थी … – निवेदिता श्रीवास्तव ‘निवी’
सच कब से इधर से उधर भटकती वो सबके मुँह से बस यही सुन रह थी … पहले के कुछ शब्द अलग – अलग से होते ,परन्तु अंत मे यही ‘थी’ ही आ कर वाक्य को पूर्ण कर रहा था। कहीं सच मे कुछ नम तो कुछ बहती हुई पलकें थीं ,तो कहीं मन की … Read more