झूठा-सच – शुभ्रा बैनर्जी : Moral Stories in Hindi

माधवी होस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। कंप्यूटर साइंस के मास्टर डिग्री का फाइनल इयर चल रहा था।बेटी बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थी,तो रमा जी(मां)और शंकर जी(पिता )ने उसे बाहर रहकर पढ़ने की आजादी दी थी।वैसे इससे पहले उनके खानदान की कोई भी बेटी घर से बाहर पढ़ने नहीं गई थी,पर रमा … Read more

परिणाम- दिक्षा बागदरे : Moral Stories in Hindi

राहुल सर पकड़ कर बैठा हुआ था और बहुत रो रहा था। उसे दिन में तारे नजर आ रहे थे। घर में हर कोई उसे समझा कर हार चुका था।  सौम्या जो कि राहुल की मां थी वह एक चाइल्ड काउंसलर थी। और कहते हैं ना कि डॉक्टर कभी अपने घर वालों  का इलाज नहीं … Read more

दिन में तारे दिखाई देना. – शनाया अहम : Moral Stories in Hindi

दिन में तारे दिखाई देना” मुहावरा संजना पर सही बैठता है , संजना जो एक मध्यम वर्गीय परिवार की लड़की हैं , और बहुत सुन्दर है।  संजना को बचपन से अपने गोरे रंग, ऊँचे क़द , लम्बे घने काले बाल और गहरी झील सी आँखों पर नाज़ रहा है।  संजना की खूबसूरती देखते ही बनती … Read more

गुरूर. – निभा राजीव “निर्वी” : Moral Stories in Hindi

पीहू और कुहू ने सुनंदा जी को प्यार से सहारा देते हुए गाड़ी में बैठाया और दोनों उनके अगल-बगल बैठ गईं। शीघ्र ही गाड़ी ने रफ्तार पकड़ ली। सुनंदा जी के शरीर का बायाँ लकवाग्रस्त भाग निश्चेष्ट पड़ा हुआ था और वह कांपते हुए दाएं हाथ से अपनी भींगी आंखों को पोंछने का प्रयास कर … Read more

गुरूर. – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

भैया आप माँ को कुछ दिनों के लिए अपने घर में रख सकते हैं क्या ? पल्लवी ने फोन पर राजीव से कहा । राजीव ने कहा कि क्या बात है बिटटो माँ को कुछ हुआ है क्या या फिर तुम्हारे पति ने कुछ कहा है ? नहीं भाई ऐसी कोई बात नहीं है । … Read more

गुरूर. – विनोद सिन्हा “सुदामा” : Moral Stories in Hindi

सलमा बेगम को जैसे ही खबर मिली की उनकी बेटी जन्नत गैस सिलेंडर फट जाने एवं घर में आग लग जाने से बुरी तरह जल गई है और उसे हॉस्पिटल ले जाया गया है.. सब-कुछ छोड़ बताए हॉस्पिटल की ओर दौड़ी दौड़ी भागी.. जहां उनकी बेटी जन्नत ज़िंदगी और मौत से जुझ रही थी, वो … Read more

मेरे गुरूर – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

“क्या बात है… रोज तो सुबह अलार्म की भी तुझे जरूरत नहीं पड़ती… आज इतनी देर तक कैसे पड़ी है… वंदना उठ… उठ बेटा…!”  मां ने हिलाया तो वंदना चादर को और कसकर पकड़ते हुए जैसे रुंधे गले से बोली…” नहीं मां… नहीं जाना…!” ” नहीं जाना… पर बेटा आज तो तनख्वाह मिलने वाली है … Read more

साॅरी दीदी – रेनू दत्त : Moral Stories in Hindi

वीनू दीदी की आज बहुत याद आ रही है। मेरे अंतस के किसी गहन कक्ष में एक अदालत बन गई है जहां जज, वादी, प्रतिवादी, गवाह सब मैं ही हूं। दीदी मुझसे चार साल बड़ी थी। उजले सूरज सा खिलता रंग, फुर्सत में बनाए गए नैन नक्श और उस पर सौम्यता की ऐसी परत कि … Read more

दिन में तारे दिखाई देना – शनाया अहम : Moral Stories in Hindi

संजना जो एक मध्यम वर्गीय परिवार की लड़की हैं , और बहुत सुन्दर है।  संजना को बचपन से अपने गोरे रंग, ऊँचे क़द , लम्बे घने काले बाल और गहरी झील सी आँखों पर नाज़ रहा है।  संजना की खूबसूरती देखते ही बनती थी। संजना हर वक़्त अपनी खूबसूरती को निहारती रहती थी ,उसे सारा … Read more

मैं मजबूर नही – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

पापा ..पापा कहां हैं आप ?” नंदिनी ने घर में घुसते ही अपने पिता ओमकार जी को आवाज दी। ” बेटा मैं यहां हूं !” रसोई में से पिता की आवाज सुन नंदिनी वहीं पहुंच गई। ” अरे पापा आप खाना बना रहे है हटिए मैं बनाती हूं …ओह आपको तो बुखार है पापा। आपने … Read more

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