प्यार है,भेदभाव नहीं – विभा गुप्ता

 बहुत दिनों से मेरी इच्छा थी ‘गोल्डन टेम्पल’ देखने की।कभी बच्चों की परीक्षाएँ हो जाती तो कभी पति को ऑफ़िस से छुट्टी नहीं मिलती और हमें अपना बनाया हुआ प्रोग्राम कैंसिल कर देना पड़ता था।अब इन ज़िम्मेदारियों से मुक्त हो गये तो पिछले दिसम्बर में हमने अमृतसर जाना तय किया और वो भी ट्रेन से … Read more

“भेद नजर का” – डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा

सीमा सुबह से तैयारियां कर रही थी। सबके लिए  नाश्ते बनाने के बाद उसे खुद के लिए तैयार होना था। काम इतना बढ़ गया था कि कम होने का नाम ही नहीं ले रहा था। सासु माँ बार- बार किचन में आकर बोल रही थीं “-  बहू जल्दी करो,जल्दी से काम निपटा लो और तैयार … Read more

खिलौनों में भेदभाव कैसा – प्रीती वर्मा

कितनी उत्साहित थी वो, सुबह से अनगिनत बार मुझसे पूछ चुकी थी.. मम्मा कब पहुंचेंगे चाचू जी,मैं तो परेशान हो चुकी थी उसे बताते बताते कि चाचू शाम को पहुंचेंगे।और सिर्फ तान्या ही नही, जेठानी का बेटा अरनव भी सुधीर के आने से उत्साहित था।घर के दोनो बच्चे सुधीर का बेसब्री से इंतजार कर रहे … Read more

सर्वगुण संपन्न – शुभ्रा बैनर्जी 

शरीर पर लगे चोट के निशान दिख भी जातें हैं और मरहम-पट्टी करने पर ठीक भी हो सकते हैं,पर जब मन घायल होता है, तब उसके ना तो निशान दिखाई देतें हैं और ना ही कोई मरहम लग पाता है। दर्द की टीस मौन रोती रहती है,आजन्म रिसती रहती है। सर्वगुण संपन्न थी सुदेशना।दिखने में … Read more

तुम्हे क्या पता…..?   – उषा भारद्वाज

 अस्पताल के पलंग पर वह थी। पास में उसके बेटा लेटा था, जिसका 2 दिन पहले ही जन्म हुआ था । प्राइवेट रूम खाली खाली न होने के कारण सेमी प्राइवेट लेना पड़ा। जिसमें तीन बेड थे एक खाली धा दो भरे थे जिसमे एक पर नेहा थी और दूसरे पर एक महिला थी जिसका … Read more

तीन देशों का संगम,पर कोई भेदभाव नहीं – सुषमा यादव

बड़ी बेटी रीना ने अपनी छोटी बहन का जन्मदिन मनाने का प्लान बनाया, उसने अपनी छोटी बहन रितु को एक दिन पहले लंदन से आने को कहा, इसके साथ ही अपने इंडिया, लंदन और फ्रांस के दोस्तों को भी आमंत्रित किया, मम्मी आईं हैं तो बर्थडे धूम धाम से मनाया जाना चाहिए,रीना ने सोचा,। रितु … Read more

मासूम फूल मुरझाने ना पाए – संगीता अग्रवाल 

निशा अपनी बेटियों के कमरे मे बैठी एक कॉपी लिए लगातार आंसू बहा रही थी। वो कॉपी थी उसकी बड़ी बेटी श्रेया की। वो श्रेया जो कभी निशा की जान थी पर जबसे उसकी दूसरी बेटी पीहू आई तबसे ना जाने निशा को क्या हो गया वो बात बात पर श्रेया के साथ भेदभाव करती … Read more

जाकी रही भावना जैसी – पूनम अरोड़ा

ईशा रोज  स्कूल से  आके जब बस से उतरती  तो  गेट पर अपनी जितनी उम्र  की लड़की को बैठे देखती । समझ नही आता कि वो इस समय रोज यहाँ  अकेली क्यों  बैठती है और क्यों ? शक्ल से वो भिखारी भी नहीं  लगती थी न ही उसके हाव भाव ऐसे थे कि कुछ माँगने … Read more

चिड़िया उड़ जायेगी  – डा.मधु आंधीवाल

दादी ने अपनी लाडली पोती से कहा — देखो मानसी अब तुम्हारा सम्बन्ध पक्का होगया । रोका हो गया । एक बात गांठ बांध लो बेटा ससुराल की बड़ी बहू बन कर जा रही हो । सम्बन्धों को एक जगह बांध कर रखना तुम्हारी परीक्षा है। मानसी– दादी आपने मुझे जो संस्कार दिये हैं आपको … Read more

झूठी अमीरी का झूठा दंभ –  पूजा मनोज अग्रवाल

सुशीला,,,, तुम्हें कितनी बार कहा है,,।।यूं रोज़ रोज़ मेरे सामने बहू की बुराई ना किया करो,,,।। पता नहीं रोज़ की चिक चिक में तुम्हें क्या मज़ा आता है । हां – हां !!मैं ही तो चिक चिक करती हूं,,। तुम्हारी बहू तो दूध की धुली है । तुम जानते नहीं कितनी चालाक है,,,अपने त्रिया चरित्र … Read more

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