थी … – निवेदिता श्रीवास्तव ‘निवी’

सच कब से इधर से उधर भटकती वो सबके मुँह से बस यही सुन रह थी … पहले के कुछ शब्द अलग – अलग से  होते ,परन्तु अंत मे यही ‘थी’  ही आ कर वाक्य को पूर्ण कर रहा था। कहीं सच मे कुछ नम तो कुछ बहती हुई पलकें थीं ,तो कहीं मन की … Read more

सुहाग चिन्ह – डाॅ उर्मिला सिन्हा

   गंगा कावेरी दोनो बचपन की सहेलियां थी।दांतकाटी मित्रता थी दोनो में।साथ-साथ बडे़ हुये ,खेला पढाई की।गुड्डे गुड्डियों की व्याह रचायी ।गर्मी के दोपहरी में  कच्ची अंबिया पिछवाडे़ से तोड़ नमक-मिर्च लगाकर चटखारे एक साथ लिये।   “चल सावन के झूले लगे!”  “हां हां कजरी गायेंगे।”संग संग सावन में पींगे भरी। सर्दियों में लाल पीली हरी नीली … Read more

“खानदानी जेवर” – रणजीत सिंह भाटिया

” अरे भाई मंजू जल्दी करो रास्ते में ट्राफिक भी बहुत होगा”  मिस्टर प्रेम पगारे अपनी पत्नी को पुकार रहे थे…जी बस 5 मिनट में आई अंदर से मंजू की आवाज आई… I            ड्राइवर कार को अच्छी तरह से चमका कर तैयार खड़ा था, मिस्टर पगारे उनकी पत्नी मंजू और उसका बेटा राकेश कार में … Read more

दिखावा – उमा वर्मा

रवि को आफिस भेज कर निश्चिन्त होकर बैठी तो एक कप और चाय पीने का मन हो आया ।रसोई में गैस पर चाय चढ़ाया और तबतक घर को व्यवस्थित कर लिया ।जब तक सब अपने अपने काम पर निकलते नहीं तबतक घर लगता है कुश्ती का अखाड़ा बना रहता है ।चाय तैयार हो गई ।कप … Read more

  “दिखावा ” – डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा

एक जरूरी मीटिंग के सिलसिले में सुधा लखनऊ आयी थी। लखनऊ आने से पहले वह सोच कर ही आयी थी कि मीटिंग खत्म होने के बाद वह अपनी  छोटी सी दस साल की भतीजी पीहू से मिलकर जायेगी। मीटिंग खत्म होते ही सुधा भाभी की बहन के घर की ओर चल पड़ी। जैसे ही बरामदे … Read more

पति क्या घर के काम नहीं कर सकते – मीनाक्षी सिंह

सुनो ,अंदर आ जाओ ,बाद में डाल देना कपड़े बालकनी में ! विमला खड़ी हैँ बाहर ! क्यूँ इसमें क्या हुआ ,क्या मैं अपने घर के कपड़े नहीं सुखाने को डाल सकता ! रोहित अपनी पत्नी पारूल से बोला ! तुम्हे नहीं पता ये सब औरतें शाम को पंचायत करती हैँ बैठकर कि पारूल का … Read more

दिखावे के बादल – डॉ संगीता गाँधी

“पापा,जब उन लोगों की कोई डिमांड नहीं तो आप क्यों ये सब दे रहे हैं?”“यदि डिमांड होती भी तो भी दहेज देना भी अपराध है।”पिता को दहेज जुटाते देख विनीत ने आश्चर्य से कहा।“बेटा, समाज व उसके कुछ नियम भी होते हैं।समधी जी ने कुछ भले न मांगा, तो क्या मैं अपनी इकलौती बेटी को … Read more

‘ दिखावा’ मेरी मजबूरी है – विभा गुप्ता

  ” दीपा…! तू यहाँ कैसे? तेरे मियाँ जी का ट्रांसफर हो गया है क्या?” शाॅपिंग माॅल में अचानक अपनी पुरानी सहेली को देखकर नेहा खुशी-से उछल पड़ी।   ” आं…हाँ…, कुछ ऐसा ही समझ ले।” दीपा ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया।  ” वाह यार! माथे पर लाल बिंदी, माँग में सिंदूर,गले में मंगलसूत्र और हाथों में … Read more

गुरूजी – पिंकी नारंग

आप भी ना ममा पार्टी मे जा रही है किसी सत्संग या भजन संध्या मे नही, जो आपने ऐसे कपडे पहन लिए, कुछ तो ड्रेस सेंस रखा  करो ना मेरी भोली, प्यारी माँ | जमाना बदल गया है, उसके साथ कदम से कदम मिला कर चलना पड़ता है, इनफैक्ट चलना नही दौड़ना होता है, नही … Read more

मुझे दिखावा पसंद नहीं सिमरन….. – मीनाक्षी सिंह

यार सिमरन तुम रोज रोज यहीं बातें लेकर क्यूँ घर में कलेश करती हो ! हमारी शादी को दस साल हो गए हैँ ,जब मैं अभी तक नहीं बदला  तो अब क्या ही बदलूँगा ,और वैसे भी मुझे बदलना भी नहीं ,ये दिखावा मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं … इसमें क्या दिखावा हैँ राहुल ,बताना … Read more

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