोग मुंबई घूमने आ रहे हैं। एक  दिन यहाँ रुक कर फिर वे लोग अपने होटल चले जाएँगे।” श्रुति ने अपनी सास से कहा तो उन्होंने कुछ कहा तो नहीं बस चुपचाप अपने कमरे में चली गई।        अगले दिन श्रुति की सासू माँ … Read more

संस्कार पिलाए नहीं जाते…! – वर्षा गर्ग

ऑटो से उतरते ही हलचल का अंदाज़ हो चुका था।  दोपहर के वक्त शांत रहने वाली हमारी हाउसिंग सोसाइटी में चहल पहल थी।  मैन गेट से आगे आई तो एक एंबुलेंस नजर आई।  हे ईश्वर!सबकी रक्षा करना। मन ही मन भगवान का नाम लेते हुए आगे बढ़ी मैं। लिफ्ट के पास कुछ परिचित चेहरे नजर … Read more

चाभी – मीनाक्षी सौरभ

“अंकल, आप जब भी फ़्री हों तो प्लीज़ फ़ोटोग्राफ़र से बोलिएगा कि हमें भी डांडिया नाइट की फ़ोटोज़ शेयर करे।” खाने की टेबल पर बैठी प्रिया ने कहा। “हाँ, उस दिन हमारी ज़्यादा फ़ोटोज़ ही नहीं हो पाईं थीं। हम लोग होस्टिंग में बिजी थे।” रावी भी मुस्कुराते हुए बोली। “ज़रूर बेटा। बहुत सारी फ़ोटोज़ … Read more

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