ये रिश्ते दिलों के रिश्ते! – नीलम सौरभ

“ये देबाशीष दत्ता भी न…पता नहीं क्या चाहता है? न कुछ बोलता है न कुछ पूछता है…और तो और किसी बात का जवाब भी नहीं देता नालायक…मिट्टी के माधो की तरह बैठा बस घूरता रहता है नासपीटा। उसकी क्लास को तो अब पढ़ाना भी मुश्किल होता जा रहा है…पिछले किसी जन्म की कोई दुश्मनी निकाल … Read more

आखिर गलती समझ आई – डॉ संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : शगुन की नई नई शादी हुई थी विमल से,ससुराल में सब बहुत अच्छे थे,भरा पूरा परिवार था,सास,ससुर,देवर ,जेठ जेठानी और एक शादीशुदा नन्द,नंदोई। सब शगुन को बहुत प्यार और सम्मान करते,वो भी खुश रहती थी पर कई दफा विमल के साथ जिस एकांत को वो शुरू से चाहती थी वो … Read more

आत्मग्लानि (अंतिम भाग) – स्वाती जैंन : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : बेटा , बस यही वजह थी कि वह घर के कामों से बचने के लिए मुझे भी कहीं आने जाने नहीं देना चाहती थी , मैं जिसे उसका प्यार समझती थी वह उसका स्वार्थी पना था बस ओर कुछ नहीं , मुझे बड़ी देर से सब समझ में आया !! … Read more

आत्मग्लानि (भाग 3) – स्वाती जैंन : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : एक दिन कावेरी जी फोन पर स्वरा से बोली कि कैसे वह घर के सारे काम काज संभाल लेती हैं और बहु नेहा नौकरी पर जाती हैं !! नेहा मुझसे बहुत प्यार करती हैं बेटा और कहती हैं सासु मां आप इस उम्र में भी कितनी एक्टिव हैं और इतना … Read more

आत्मग्लानि (भाग 2) – स्वाती जैंन : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : स्वरा की सासू मां गायत्री जी बोली कि उन्हें स्वरा के नौकरी करने से कोई आपत्ति नहीं बस फिर क्या था स्वरा और राहुल का रिश्ता तय हो गया , शादी के बाद पंद्रह दिन तो घूमने फिरने और रिश्तेदारों के यहां आने जाने में निकल गए इसलिए स्वरा के … Read more

आत्मग्लानि (भाग 1) – स्वाती जैंन : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : पापा नितिन के घरवाले नहीं चाहते कि मैं शादी के बाद नौकरी करूं और अगर नौकरी करूं भी तो घर के सारे काम मुझे ही करने होंगे ऐसा नितिन का कहना हैं इसलिए मैं नितिन से शादी नहीं करना चाहती स्वरा अपने पापा गिरधारी जी से बोली !! गिरधारी जी … Read more

आंगन की दीवार : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi :  “देखिए शांति जी, मैं प्यार से समझ रही हूं सीधी तरह मान जाइए, वरना गुस्सा मुझे भी आता है।”कस्तूरी ने बड़ी मुश्किल से अपनी आवाज को कड़क करते हुए अपनी साथ वाली पड़ोसन शांति से कहा।   दरअसल शांति अपने नाम के बिल्कुल विपरीत थी। हर किसी से ऊंचा बोलना, अपना … Read more

ताउम्र ग्लानि रही : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi :  ” साहब…आज गरीबों में कपड़े और खाना-दवाइयाँ बँटवानी है।” बहादुर ने अपने मालिक से कहा।   ” हाँ बहादुर, याद है…हाॅल में रखे सभी सामानों को तुम गाड़ी में भरो..मैं अभी आता हूँ।” कहकर अविनाश ने बीस-पचास के नोटों का बंडल अपने पर्स में रखे, गर्म शाॅल अपने कंधे पर डाली … Read more

निगाहें (अंतिम भाग ) –  सीमा बाकरे : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : सोमेश ने फिर से फ़ोन लगाया, पर इस बार फोन व्यस्त है ऐसा संदेशा आने लगा।हारकर उसने फोन लगाना बंद कर दिया और पेपर्स हाथ में लेकर ध्यान से पढ़ने लगा। उसमें लिखा था, में रामदयाल अपनी जमीन ,घर अपने मित्र हरिलाल के नाम कर रहा हूं। हस्ताक्षर रामदयाल। भैया … Read more

निगाहें (भाग 3) –  सीमा बाकरे : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : ये सब बहुत छोटी बातें थीं, जिनके बारे में सोमेश सोचना भी नहीं चाहता था, क्योंकि उसकी संस्कारों में मां -बाप के लिए कुछ भी करना ये बच्चे के लिए सम्मान की बात थी ना कि उन पर किसी तरह का एहसान करना है।पर ना चाहते हुए भी उसे बचपन … Read more

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