गुरुर – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

ऑफिस में नये साल पर मॉल में खुले नये रेस्टोरेंट में लंच होना तय किया गया,सुबह सबको मुबारकवाद देने में गुजरा, दोपहर में लंच के लिये सहकर्मी वर्मा जी के साथ सुधाकर जी मॉल पहुँचे, सीढ़ियों पर बैठे एक स्कूली लड़के और लड़की को देख, वर्मा जी बोले, “क्या जमाना आ गया, स्कूल बंक कर … Read more

अपना अपना – अंजना ठाकुर : Moral Stories in Hindi

गुरुर  आज इस्त्री के लिए नीरा कपड़े देने आई तो पहले तो इस्त्री वाले पर चिल्लाई की तुम्हारा बेटा कपड़े लेने क्यों नहीं आ रहा ।और एक घंटे मै करके पहुंचा देना । इस्त्री वाला बोला मैडम अभी मेरे बेटे की परीक्षा चल रही है तो कुछ दिन आप लोगों को ही आना पड़ेगा लेने … Read more

गुरुर – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

भैया आप माँ को कुछ दिनों के लिए अपने घर में रख सकते हैं क्या ? पल्लवी ने फोन पर राजीव से कहा । राजीव ने कहा कि क्या बात है बिटटो माँ को कुछ हुआ है क्या या फिर तुम्हारे पति ने कुछ कहा है ? नहीं भाई ऐसी कोई बात नहीं है । … Read more

गुरुर – डाॅक्टर संजु झा। : Moral Stories in Hindi

आजकल के समय में केवल बेटे ही नहीं बेटियाँ भी माता-पिता की गरुर होती हैं।राम प्रसाद जी की तीन बेटियाँ थीं।तीन बेटियों के बाद उन्होंने बेटे की आस छोड़ दी।हाँ! उनकी पत्नी सीमा जी के मन में जरुर बेटे की तड़प बनी हुई थी।गाहे-बगाहे अपने मन की इच्छा पति से व्यक्त करते हुए कहतीं -” … Read more

गुरुर – मनीषा सिंह : Moral Stories in Hindi

शालिनी जी एक सिंगल मदर थी तथा केंद्रीय विद्यालय में हिंदी की शिक्षिका के रूप में कार्यरत थीं।  दो बेटियां अवंतिका और अनुराधा उनकी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा थीं । अब चुकी सिंगल मदर थीं तो घर की सारी जिम्मेदारियां उनको निभानी थी।  शालिनी जी  बेटियों की शिक्षा में कोई कसर नहीं रहने देना … Read more

जीवन का सवेरा (भाग -13 ) – आरती झा आद्या : Moral stories in hindi

“सॉरी रोहित.. मैं भी तो खुद से भागने के चक्कर में खुद को खत्म करना चाहती थी। ऐसे तो कभी किसी समस्या का समाधान ना निकले। सामने से समस्या को फेस नहीं करना, ये तो खुद की समस्या को बढ़ाना ही है। अब तो सबको बताती हूँ खुद से भागने से बेहतर है खुद को … Read more

गुरुर – श्रद्धा खरे : Moral Stories in Hindi

शारदा की शादी के कुछ महीने बाद ही उसके देवर मदन की शादी हुई ,और शारदा को घर में एक छोटी बहन के रूप में  कृष्णा मिली ।        दोनों की आपस में बहुत बनती थी, घर के कामों को दोनों मिलजुल कर पूरी लगन से करती  सास ,ननद देवर सब यही कहते  कि इन दोनों … Read more

स्मार्ट पापा !! – संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

सविता ओ सविता …..लो बहू ….सबको बांट दो ….कैलाश जी ने कागज का ठोंगा पकड़ाते हुए कहां….! काग़ज़ के एक थैले में कैलाश जी मसूरपाग लाए थे… जिसे घर के सभी सदस्यों में बांटने को कहा….। पास में ही बेटी निधि बैठी थी.. जो दो दिन पहले ही मायके आई हुई थी …..उसे पापा का … Read more

गुरुर – वीणा सिंह : Moral Stories in Hindi

सुमी का फोन सुबह सुबह देख कर मुस्कुरा उठी.. बचपन की सहेली..सुमी ने एक सांस में हीं कह डाला जान तुझे याद है मेरी छोटी बहन सेजल.. एचडीएफसी बैंक में पीओ बनकर तुम्हारे शहर में तीन महीने पहले हीं गई है.. उसके पति दूसरे शहर में जॉब करते हैं इसलिए शनिवार और रविवार को रहते … Read more

मायके का मान – आरती झा आद्या  : Moral Stories in Hindi

चाहत का मायका उसके लिए सबसे बड़ा उपहार था। जब भी वह अपने मायके की चौखट पर कदम रखती, उसे ऐसा लगता मानो सारा संसार उसके स्वागत में खड़ा हो गया हो। एक आवाज़ पर सब दौड़े चले आते, उसकी हर छोटी-बड़ी खुशी का ध्यान रखते। चाहत की ननद की शादी थी। इस अवसर पर … Read more

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