मेरी हम सफर – डा. मधु आंधीवाल

” चलते चलते मुझे कोई मिल गया था “       सुनिधि बड़ी  गहराई में उतर कर ये गाना सुन रही थी । सोच रही थी जिन्दगी में कभी कभी इतनी आकस्मिक घटनायें घट जाती है जो सोच से परे होती हैं । सुनिधि की परीक्षा चल रही थी एम.ए फायनल दो पेपर रह गये थे ।  … Read more

साझा घर – हरीश कण्डवाल मनखी

विमल पूरे देश विदेश घूमने के बाद वह जब पहली बार अपने गाँव आया तो उसे लगा की उसने गाँव आने में देरी कर दी, उसका गांव अब सड़क से जुड़ चुका है, सभी सुविधाएं जो गाँव मे होंनी चाहिए वह है, दो  दिन गांव में रहा। गाँव मे रहकर यँहा की साधारण जीवन और … Read more

छोटी सी बात – नीलम सौरभ

“चलो यार जल्दी! हाथ-वाथ धोओ, कैंटीन चलते हैं….भूख से जान निकल रही है!” लंचब्रेक होते ही उमंग ने अपनी जगह साफ की और पहना हुआ सफेद एप्रन उतारते हुए साथ में प्रैक्टिकल कर रहे देवांग और सागर से कहा।___”हाँ हाँ चलो! आज तो लैब के केमिकल्स की स्मेल से तो मेरा सर ही घूमने लग … Read more

घर के बच्चों में भेदभाव कैसा? – रश्मि प्रकाश 

राशि जब से ब्याह कर अपने ससुराल आई कुछ बातों को देखकर उसका मन बहुत विचलित हो जाता था पर वो नई होने के नाते कुछ बोल नहीं पाती थी… उपर से उसकी बड़ी जेठानी रचिता वो तो बच्चों के सामने ही भेदभाव कर दिया करती थी… पर आज जो राशि ने देखा उसे लग … Read more

हमारा -परिवार – संगीता श्रीवास्तव

  ” तुम हमारे घर के मामलों में दखल मत दो , यह ‘हमारा परिवार’ है मेरा नहीं।” झल्लाते हुए मधुरिमा ने अपनी सहेली निकिता से कहा। “मुझे कैसे क्या करना है मैं जानती हूं। आज बाबू जी होते तो शायद…….  उन्होंने मरने से पहले मुझसे कहा था ,”बहु मेरे बाद बड़ी बहू होने के नाते … Read more

हक़ बराबर का !!! – अल्पना 

हर बार पापा मुझे ही क्यूँ रोकते है कुछ करने से …. भाई तो मुझसे छोटा है फिर भी पापा  उसको जन्मदिन पर कैमरा दिए । मैं कहती हूँ की मैं वाइल्ड लाइफ़ फ़ोटोग्राफ़र बनूँगी तो मुझे हर बार लड़की होने का एहसास करवाते है । तुम बाहर अकेली कैसे जाओगी ,लड़की हो इंजीनियर डाक्टर … Read more

 वीणा की झंकार – बालेश्वर गुप्ता

 माँ तू भी? तू तो नारी है,फिर भी मुझे ही प्रताड़ित करती रहती है, क्यूँ भला? सारे दिन कॉलेज जाने से पहले ,फिर बाद में घर का सब काम करना,और बाद में तेरी कठोर वाणी,चल वीणा पढ़ाई कर।थक जाती हूँ मां, थक जाती हूँ।         वीणा की वाणी सुन सुमन आँखों के कोर में आँसू लिये … Read more

भेदभाव क्यों ? – नंदिनी 

आराधना के दो बेटे एक बेटी थी बेटी दूसरे नम्बर की थी । बड़े बेटे आकाश की नोकरी दूर बैंगलोर शहर में थी वो अपने परिवार के साथ वही रहता था बड़ी बहु नैना भी अच्छे अमीर परिवार की चुनी थी आराधना ने , दूसरे बेटे रोहित ने अपने पिता के जाने के बाद ज्वैलरी … Read more

  प्रेतात्मका का प्रतिशोध (  भाग तीन   ) – गणेश पुरोहित 

 रामप्रकाश जिसने आज तक कभी साइकिल नहीं चलाई थी, पर आज वह बम्बई की सड़को पर कार दौड़ा रहा है। वह आत्महत्या करने घर से निकला था, पर आज बम्बई की सड़कों पर एक लग्ज़री कार में घूम रहा है। सब कुछ अचम्भित करने वाला नज़ारा है, जिसे रामप्रकाश मूक दर्शक की तरह बैठा हुआ देख … Read more

 प्रेतात्मका का प्रतिशोध (  भाग दो   ) – गणेश पुरोहित

रामप्रकाश को बैठे-बैठे ही बहुत गहरी नींद आ गई। जब उसकी आंख खुली तब सुबह हो गई थी। तकरीबन आठ-नो घंटे की भरपूर नींद के बाद उसे ताजगी महसूस हो रही थी। एक दिन पहले की रात को वह एक दु:स्वपन समझ कर भुलना चाहता था, परन्तु उस रात के घटनाक्रम की स्मृतियों ने उसके … Read more

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