साथी हाथ बढ़ाना – नीरजा नामदेव

 सुमित और तन्मय मौसेरे भाई थे। दोनों अलग-अलग शहर में रहते थे। उनकी उम्र में 5 साल का अंतर था। वे छुट्टियों में हमेशा एक दूसरे से मिलते रहते थे। दोनों में बहुत स्नेह था। सुमित बी.टेक .कर रहा था। तन्मय11वीं कक्षा में पहुंच गया था ।उसने गणित विषय लिया था।बाकी विषय तो उसे समझ … Read more

मैं और मेरी दुनिया – के कामेश्वरी

मैं विजया हूँ । मेरी एक खूबसूरत छोटी सी दुनिया है । मेरे माता-पिता की तीन बेटों के बीच मैं अकेली लाड़ली बेटी हूँ । मुझे माता-पिता ने मास्टर्स कराया मैंने फ़िज़िक्स में मास्टर्स किया । मैं बहुत ही होशियार थी । अपने माता-पिता का नाम रोशन किया वे गर्व से लोगों को बताते थे … Read more

हमसफर – गरिमा जैन 

हर किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता कही जमीं कही आसमां नहीं मिलता  आरती का हमसफर उसे विवाह के पहले ही वर्ष छोड़कर चला गया । लेकिन अब आरती अकेली नहीं थी उसके साथ छोटा सा रोहन भी था। इतनी लंबी जिंदगी कैसे कटेगी?  पंडित कहते आरती के जीवन में पति का सुख नहीं लिखा … Read more

आखिर कब तक – नीलिमा सिंघल 

रात के 12 बज गए थे पर तनुजा की आँखों मे नींद नहीं थी वो बार बार फोन उठाती कुछ देखते फिर रख देती, नीलेश बहुत देर से तनुजा की हरकतों को देख रहा था पर जब रहा नहीं गया तो झुंझला कर बोला,” क्या, तनुजा, सारा दिन मोबाइल हाथ मे रहता है और अब … Read more

प्यार की जिद.. – दिव्या  शर्मा

“वृंदा….!!” “छनाक…।” एक आवाज हुई और उसकी हथेली लहुलुहान हो गई।दर्द की लहर नसों में दौड़ गई।वह यथार्थ में लौट आया।हाथ में पकड़ा शराब का गिलास उसकी ऊंगलियों के दबाव से चकनाचूर हो चुका था।बिल्कुल उसके दिल की तरह। वह भी तो रीस रहा था… रो रहा था…. वृंदा की फोटू को सीने से लगाए … Read more

सोच बहू की ” – सरोज माहेश्वरी

सुबह के 9 बजे चुके थे राधा अपने कमरे में अभी तक सो रही थी…नाश्ते की टेबल पर उसकी हमउम्र भावी शालिनी सभी का मनपसंद नाश्ता बनाकर सभी के आने का इंतजार कर रही थी….उसे दस बजे कॉलेज पढ़ाने भी जाना था….राधा की इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी घर बैठ कर नौकरी के … Read more

वाह पापा ,दोस्ती हो तो आप जैसी  – मीनाक्षी सिंह 

अनीता,घर की नई नवेली बहू ,जिसके ब्याह को अभी 8 माह ही हुए थे ,घूंघट किये ,घर के  बाहर गेट पर कूड़े वाली गाड़ी में कचरा फेंक रही थी कि तभी उसे एक बुजूर्ग आदमी मैली कुचैली धोती कुर्ता पहने हाथ में लाठी लिए ,आँखों पर चश्मा लगाये  ,अनीता के घर की तरफ टकटकी लगाये, … Read more

हक – नन्दिनी

मालती जी का भरा पूरा परिवार तीन बेटे तीन बहुएँ छोटे बेटे की शादी अभी दो महीने पहले ही हुई । पोता पोती से भरा पूरा परिवार भूली न समाती थीं मालती जी पूरे घर पर राज था ,सब काम उनके हिसाब से ही होता तीज त्यौहार पर क्या बनेगा , बहु मैके कब जाएगी … Read more

विदाई – अभिलाषा कक्कड़

वकील जयराम ने फ़ोन रखते ही अपनी ओर आँखें गड़ाये पुरे परिवार की ओर देखा । सब बड़ी आस लगाए उनकी ओर देख रहे थे । बेटी प्रीति कोने में चुपचाप बिना कोई उत्सुकता दिखाये आराम से बैठी अपना टी वी देख रही थी । जैसे वो जानती थी कि जवाब क्या है ।माँ यशोदा … Read more

 ‘ सच्चा सुख ‘ –   विभा गुप्ता

 आज पूरा घर रंग – बिरंगी रोशनी से जगमगा रहा था।ममता दुल्हन बनी अपने होने वाले पति के सपनों में खोई बारात के आने का इंतज़ार कर रही थी।बचपन से वह राजकुमार-सा पति ,बड़ी गाड़ी , नौकर- चाकर और सुख -सुविधाओं से भरे घर का सपना देखती आई थी जो आज पूरा होने जा रहा … Read more

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