गलती किसकी..? – रोनिता कुंडू

रीमा और सिया दो बहने थी…. जहां रीमा को अपना हर काम मेहनत और लगन से पूरा करने का जुनून था…. वहीं सीमा को हर काम जल्दबाजी में करना पसंद था… रीमा कोई भी काम को समय से पूरा नहीं कर पाती थी, क्योंकि उसकी बारिकियां छांटते छांटते उसे वक्त लग जाता था और सिया … Read more

कभी कभी ननद को भी खर्च  कर देना चाहिये – मीनाक्षी सिंह 

मीरा बड़ी ख़ुशी से माँ के घर आयी पूरे एक साल बाद गर्मियों की छुट्टी में ! माँ पिछली साल गुजर गयी ! पापा जब वो 8 साल की थी तभी परलोक सिधार गए ! उसे लगा भईया ,भाभी वैसी ही इज्जत देंगे जैसी माँ के सामने मिलती थी ! वैसे भी मीरा को फुर्सत … Read more

#टैग का है जमाना भेदभाव से करो किनारा – स्नेह ज्योति

भगवान भी कंफ्यूज किस की सुने ! किस की नहीं !! जहाँ आशा की तेज-तेज चिल्लाने की आवाज़ आ रही थी, वही संजीव और उसकी माँ की राम नाम जपते हुए “भगवान इस बार मुझे लड़का चाहिए पहले भी लड़की हो गयी,पर इस बार मेरी लाज रख लो भगवान“। तभी नर्स बाहर आते हुए मुबारक … Read more

प्यार…धोखा और…. मर्डर – संगीता अग्रवाल

मै बालिग़ हूँ अपने फैसले कर सकती हूँ आप लोगो को कोई हक नही मुझपर अपने फैसले थोपने का !” सरला जी के कानो मे अभी तक बेटी रिया के ये अंतिम शब्द गूँज रहे थे जो उसने चार दिन पहले घर छोड़ने से पहले कहे थे । कितना समझाया था उनके पति और रिया … Read more

गृहणी –  रंजना वर्मा उन्मुक्त

गौरी अपने पति से बड़ी नाराज थी। क्यों वह उसे शहर ले आया? वह अपना गाँव छोड़कर नहीं आना चाहती थी ।गाँव के साथ उसकी बहुत सारी यादें जुड़ी हुई थी। वहीं उसका जन्म हुआ और वहीं वह पली-बढ़ी ।वहीं उसके माता-पिता ,भाई-बहन और ससुराल में सास- ससुर रहते थे। इसके अलावा उसका पति हर … Read more

“सास हो तो ऐसी” –  कविता भड़ाना

घर का माहौल आज बड़ा बोझिल सा हो रहा था  कांता जी कई दिनों से ये बदलाव महसूस तो कर रही थी की दोनों बहुएं आपस में ना तो बात कर रही है और ना ही पहले की तरह घर के कामों में खुशी खुशी सहयोग ही कर रही है,पर उन्हें समझ नही आ रहा … Read more

तुलसी वाले बाबा – गीता वाधवानी 

दुर्गा देवी ने अपने बेटे सुशील को अपने पास बुलाया और कहा-“सुशील, पास वाले गांव में तुलसी वाले बाबा जी आए हुए हैं। राहुल की दादी बता रही थी कि लोग उनके पास संतान प्राप्ति के लिए और विशेषकर पुत्र संतान के लिए आशीर्वाद लेने जाते हैं। बाबा जी जिन लोगों को प्रसाद के रूप … Read more

स्नेह का जुड़ाव – लतिका श्रीवास्तव

आज ऑफिस में काम ही इतना ज्यादा था कि श्रुति थक के चूर हो गई थी ऐसा मन हो रहा था घर पहुंचते ही कोई इलायची वाली गरम गरम चाय बना कर दे दे फिर थोड़ी देर कमर सीधी कर लूं…..घर में घुसते ही ड्राइंग रूम से बातें करने हंसने की आवाजे सुनाई पड़ी श्रुति … Read more

सहारा –  संगीता त्रिपाठी

 “मम्मा.. टीचर ने भेदभाव पर निबंध लिखने को कहा है, आप थोड़ा मदद करोगी “कक्षा पांच में पढ़ने वाला मेहुल ने अपनी माँ मीना से पूछा..।     “हाँ क्यों नहीं, तुम लिखना शुरु करो, मै तुम्हे मदद कर दूंगी “मीना ने बेटे को दिलासा दिया।       “मम्मा, पहले भेदभाव तो स्पष्ट करो ..”मेहुल ने कहा।      “भेदभाव करना … Read more

मायके की महक – पूनम अरोड़ा 

शादी के बाद जब भी मायके जाती मम्मी, पापा, भाई सभी लोग स्टेशन पे लेने आते, हुड़क के गले लगते। घर पर मेरे मनपसन्द व्यंजन बने होते, सब चाव से खातिरदारी में जुटे रहते। शाम को चाय के समय कभी पापा बाजा़र से खस्ता, कभी समोसे ले आते तो कभी मम्मी पकौडे़ तल लेती। रात … Read more

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